अर्द्धांगिनी - अनुवाद

गोल्डी और एलिज़ाबेथ के विवाह को लगभग दो वर्ष बीत चुके हैं किन्तु वह आज भी आशंकित है कि उसका पति अपने वैवाहिक संबंध को लेकर गंभीर भी है या नहीं। दोनों लिवरपूल-स्ट्रीट पर स्थित लौएड्स-औफ़-लन्दन में काम करते हैं। गोल्डी की सेक्रेटरी, रीटा, जो लिज़ की सहेली भी है, एलिज़ाबेथ को कई बार चेतावनी दे चुकी है कि गोल्डी एक ऐसा दिल-फेंक आशिक है, जो कभी सुधर नहीं सकता। रीटा के अनुसार, गोल्डी आजकल हाल ही में नियुक्त हुई ऑडिटर लीना अय्यर के साथ इश्क़ फ़रमा रहा है। लिज़ अमूमन रीटा की बात को हँसी में उड़ा देती है क्योंकि रीटा ही नहीं, दफ्तर की अधिकतर महिलाएं एलिज़ाबेथ के भाग्य से रश्क करती हैं और क्यों न करें; उसका शौहर है ही इतना हैंडसम। 

एलिज़ाबेथ के अधिकतर सहकर्मियों के वैवाहिक संबंध ठीक नहीं चल रहे; एक न एक क़िस्सा लगभग हर रोज़ सुनने में आता है - खूसट मैनेजर क्रिस्टोफर ने अपनी पच्चीस वर्षीय निजी सचिव लौरेन के संग ब्याह रचा लिया; जीन और पीटर का तलाक हो गया; जूडी ने बच्चों की कस्टडी के लिए जैक पर मुक़दमा ठोक दिया, अथवा अली की, जिसकी पहली बीवी पाकिस्तान में है, दूसरी और तीसरी बीवियों ने पुलिस में उसके ख़िलाफ़ अलग अलग रपट दर्ज की है - आदि आदि। एलिज़ाबेथ नहीं चाहती कि उसके और गोल्डी के निजी संबंध भी दफ्तर में इसी तरह उछाले जाएं।

'लिज़, तुम मेरी बात पर विश्वास क्यों नहीं करती? तुम्हारा गोल्डी जौन डुआन से कम नहीं; सुन्दर लड़की देखकर उसके मुंह में झट पानी भर आता है,' ऐसी ही बातें रीटा प्रायः एलिज़ाबेथ से कहती रहती है। ना चाहते हुए भी पूरी इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि रीटा पूरी तरह ग़लत है। इश्क़ का इज़हार गोल्डी अपने सामने पड़ने वाली हर लड़की के साथ करता है, ख़ासतौर पर ऐसी लड़की से, जिसकी छाती सुडौल हो। रीटा बता रही थी कि लीना वंडर-ब्रा पहनती है ताकि उसका वक्षस्थल ज़्यादा बड़ा दिखाई दे। लिज़ ने देखा है कि कैसे गोल्डी और उसके सहकर्मी युवतियों की सुडौल टांगों और अध-ढकी छातियों को देख-देख कर प्रायः अपना दिल बहलाते हैं और युवतियां भी कुछ कम नहीं हैं, वे हैंडसम पुरुषों को देख कर न केवल आहें भरती हैं बल्कि किसी बहाने से उनसे टकराने का प्रयत्न भी करती हैं। एलिज़ाबेथ ऐसी नहीं है। उसे यह सब इतना बेहूदा लगता है कि चाहते हुए भी वह इस बारे में गोल्डी से भी कुछ नहीं कह पाती। उसे यह भय भी है कि रोज़-रोज़ की चिकचिक से कहीं वह गोल्डी को खो न दे। वैसे भी, झिकझिक करना उसके स्वभाव में नहीं है। फिर, इस ज़माने में अच्छे लड़के कहाँ मिलते हैं? क्या हुआ जो गोल्डी ख़ूबसूरत लड़कियों के आगे बेबस हो जाता है, उसका इरादा उन्हें कोई नुकसान पहुंचाने का या बरगलाने का नहीं होता और नहीं एलिज़ाबेथ को दुःख पहुंचाने का। 

'लिज़, क्या तुम इतने से ही संतुष्ट हो कि वह रोज़ शाम को तुम्हारे पास लौट आता है और तुम्हें हर जगह अपने साथ चलने का आग्रह करता है?' इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य, एलिज़ाबेथ की सबसे पुरानी सहेली है रीटा, जो उसकी ख़ैर-ख़्वाह बन बैठी है और गोल्डी की हर हरक़त के बारे में उसे जानकारी देना अपना परम कर्तव्य मानती है। 

