शिबन कृष्ण रैणा

जन्म 22 अप्रैल, 1942 को श्रीनगर-कश्मीर में

वर्ष 1999 से लेकर 2001 तक भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान,शिमला में फेलो रहे, जहाँ उन्होंने अन्य भारतीय भाषाओं से हिंदी में अनुवाद की समस्याओं पर कार्य किया।

राजस्थान साहित्य अकादमी का पहला ‘अनुवाद पुरस्कार’ प्राप्त करने का श्रेय इनको है। इनकी पुस्तकें ज्ञानपीठ, राजपाल एंड संस, साहित्य अकेडमी, हिन्दी बुक सेंटर, जे०एंड०के० कल्चरल अकादमी, भुवन वाणी ट्रस्ट आदि प्रकाशकों से प्रकाशित हो चुकी हैं। कश्मीरी रामायण “रामावतारचरित” का सानुवाद देवनागरी में लिप्यांतर के लिए बिहार राजभाषा विभाग ने इन्हें ताम्रपत्र से विभूषित किया है।

कश्मीर विश्वविद्यालय से 1962 में हिंदी में एम०ए० प्रथम श्रेणी में प्रथम रहकर तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से यूजीसी की फ़ेलोशिप पर पी-ऍच०डी कर लेने के बाद 1966 में डॉ० रैणा का राजस्थान लोकसेवा आयोग,अजमेर से हिंदी व्याख्याता पद पर चयन हुआ। कालान्तर में हिंदी विभागाध्यक्ष,उप-प्राचार्य/प्राचार्य आदि पदों पर पदोन्नत हुए। इन्होंने एम०ए० अंग्रेजी की उपाधि भी प्राप्त की है। डॉ० रैणा संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार के सीनियर फेलो (हिंदी) रहे हैं। हिंदी के प्रति इनके योगदान को देखकर इन्हें भारत सरकार ने 2015 में विधि और न्याय मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति का गैर-सरकारी सदस्य मनोनीत किया है।

Dr. S. K. Raina
M.A. (Hindi &English) Ph.D.
Member,Hindi Salahkar Samiti,Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Originally from India, currently lives in Ajman (UAE)
Email: skraina123@gmail.com