काव्य: मेनिका साकेत

मेनिका साकेत
चलो! जीवन की ओर बढ़ते हैं

कुछ पाने की कोशिश,
थोड़ी मेहनत करते हैं।
एक-दूजे का हाथ पकड़,
सब साथ-साथ चलते हैं।
आशाओं के दीप जला,
दुनिया जगमग करते हैं।
आओ स्व-कर्तव्य जानने,
चलो! जीवन की ओर बढ़ते हैं।

मन में अरमान जगा,
कोई उमंग भरते हैं।
नित नए अनुभव लेकर,  
दृढ़ निश्चय करते हैं।
आओ, कदम से कदम मिला,
नवजीवन की राहें बुनते हैं।
जीवन की हर जड़ जानने,
चलो! जीवन की ओर बढ़ते हैं।

कोई कौतूहल-हलचल हो,
या परिस्थिति कि प्रकृति नई,
आओ जानने इन्हें,
हर संभव कोशिश करते हैं।
उभर रहे गंदे मनसूबे भी,
मन से साफ़ करते हैं।
एक सच्चा जीवन परखने,
चलो! जीवन की ओर बढ़ते हैं।

बेरहमों को रहम,
ज़ख्म पर मरहम लगाने
बिखरों का समुदाय,
आपस में हमदर्द बनने,
आगे- आगे चलते हैं।
दिलों में, खुशियों के जगाने,
उस पर बात करते हैं।
 दिलखुश जीवन बनाने,
चलो! जीवन की ओर बढ़ते हैं।


संजों रखे जो स्वप्न सुहाने,
संभावनाएं उन्हें सौंपते हैं।
हर आश को सांस देने,
आओ अच्छा काम करते हैं।
जनकल्याण का हिस्सा बन,
ससमूह प्रयास करते हैं।
सबको नवसंकल्प दिलाने,
चलो! जीवन की ओर बढ़ते हैं।
***


मैंने उगता सूरज देखा

आज ठंडी भोर सजी,
नभ पर नई चमक उठी,
काली रैना बीत गई,
नवभोर चेतना जाग उठी।

जब बादल का आक्षेप हुआ,
इनको चीरती सूर्यज्योत में,
तब मैंने उसका चित्रण देखा –
कुछ उजड़ गए,
कुछ बिखर गए,
कुछ श्वेत धूसर- लाल हुए,
काले बादल सिमट गए सब,
जब पीली आभा ने लिया स्थान।

चिड़ियों का मधुर गान हुआ,
धरती का हरा प्रधान।
सूरज ने अपना तेज़ लिया,
तब नीला सारा आकाश हुआ,
और नया विहान।

तब प्रकृति नियम परख,
नवजीवन संदेश लिया।
स्वयं प्रभा स्वरूप से ही,
रोशन अपना संसार हुआ,
अब जाकर महसूस हुआ,
कि मैंने उगता सूरज देखा।
***

परिचय: मेनिका साकेत
जन्मतिथि: 8 जुलाई, 1995
शिक्षा:
बी.एस-सी., एम.एस-सी., बी.एड, (अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा)
पीजीडीसीए, एलएल.बी (डॉ. हरीसिह गौर विश्वविद्यालय. सागर)।
प्रमाण पत्र: एनएसएस, वाद-विवाद, भाषण, राज्य स्तरीय क्रिकेट व बैड मिटंन खिलाड़ी, पोस्टर मेकिंग, कार्टूनिग, पतंगबाज़ी।
रुचि: शतरंज खेलना, किताब वाचन, डायरी लेखन।
ईमेल: menikasaketrewa@gmail.com

5 comments :

  1. Thank you so much for published my poem and encourage new generation writers.
    Heartful thanks to pittsburgh bilingual journal editor and co ordinating team.🙏

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  2. Very good poems by Menika Saket ji.

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