'लिज़, तुम्हें मेरी बात पर यक़ीन नहीं होगा लेकिन कल शाम मैंने अपनी आँखों से गोल्डी और लीना को वैस्टफ़ील्ड में बाँहों में बाँहें डाले चहलकदमी करते हुए देखा,' सुबह सुबह रीटा ने अपनी गोल-गोल आँखें नचाते हुए एलिज़ाबेथ के कान में फुसफुसा कर कहा था। चुनांचे, वह जानती है कि 'बाँहों में बाँहें डालकर चहलक़दमी करना' रीटा की मनगढ़ंत कहानी है लेकिन, उसका दिल फिर भी कसक उठा। आख़िर, गोल्डी वैस्टफ़ील्ड में लीना के साथ क्या कर रहा था? क्या हमारी शादीशुदा ज़िंदगी सचमुच ख़त्म होने जा रही है? यह बात साफ़ है कि हमारे रोमांस के दिन शायद अब लद गए हैं। यदि गोल्डी उसे छोड़, लीना को अपना लेगा तब वह क्या करेगी? बावज़ूद इसके कि वह लगातार उसे पीड़ा पहुंचाता रहा है, वह आज भी उसी से ही प्यार करती है। वह सीधे सीधे लीना से पूछना चाहती थी पर यह भी तो हो सकता है कि रीटा यह सब उसे भड़काने के लिए कर रही हो! उसने यह अफ़वाह सुन रखी थी कि रीटा ख़ुद गोल्डी के प्रति आसक्त रह चुकी है। 

'मीट माई बैटर-हाफ़,' गोल्डी ने एलिज़ाबेथ का परिचय अपने नए सहकर्मी, हैनरी कॉक्स से करवाते हुए कहा तो हाथ मिलाते हुए हैनरी ने उसका का गाल चूम लिया। गोल्डी के इस संबोधन पर उनकी मित्र-मंडली एक दूसरे को देखते हुए मुस्कराने लगी और एलिज़ाबेथ शर्म से पानी-पानी हो उठी। उनकी शादी को अभी कुछ ही दिन हुए थे कि एलिज़ाबेथ ने गोल्डी से अनुरोध किया कि वह उसका परिचय सीधे-सादे तरीके से देना चाहिए तो वह भड़क उठा था, 'यू आर माई वाइफ़, तुम्हें अर्द्धांगिनी कहने में मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, शायद तुम चाहती हो कि लोग तुम्हें अब भी कुंवारा समझें, इज़ दैट इट?' एलिज़ाबेथ ठीक से उसे समझा नहीं पाती कि उसके 'मीट माई बैटर-हाफ़' कहने का अंदाज़ गलत है, ऐसा लगता है कि जैसे वह दोस्तों को अपनी कोई ट्रॉफी दिखा रहा हो।
एलिज़ाबेथ को यह सोचकर प्रायः अचंभा होता है कि क्या गोल्डी के बारे में उड़ रही सारी अफवाहें सही हैं। यह कैसे हो सकता है कि जो शौहर अपनी बीवी का परिचय 'माई बैटर-हाफ़ ' के रूप में कराता है, वह अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को लेकर गंभीर न हो? कहीं ऐसा तो नहीं है कि गोल्डी उसके विश्वास और भोलेपन का लाभ उठा रहा है? 

शादी की पहली सालगिरह तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था हालांकि शुरू शुरू में एलिज़ाबेथ की सहेलियों और उसके सहकर्मियों ने गोल्डी के छिछोरेपन की ओर उसका ध्यान खींचा था किन्तु उसने उनकी बात को हँसी में उड़ा दिया था क्योंकि वह सांगोपांग गोल्डी के प्रेम में आसक्त थी। अगर लड़कियाँ उसका हर जगह पीछा करती हैं तो क्या हुआ; आख़िर, वह है तो एलिज़ाबेथ का ही न? क्या हुआ अगर वह 'शुक्रिया', 'ख़ेद है' और 'माफ़ कीजिएगा' जैसे लफ़्ज़ो का प्रयोग नहीं करता? इंडियंस औपचारिकताओं में विश्वास नहीं करते। क्या हुआ जो वह सूप को सुड़क-सुड़क कर पीता है; वह मेरे बनाए भोजन की तारीफ़ तो करता है, वह किसी बात को लेकर कभी गंभीर नहीं है तो क्या हुआ, वह सरल स्वभाव का आदमी है। एलिज़ाबेथ को गोल्डी में कोई कमी नहीं नज़र आती थी; उसका लड़कपन एलिज़ाबेथ के मन में अपराध-बोध पैदा कर देता था कि उसने गोल्डी के ख़िलाफ़ अपनी सहेलियों और ख़ासकर बकबक-मशीन - रीटा की बातें क्यों सुनी।

