आदरणीय प्रकाश मनु का जन्मदिन

देवेंद्र सत्यार्थी और प्रकाश मनु
कदम कदम पर आशा अपना रूप-अनूप दिखाती है
बिगड़े काज बनाती है, धीरज के गीत सुनाती है
इसका सुर मिस्री से मीठा इसकी तार सजीली बाबा
दुनिया रंग रंगीली बाबा, दुनिया रंग रंगीली॥
सुदर्शन
दुनिया वास्तव में रंग-रंगीली और वैविध्य से भरी है। यहाँ हर प्रकार के, अच्छे-बुरे-बदलते लोग आते-जाते रहते हैं। ऐसे में किसी सच्चे, सरल, निस्वार्थ व्यक्ति का मिलना मन प्रसन्न कर देता है। कवि-कथाकार, लेखक-सम्पादक प्रकाश मनु जी ऐसे ही लाखों में एक, निश्छल व्यक्ति हैं। मई मास में उनका जन्मदिन होता है। 12 मई 1950 को जन्मे स्वनामधन्य हिंदी साहित्यकार को जन्मदिन की बधाई और अनंत मंगलकामनाएँ! सेतु परिवार भाग्यशाली है कि उनकी रचनाओं के रूप में हमें उनका आशीर्वाद मिलता रहा है। इसी माह देवेंद्र सत्यार्थी जी का जन्मदिन भी होता है। इस अंक में हम सब उन्हें याद कर रहे हैं, उनकी आत्मकथा अंश के साथ, उनकी पुत्री अलका सोईं तथा प्रकाश मनु जी के सौजन्य से। 

30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस था। सभी को बधाइयाँ! पत्रकारिता एक महत्त्वपूर्ण दायित्व है। एक समय था कि अखबार में छप जाना भर किसी कथ्य को तथ्य, तथा जानकारी को ब्रह्मवाक्य सदृश बना देता था। आजकल की संचार-क्रांति के युग में स्थिति एकदम विपरीत हो गयी है। खासकर सोशल मीडिया पर अनेक झूठ संस्थागत रूप से फैलाये जा रहे हैं। दुःख की बात यह है कि जन-सामान्य का सामान्यज्ञान इतना कम है कि सत्य पर हज़ार सवाल उठाने वाले समाज में लोग सोशल-मीडिया पर आये हर झूठ को फैलाने में जुट जाते हैं। हर झूठ ग़लत है, लेकिन कई झूठ समाज के लिये खतरनाक होते हैं। ऐसा ही एक झूठ आयोडीन-युक्त नमक बनाम सैंधव नमक के बारे में फैलाया जा रहा है जिसका सार यह है कि सैंधव नमक हटाकर देश में आयोडीनयुक्त नमक को एक ऐसे षडयंत्र द्वारा लाया गया जिसका उद्देश्य समाज को नपुंसक बनाना है। इसी संदेश में यह भी बताया जा रहा है कि अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, और डेनमार्क सहित 56 देशों में आयोडीन युक्त नमक प्रतिबंधित है। इस संदेश में कई बातें ग़लत हैं। यहाँ अमेरिका में सादा समुद्री नमक, आयोडीन-युक्त नमक, और सैंधव नमक (हिमालयन रॉक सॉल्ट के नाम से) आदि सभी मिलते हैं। आयोडीन-युक्त नमक से नपुंसक होने की बात एक खतरनाक झूठ है क्योंकि आयोडीन एक ऐसा ट्रेस मिनरल है जिसकी कमी भारत में आम थी जिसके दुष्परिणाम थॉयरॉइड से सम्बंधित सामान्य समस्याओं, मनोरोग आदि से लेकर प्रतिरोध-अक्षमता और गर्भपात तक कई रूपों  में दृष्टिगोचर होते थे। इस अनिवार्य खनिज की कमी का एक परिणाम घेघा रोग था जिसके पीड़ित भारत में यहाँ-वहाँ दिख जाते थे। नमक जैसे सस्ते और मूलभूत भोज्य-पदार्थ में आयोडीन मिलाना वास्तव में कुपोषण मिटाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी। आयोडीन-युक्त नमक के प्रयोग ने घेघा रोग को भारत से लगभग समाप्त कर दिया है। इस संदेश का दूसरा असत्य सैंधव नमक के बारे में है। सच यह है कि देश के विभाजन के बाद सैंधव नमक के क्षेत्र पाकिस्तान में चले गये थे और भारत में प्रयोग के लिये उसे आयात करना पड़ता था। इमरान खान के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत के साथ व्यापारिक सम्बंध तोड़ने के कारण यह सीधा आयात भी रुक गया है। सोशल मीडिया पर लायी जाने वाली झूठी खबरें खूब नमक-मिर्च लगाकर चटपटी बनायी जाती हैं। मेरा अनुरोध है कि समाज, देश, और मानवता के हित में इन असत्य समाचारों को आगे फैलाने से रोकें।

शुभकामनाएँ!

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 मई 2023 ✍️

1 comment :

  1. प्रिय भाई अनुराग जी,
    जन्मदिन पर बहुतों से शुभकामनाएँ मिलीं, पर आपसे और 'सेतु' पत्रिका से मिली शुभकामनाएँ सबसे अनमोल हैं, और उन्होंने मुझे भावुक बना दिया है। मैं प्रसन्नता भरी, लेकिन नम आवाज में आपको साधुवाद देता हूँ।

    'सेतु' से मैं देर से जुड़ा, पर कामना करता हूँ, कि जीवन की आखिरी साँसों तक यह रिश्ता चलता रहे। मेरे लिए इसकी बड़ी अहमियत है। 'सेतु' से जुड़कर महसूस होता है, दुनिया के सारे हिंदीभाषी साहित्यिकों से मैं संवाद कर रहा हूँ, और यह सच ही एक रोमांचक अहसास है।

    हर बार की तरह इस बार भी आपने संपादकीय में झूठ और अफवाहों पर कसकर चोट की है। यह दिमाग की बंद खिड़कियाँ खोलने के लिए जरूरी दस्तक है। और मैं इसका स्वागत करता हूँ। आखिर तो यह दुनिया साफ और निर्मल हो, भीतर-बाहर से सुंदर हो, साहित्य और कलाओं का भी यही मकसद है।

    मुझे याद आ रहा है, पिछली बार के संपादकीय में पाकिस्तान के चरित्र और वहाँ की सरकारी नीतियों पर भी आपने ऐसा ही जबरदस्त संपादकीय लिखा था, जिसे पढ़कर बहुत अच्छा लगा था। शायद इसलिए कि पहली बार मैंने पाकिस्तान के बारे में बड़े बेलौस अंदाज में वे बातें पढ़ीं, जो लाखों लोग महसूस करते हैं, पर इतने साफ और खुले ढंग से कहता कोई नहीं है।

    कोई जनता की भाषा में जनता की बात कहे, तो मन कुर्बान जाता है। मुझे लगता है, दुनिया में इससे बड़ी कोई कला नहीं है।

    शायद इसीलिए 'सेतु' से मेरा और मेरे जैसे बहुत पाठकों का दिली रिश्ता है।

    आपने लगातार कितनी मेहनत और रात-दिन के तप से इसे बनाया है, मैं अच्छे से इसे समझ पाता हूँ। इसलिए मन ही मन आपको दुआएँ दिए बगैर नहीं रह पाता।

    मेरा बहुत-बहुत स्नेह और शुभकामनाएँ,
    प्रकाश मनु

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