लू की लौ, बाढ़ का भराव, और राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान

छह जून को स्वर्गीय डॉ सुधेश का जन्मदिन है तथा अभिमन्यु अनत की पुण्यतिथि भी इसी दिन पड़ती है। दोनों दिवंगतों को सेतु परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि!

माधवराव सप्रे के जन्मदिन यानी 19 जून को अब लघुकथा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। लघुकथा नि:संदेह आजकल की सबसे प्रचलित विधाओं में से एक है और छोटी विधा होने के कारण नये लेखकों में बहुत लोकप्रिय भी है। सभी लघुकथा-प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ!

डॉ सत्यवीर सिंह सहित सेतु के जितने लेखकों व पाठकों का जन्मदिन इस माह था, उन सभी को हार्दिक मंगलकामनाएँ!

इस महीने हज के लिये सऊदी अरब गये तीर्थयात्रियों की एक बड़ी संख्या लू के कारण हताहत हो गयी। पहली आधिकारिक संख्या में कुछ सौ लोगों के मरने की खबर थी लेकिन अधिकांश समाचार स्रोत पाँच सौ मिस्री और कुछ सौ भारतीय उपमहाद्वीपीय सहित मृतकों की संख्या हज़ार, ग्यारह सौ तक दर्शा रहे हैं।

केवल अमेरिका में ही इस बार लगभग डेढ सौ लोग लू का शिकार हुए हैं। मृतकों की लगभग इतनी ही संख्या भारत के बिहार राज्य में होने का अनुमान है। पूरा उत्तर भारत लू की चपेट में रहा है। जो इंसान नल चला सकते हैं टोटियाँ खोल सकते हैं, पानी खरीद सकते हैं, घर में एसी, कूलर या कम से कम बरामदे की छाँव में बैठ सकते हैं, उनका यह हाल हुआ तो ज़रा उन मूक पशु-पक्षियों के बारे में सोचिये जो अपनी प्यास बयान भी नहीं कर सकते, जिनके पास आने, या चिल्ला-चिल्लाकर पानी मांगने पर लोग डंडे मारकर भगा देते हैं। अपने से कमज़ोरों को इंसाफ़ दिलाना ही इंसानियत है। अपना ख्याल रखें, अन्य मनुष्यों के साथ पशु-पक्षियों का भी। गर्मी पड़ने पर निरीह प्राणियों को थोड़ी छाया, दाना, पानी जो भी दे सकें, दीजिये। और यह करके आप उनसे अधिक अपना, अपनी अगामी पीढ़ियों का भला करेंगे। कैसे, अभी बताता हूँ।

गर्मी हर साल पिछले रिकॉर्ड तोड़ रही है। भारत भूमि जो हज़ारों सालों से मानव जीवन के लिये संसार के सर्वाधिक अनुकूल क्षेत्रों में रही है, वहाँ भी पेयजल, शुद्ध वायु, वनस्पति और अनुकूल तापमान निरंतर समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि यदि ऑक्सीजन-प्रदाता वृषों के निरंतर कटाव, नदियों में मिलने वाले नागरी जल-मल और कारखानों के ज़हरीले रसायनों, और तालों झीलों को पाटकर घर, फ़ैक्ट्री, सड़क बनाना तुरंत नहीं रोका गया तो आगामी वर्षों में भारत की जलवायु मनुष्यों के रहने योग्य नहीं रहेगी। इसे बदलना हम सब की, हमारे राजनेताओं की, और सभी दलों की प्राथमिकता होनी चाहिये, मगर दुर्भाग्य से है नहीं। अपने लिये न सही, अपने बच्चों, और उनके बच्चों के लिये जागृति लाइये, आवाज़ उठाइये, और साथ ही अपनी ओर से जितना हो सकता है करते रहिये। बाहर फलदार, छायादार वृक्ष न लगा सकें तो घर में मनी-प्लांट से लेकर बॉनसाई तक जो सम्भव हो लगाइये, लगे रहिये। गर्मी हो तो छाया में रहें, पानी पीते-पिलाते रहें, बाहर निकलें तो छाता, पगड़ी, टोपी, जैसे भी हो तेज़ धूप से बचें। और इसके अतिरिक्त, अच्छा पढ़ें और अच्छा सुनने के साथ-साथ अच्छा कहें। 

गर्मी के कोप का सामना करने के लिये वर्षा होती है। भारत में शुरुआती वर्षा ने ही कहर बरपाना शुरू कर दिया। वर्षा का आगमन होते ही आवासीय क्षेत्रों में जलभराव के साथ-साथ पुलों के धराशायी होने के समाचार आने लगे। दिल्ली हवाई अड्डा तो भारत के ही अनेक हवाई अड्डों की तुलना में पहले ही पिछड़ा हुआ है, वहाँ की छत का गिरना, और उसके कारण एक निर्दोष की जान जाना जितना दु:खद है, इस दुर्घटना को राजनैतिक लाभ के लिये उछालना भी कोई कम शर्मनाक नहीं।
यह अंक प्रकाशित करने से कुछ पहले ही संस्कृति एवं साहित्य के क्षेत्र में वर्ष 2022 तथा 2023 के लिये मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के सम्मानों की घोषणा हो चुकी है जिसमें सेतु परिवार के कुछ सदस्यों की उपस्थिति उल्लेखनीय है। वरिष्ठ साहित्यकार रामदरश मिश्र को 2022 का राष्ट्रीय कबीर सम्मान, डॉ. हंसा दीप को 2022 का राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान, तथा अनुराग शर्मा को 2023 का राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान मिलना आल्हादकारी है।
सम्मानित ख्यातनामों के बीच अपना नाम पाकर गद्गद हूँ। प्रस्तावक मित्रों, तथा चयन समिति के सदस्यों के साथ-साथ आप सबके प्रोत्साहन और सहयोग का आभारी हूँ। धन्यवाद!

चलते-चलते एक और खुशखबरी - 45 लाख 39 हज़ार से अधिक हिट्स के साथ, सेतु ने अब तक 97 मास पूरे कर लिये हैं और यह अंक हमारे नवें वर्ष का प्रवेशांक है। आप सब को बधाई! 

सभी सम्मानितों को बधाई और शुभकामनाओं के साथ सेतु का यह अंक आपकी सेवा में समर्पित है।

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
30 जून 2024 ✍️

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