दरअसल, उनके संबंधों में कड़वाहट पहली बार गोल्डी के पैतृक नगर बड़ौदा से लौटने के बाद से शुरू हुई। वहाँ भी हर कोई गोल्डी की इश्क़बाज़ी के बारे में बातें कर रहा था। एलिज़ाबेथ को यह अंदाज़ था की भारत में ढेर-सारे पूर्वाग्रह और रूढ़ियाँ रही हैं जिन्हें अधिकतर पश्चिमीवासी किपलिंग और टिनटिन के साहित्य में पढ़ते हैं और 'स्लम डॉग मिलैनियर' आदि जैसे शो में देखते भी हैं। एलिज़ाबेथ भी जब गोल्डी से प्रेम करने लगी तो उसे भारत तथा भारतीयों के बारे में हर बात सुहानी लगने लगी थी।  

गोल्डी की माँ संतोष बचपन में उसे गोल्डी कहकर पुकारा करती थी और वह चाहता था कि इंग्लैंड में हर व्यक्ति उसे इसी नाम से बुलाए। गोल्डी के माँ-बाप उसके विवाह के सिलसिले में इंग्लैंड आए थे तथा उनके साथ एक महीने से ज़्यादा समय तक ठहरे थे; अचानक संतोष उसे उसके वास्तविक नाम - गोपाल - कहकर बुलाने लगी थी।  

'अब हमारा बेटा सचमुच बालिग हो गया है,' संतोष ने घोषणा की पर वह उसके साथ बच्चे जैसा ही व्यवहार करती रही। 'मेरा गोपाल आज ब्रेकफ़ास्ट में क्या लेगा?' और बिना उसका जवाब सुने, वह सभी के लिए आलू, मूली या गोभी के परांठे बनाने में जुट जाती। 

'लिज़ बेटा, तुम्हें गोल्डी की पसंद की सारी चीज़ें बनानी सीख लेनी चाहिए। उसे पिज़्ज़ा और पास्ता पसंद नहीं है। यू नो न, हज़्बेंड का दिल तुम उसकी फेवरेट डिशेस बना कर जीत सकती हो।' 
'लिज़ की पसंद और नापसंद के बारे में भी तो पूछो,' वहाँ मौज़ूद गोपाल के पापा बोले। 
'बेचारी सारी ज़िंदगी पिज़्ज़ा और पास्ता ही तो खाती रही है। अब उसे हमारे असली इन्डियन खाने का टेस्ट मालूम होना चाहिए? गोल्डी बता रहा था कि चिकन- टिक्का अब इंग्लैंड की बेस्ट डिश है और क्यों न हो, हमारा फ़ूड है ही बढ़िया।'

लंदन से बड़ौदा लौटने से पहले संतोष को तसल्ली थी कि उसने एलिज़ाबेथ को सभी प्रकार की कर्रीज़, चपाती, परांठा, चटपटी चीजें और मिठाइयाँ बनानी सिखा दी थीं। हालांकि संतोष का बस चलता तो वह रोज़ उनके लंच के लिए भी उन्हें परांठे बाँध देती, शुक्र था कि गोल्डी ने स्वयं ही उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था। एलिज़ाबेथ अपनी सास का निरादर कभी नहीं कर सकी, हर रोज़ तली हुए चीज़ें खा-खाकर जब वह ऊब जाती तो ऑफ़िस में रोस्ट-लंच या सैंडविच खाकर तसल्ली कर लेती। 

उनके लंदन-प्रवास के दौरान, जब जब एलिज़ाबेथ को ऑफ़िस से घर पहुँचने में देर हुई, तब-तब संतोष ने उसे आगाह किया, 'लिज़ बेटा, टाइम से घर आ जाया करो; मैरिज इस बात की कोई गारंटी नहीं कि लड़का कहीं और मुँह नहीं मारेगा और तुम्हें तो पता ही है कि हमारा गोपाल किशन कन्हइया है,' जब लिज़ ने 'कृषन कन्हइया' का मतलब पूछा तो संतोष ने विस्तार में बताया।
'गोपाल, हमारे गॉड कृष्ण का दूसरा नाम है; वो तुम्हारे डॉन जोआन जैसे थे; और उनकी हज़ारों गर्ल-फ्रेंड्स थीं, राधा भी उनमें से एक थी।'

बहरहाल, कोई एलिज़ाबेथ की माँ से पूछे तो वह भी उसके बारे में यही बताएगी कि उसके लिए ऐसे लड़कों की कोई कमी नहीं थी जो उसके लिए अपने स्थायी प्यार का इज़हार किया करते थे। एक समय था जब गोल्डी भी उसके पीछे पागल हुआ फिरता; वे विवाह-सूत्र में क्या बंधे कि वह अचानक बदल गया। 
'चाइल्डहुड से ही वह गर्ल्स का दुलारा था,' संतोष बड़े फ़ख्र के साथ सबको बताया करती थी, 'लंदन आने के पहले भी उसका हमारे नेबर की लड़की के साथ सीरियस अफ़्फ़ैर चल रहा था। उस लड़की का नाम भी राधा था, यू नो, कृष्नाज़ गर्ल-फ्रेंड! उसके माँ-बाप भी गोपाल को बहुत पसंद करते थे। बड़ौदा में सब कहते थे कि ये दोनों एक-दूजे के लिए बने हैं,' 

'जब उसने हमें तुम्हारे बारे में बताया तो हमने पहले तो उसका बिलीव ही नहीं किया। हमने सोचा कि प्यार का यह भूत जल्दी ही उसके सिर से उतर जाएगा पर जब हमने तुम दोनों की इंगेजमेंट की फोटोज़ देखीं तो हमें राधा के पेरेंट्स को इन्फॉर्म करना ही पड़ा। उन बेचारों पर तो जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा; पूरे बड़ौदा में शोर मच गया कि आख़िर इतनी लंबी और गहरी दोस्ती के बाद गोपाल राधा को कैसे छोड़ सकता है?' संतोष कि क़िस्से सुन-सुनकर एलिज़ाबेथ को भी राधा से सहानुभूति हो चली थी।
'यू नो, राधा की दादी कहती थी कि हिस्ट्री इज़ रिपीटिंग इटसेल्फ, गोकुल छोड़कर मथुरा में रहने के लिए जाते समय कृष्ण ने भी राधा को छोड़ दिया था। राधा का घर से बाहर निकलना मुहाल हो गया। यू नो, फ़ैमिली पर इतना बड़ा कलंक! अब राधा से कौन शादी करेगा?'
'क्यों, कोई लड़का राधा से शादी क्यों नहीं करेगा?' हैरान होते हुए एलिज़ाबेथ ने पूछा।
'इंडिया में, शादी से पहले लड़के-लड़कियों को एक साथ घूमने की इज़ाज़त नहीं है न।' संतोष ने एलिज़ाबेथ के कान में फुसफुसा कर कहा, 'डर लगा रहता है कि कहीं लड़की प्रेग्नेंट न हो जाए! सबने राधा के पेरेंट्स को ही ब्लेम किया कि उन्हें अपनी लड़की को इतनी फ़्रीडम नहीं देनी चाहिए थी।'
'यू नो, लिज़, बड़ौदा की लेडीज़ तुम्हारे बारे में क्या सोचती हैं?' संतोष ने अपनी नज़रें एलिज़ाबेथ के चेहरे पर टिका दीं।
'नहीं, मैं यह नहीं जानना चाहती कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं,' एलिज़ाबेथ ने मन ही मन सोचा पर संतोष ने कोई ध्यान दिए बिना अपनी बात को जारी रखा।
'यही कि तुमने हमारे गोपाल पर सम्मोहिनी डाल रखी है, यू, नो, बिविचड। इज़ इट ट्रू कि अंग्रेज़ लड़कियाँ इंडियन लड़कों को फंसा लेती हैं?' उसने किंकर्तव्यविमूढ़ एलिज़ाबेथ से सवाल किया, 'गोरे-चिट्टे लड़कों के बजाय तुम हमारे साँवले बॉयज़ को ज़्यादा पसंद करती हो?' 
'हाउ फ़न्नी, मेरी मम्मी भी यही कहती है कि इंडियन बॉयज़ गोरियों को फांस लेते हैं,'  पास ही बैठा गोल्डी उनकी बातचीत सुन रहा था पर ऐसे ख़ामोश था जैसेकि उसका इन किस्सों से कोई सरोकार ही न हो। 
तीन महीने बाद एलिज़ाबेथ ने चैन की सांस ली; उसके सास-ससुर को बड़ौदा लौटना पड़ा क्योंकि वहाँ उनके बहुत से काम रुके पड़े थे। एलिज़ाबेथ को अपना घर अपने तरीक़े से सजाने-धजाने का मौक़ा मिला था किन्तु गोल्डी हर चीज़ को उसी रूप में देखना चाहता था, जिस रूप में उसकी माँ रख कर गई थी। वह एलिज़ाबेथ को बात बात पर टोकता और जब उसकी नहीं चलती तो वह मुंह सुजा कर बैठ जाता; या उसके पकाए खाने में खामियां ढूंढता अथवा उसके पहनावे की नुक़्ताचीनी करता।
सालाना छुट्टियों में गोल्डी ने बड़ौदा जाने का प्रस्ताव रखा, एलिज़ाबेथ सहर्ष मान गयी, यह उसकी पहली भारत-यात्रा थी और वह काफ़ी उत्साहित थी। बजाए इसके किस वह एलिज़ाबेथ को शहर घुमाता, सर्वप्रथम गोल्डी ने उसके सम्मुख राधा तथा उसके परिवार से मिलने का प्रस्ताव रखा। ज़ाहिर है, जहाँ तक राधा और उसके परिवार का संबंध था, काफी कुछ दाँव पर लगा हुआ था।
'गोपाल बेटा, तुम उनसे क्यों मिलना चाहते हो? राधा के पेरेंट्स अभी भी तुमसे बेहद ख़फ़ा हैं,' संतोष भी उतनी ही परेशान थी।
'मम्मी, अगर हम उनसे मिलने नहीं गए तो उन्हें बहुत बुरा लगेगा।  राधा ने मुझे कई बार फ़ोन किया है कि वह लिज़ से मिलना चाहती है।'
'देख लो, पर...' संतोष की त्योरी चढ़ी को गोल्डी ने नज़रअंदाज़ कर दिया .
'मम्मी, फॉर गोड्स सेक, राधा और मैं बचपन के फ्रेंड्स हैं।' गोल्डी ने संतोष का इतना ज़बरदस्त प्रतिवाद किया तो एलिज़ाबेथ को अपना ख़ामोश रहना ही बेहतर लगा, वैसे भी, गोल्डी ने अपनी 'बैटर हाफ़' की राय लेने की ज़हमत भी नहीं उठाई पर एलिज़ाबेथ हैरान थी कि इतना कुछ हो जाने के बावजूद राधा को गोल्डी से मिलने में क्या दिलचस्पी हो सकती है, विशेषतः जब उसने अविवाहित रहने की क़सम खा रखी है?
संतोष चाहती थी कि एलिज़ाबेथ कीमती भारतीय पोशाक और गहने पहनकर अच्छे ढंग से सज-धजकर जाए ताकि राधा और उसके घर वालों को अहसास हो कि आख़िर गोल्डी ने राधा के बजाय एलिज़ाबेथ को ही क्यों चुना। 

'मीट माई बैटर हाफ़,' गोल्डी ने कुछ हेकड़ी से एलिज़ाबेथ का परिचय राधा और उसके घर वालों से करवाया। जहां एलिज़ाबेथ स्पष्ट रूप से सोच रही थी कि उस जैसी स्मार्ट और शिक्षित लड़की राधा पर कहीं भारी पड़ेगी; वहीं राधा की एक पैनी नज़र ने एलिज़ाबेथ के नखशिख का ख़ूब जायज़ा लिया। जैसी एलिज़ाबेथ ने कल्पना की थी, राधा उसके बिलकुल विपरीत निकली, आकर्षक, चुस्त, मुखरित; उसमें एक कशिश थी। अच्छा ही हुआ कि संतोष ने एलिज़ाबेथ को भारतीय परिधान में सजा धजा कर भेजा था क्योंकि राधा ने एक पश्चिमी डिज़ाइनर पोशाक पहन रखी थी। दफ्तर के प्रोफेशनल-अटायर के अतिरिक्त, एलिज़ाबेथ के ऐसी कोई ड्रेस नहीं थी।
उस रंग-बिरंगे हवेलीनुमा घर में एलिज़ाबेथ ने स्वयं को असुविधाजनक एवं कुछ-कुछ असुरक्षित सा महसूस किया। राधा गोल्डी से ऐसे बात कर रही थी जैसे कि कुछ हुआ ही न हो। एलिज़ाबेथ को एकदम नज़रअंदाज़ करते हुए, वे लगातार अपने कॉलेज के दिनों और दोस्तों के बारे में बात कर रहे थे। उसे लगा कि जैसे उन दोनों में या तो बड़ा प्रगाढ़ संबंध है या फिर उसे छोटा दिखाने अथवा उसका अपमान करने के इरादे से राधा ऐसा प्रदर्शन कर रही है। राधा की बातों से यह भी स्पष्ट था कि उसे गोल्डी और एलिज़ाबेथ की निजी और घरेलु ज़िंदगी के विषय में अच्छी जानकारी थी। क्या दोनों के बीच अभी भी कुछ चल रहा है? 

अपरिचितों की तरह बैठी हुई एलिज़ाबेथ उन सबकी बातें सुन रही थी। वे उसे बड़ी अजीब नज़रों से घूर रहे थे; जैसे गोल्डी से विवाह करके उसने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो। अंततः परेशान होकर वह एक पत्रिका उठा कर बाहर दालान में जाकर झूले पर तब तक बैठी रही, जब तक कि उसे चाय के लिए अंदर नहीं बुलाया गया। चाय का आयोजन भव्य था। एलिज़ाबेथ ने इतने प्रकार के व्यंजन लंदन के नीसडन-मंदिर में देखे थे जन्माष्टमी मनाई जा रही थी। संतोष ने उसे और गोल्डी को सख्त हिदायत दी थी कि यदि वे घर में पूजा नहीं कर सकते तो उन्हें मंदिर ज़रूर जाना होगा।

'तो आप लोग 'डॉन क्विक्जोट' का जन्मदिन मना रहे हैं...' एलिज़ाबेथ ने व्यंग्यात्मक लहज़े में सवाल किया। गोल्डी ने उसे वहीं रोक दिया और कहा किस यह उपहास का विषय नहीं है, उसे 'कृष्ण' को हमेशा 'कृशनजी' कहकर संबोधित करना चाहिए। उसे अचानक याद आया कि प्रार्थना करते समय, संतोष ईसा मसीह को 'ईसा मसीह जी' कहकर संबोधित किया करती है।
'कृष्ण जी देवता के रूप में प्रेमी हैं पर वह एक महानायक भी हैं। महाभारत के रणक्षेत्र में जब अर्जुन ने अपने नाते-रिश्तेदारों से युद्ध करने के बजाय अपने राज्य का परित्याग करना बेहतर समझा तब कृष्ण जी ने उन्हें उपदेश दिया था कि युद्ध करना उनका कर्तव्य है।' 
'आई नो, प्रेम और युद्ध में सब जायज़ है।' 
'तुम्हें गीता पढ़नी चाहिए, जिसमें उनके व्याख्यान संकलित हैं।' कृष्ण जी के बारे में बात करते हुए एलिज़ाबेथ ने गोल्डी को पहली बार गंभीर पाया था। 
गोल्डी के इस निर्देश के बावज़ूद कि एलिज़ाबेथ चाय में चीनी नहीं लेती, राधा ने उसकी चाय में ढेर सारी चीनी डाल दी। पहले घूँट में ही एलिज़ाबेथ को लगा कि जैसे उसे उल्टी हो जाएगी। खाने में भी उसे कुछ अच्छा नहीं लगा पर लोग बिना उससे पूछे उसकी प्लेट में किस्म-किस्म की चीज़ें रखे चले जा रहे थे। 
विदा करते समय, राधा की दादी ने गोल्डी को कुरता-पाजामा और एलिज़ाबेथ को एक साड़ी दी, जो संतोष ने गुस्से में सफ़ाई करने वाली बाई को यह कह कर दे दी कि इतनी घटिया साड़ी उसकी बहु नहीं पहन सकती जबकि गोल्डी के कपड़े सबको अच्छे लगे।

शाम को एलिज़ाबेथ की तबियत कुछ और नासाज़ हो गयी; उसे उबकाइयां आने लगीं। संतोष ने कहा कि लिज़ को राधा के घर वालों ने निश्चित रूप से बुरी नज़र लगा दी थी। अपने हाथ में साबुत लाल मिर्च और नमक लेकर संतोष ने उसके चेहरे के आसपास घुमाया और फिर मिर्च और नमक को अखबार में लपेट कर गोल्डी से कहा कि वह बाहर जाकर उसमें आग लगा दे, 'अब कोई तुम्हारा बाल बाँका नहीं कर सकता।' 
गोल्डी बाहर से खाँसता और छींकता अंदर लौटा। उसकी आँखें बह रही थीं और गले में खराश थी। माँ को भला बुरी सुनाते हुए वह गुसलखाने में जा घुसा।  

'लिज़ बेटे, तुम्हें जल्दी ही माँ बन जाना चाहिए,' संतोष ने एलिज़ाबेथ को गंभीरता से सलाह दी, 'इससे गोपाल का मन राधा से हट जाएगा।' संतोष ने कहा। अपनी सास की ऐसी झिकझिकबाजी के बावज़ूद, एलिज़ाबेथ को वह अच्छी लगती थी, वह जो भी कहती थी, उसके भले के लिए ही कहती थी। 
'मम्मी, क्या आपका यह सुझाव सही है? इधर मैं बच्चे की नैपीज़ बदलूंगी, उधर गोल्डी लड़कियों के साथ इश्क फ़रमाएगा,' एलिज़ाबेथ हँस पड़ी।

जब तक वे बड़ौदा में थे, हर जगह राधा उनके साथ जाती। एलिज़ाबेथ गुजरात की चित्रकला और वास्तुकला का आन्नद लेना चाहती थी पर उसका ध्यान लगातार गोल्डी और राधा पर रहता, जिन्हें एलिज़ाबेथ या आसपास के माहौल में तनिक भी दिलचस्पी नहीं थी। एलिज़ाबेथ चाहती थी कि उसे अकेला छोड़ दिया जाय परंतु गोल्डी को हर जगह साथ चलना था और वह भी राधा को संग लेकर। राधा के लिए घर से निकलने का इससे अच्छा बहाना और क्या हो सकता था? एलिज़ाबेथ की छुटियाँ बर्बाद करना ही शायद उसका मकसद था।

लंदन लौटकर भी एलिज़ाबेथ को चैन नहीं था क्योंकि गोल्डी चाहता था कि एलिज़ाबेथ उसके सहकर्मियों और दोस्तों तथा ख़ासतौर से लीना से मिलने-जुलने वक्त हमेशा उसके साथ रहे। एलिज़ाबेथ अपने काम में इतनी मशग़ूल रहती थी कि उसे पब में पहुंचने में हमेशा देरी हो जाती थी जहाँ वे शाम को मिला करते थे। लिज़ कोई ऐसी नई दोस्ती की शुरुआत करना नहीं चाहती जिसे वह निभा न सके। लीना जब तब उसे पिकनिक या फिल्म के लिए दावत देती रहती है और एलिज़ाबेथ के इन्कार पर गोल्डी ख़फ़ा हो जाता है के जैसे एलिज़ाबेथ की ज़िंदगी को गोल्डी और उसके दोस्तों के इर्दगिर्द ही घूमना चाहिए। घर के काम-काज के समय भी वह केवल उसकी लल्लो-चप्पो से काम चलाया करता है। न तो वह सफाई कर सकता है, न ही कपड़े-लत्तों की धुलाई।  इन सब बातों के अलावा वह महाकंजूस भी है, क्योंकि घर के खर्चे के अलावा, मॉर्गेज और बिल्स भी वही देती है, पैसे मांगना उसकी फ़ितरत में नहीं है।

'जान, यू आर वन इन ए मिलियन पर तुम मेरे दोस्तों के साथ बाशऊर पेश क्यों नहीं आती?' गोल्डी ने एलिज़ाबेथ से फिर शिकायत की।
'डार्लिंग, मेरे पास तो अपनी ही फ्रेंड्स के लिए फ़ुर्सत नहीं है; मैं तुम्हारे दोस्तों के साथ दोस्ताना निभाने के लिए कहाँ से समय लाऊँ?' एलिज़ाबेथ तपाक से बोली; वह उसकी मान-मनौव्वल से ऊब चुकी थी।
'तुम कितनी अनसोशल हो!'
'सौरी डार्लिंग, इस समय मेरे पास ढेरों काम है।'
'मैं भी तुम्हारी ही कंपनी का मुलाज़िम हूँ; मुझे पता है कि तुम कितनी व्यस्त हो, डार्लिंग!'
'पर डार्लिंग, हमारे काम पूरी तरह से अलग-अलग हैं,' कहते ही एलिज़ाबेथ को खेद हुआ, उसे काम का ज़िक्र नहीं करना चाहिए था। उसे हाल ही में एक बड़ा प्रमोशन मिला था और गोल्डी तब से कलप रहा था।
'मैं यह कैसे भूल सकता हूँ?' गोल्डी ने तेवर में आते हुए उत्तर दिया। 
बजाए एलिज़ाबेथ को बधाई देता, गोल्डी कहता फिर रहा था कि यह प्रमोशन लिज़ को एक अंग्रेज़ होने के नाते दिया गया था। उसके बॉस नस्लवादी थे; वे कैसे किसी भारतीय को अपना बॉस बना सकते थे? पर सच्चाई यह थी कि एलिज़ाबेथ ने अपनी सभी बीमांकिक परीक्षाएं पास कर ली थीं जबकि गोल्डी को अभी तीन और मापदंडों पर खरा उतरना था। 

एलिज़ाबेथ किसी अन्य कंपनी में नौकरी पाने की कोशिश कर रही थी ताकि उसे यहाँ रहकर गोल्डी और उसकी महिला प्रशंसकों की बकबकबाज़ी न सुननी पड़े। गोल्डी का व्यक्तित्व यहाँ हर शख़्स को आकर्षित करता है जबकि उसे अहसास होने लगा है कि उसके ऊपरी आकर्षण के पीछे कोई ठोस शख़्सियत नहीं है। जब वह यहाँ नवागंतुक था, एलिज़ाबेथ ने ही उसे आर्थिक दुनिया के तौर-तरीकों के बारे में बताया था - सादी कमीज़ों के स्थान पर डबल-कफ़-शर्ट्स, किस रंग और डिजाईन के सूट्स, किस सूट के साथ कौन सी टाई और कफ़लिंक्स इत्यादि। अन्य बहुत से भारतीयों की तरह वह भी मॉस-ब्रदर्स के सूट खरीद लाया था लेकिन वह लंदन के लॉयडस में कार्यरत था, उसे वहाँ के चलन का पालन करना था - जो कपड़े सी.ई.ओ. पहनते हैं, वो उसके जूनियर नहीं पहन सकते, जो पोशाक ऑडिटरस पहनते हैं, वो बीमांकिक नहीं पहन सकते और जो बीमांकिक पहनते हैं, प्रशिक्षु नहीं पहन सकते - इत्यादि। एलिज़ाबेथ उसे कमीज़ दिलाने के लिए टी.एम.ल्युइन और सूट खरीदने के लिए रोडरिक-चार्ल्ज़ ले जाती; और कभी कभी उसके बिल्स भी भर दे देती। 

शादी की पहली सालगिरह पर एलिज़ाबेथ ने गोल्डी को सिटिज़न-घड़ी भेंट की किन्तु उसने एक बार भी उस कीमती गिफ़्ट की तारीफ़ नहीं की; न ही अपने किसी दोस्त और सहकर्मी से उसकी चर्चा की। जबकि एलिज़ाबेथ को गोल्डी ने एक कंबल भेंट किया था, जो वह वेम्बली की सन्डे-मार्केट से खरीद कर लाया था, वो भी एक पॉलिथीन बैग में। फिर भी एलिज़ाबेथ खुश थी और सबको यही बताया करती थी कि गोल्डी उसका कितना खयाल रखता है। लेकिन, ये बातें इतनी अहम नहीं हैं कि इनका ज़िक्र किया जा सके। एलिज़ाबेथ इन सब बातों को दिल में छुपाकर रखती है और सोचती है कि उसकी अपनी ही भीरुता के कारण गोल्डी उसकी भावनाओं की क़द्र नहीं करता। 

विवाह के पश्चात, उन दोनों ने ही एक ऐसी दुनिया में प्रवेश किया जिससे वे दोनों ही अपरिचित थे. 
गोल्डी के भारतीय दोस्त आमतौर पर एलिज़ाबेथ और गोल्डी की नई लाइफ़ स्टाइल का 'गोरा-बस्ती' कह कर मजाक उड़ाते थे। उधर, एलिज़ाबेथ ने भी जब  गोल्डी के दोस्तों को बहुत करीब से देखा तो उसके मन पर कोई अच्छा असर नहीं पड़ा। बड़ी सूझ-बूझ और कोशिश के बाद वह अपने ससुराल वालों के साथअच्छी तरह घुल-मिल गयी थी लेकिन गोल्डी ने उसके परिवार के साथ आत्मीय संबंध बनाने के लिए थोड़ी सी भी जद्दोजहद नहीं की। परिणामस्वरूप, एलिज़ाबेथ ने स्वयं ही उनसे बिल्कुल मिलना-जुलना बंद कर दिया क्योंकि जब भी वह गोल्डी से पीहर चलने को कहती, एक बखेड़ा खड़ा हो जाता।

एक दिन रीटा ने एलिज़ाबेथ को बताया कि गोल्डी भारत में किसी लड़की से रोज़ बातें करता है और अब उसने रीटा से उस लड़की को इंग्लैंड में बसाने के लिए मदद भी माँगी है। एलिज़ाबेथ का दिल डूबने लगा; गोल्डी ने उसे यह बात कभी भी नहीं बताई। डिनर के समय, एलिज़ाबेथ ने इस बात की चर्चा हल्के से की।

'डार्लिंग, इसमें बताने वाली क्या बात है? तुम तो जानती ही हो; राधा मेरे बचपन की दोस्त है, वह अपने घर वालों से बेहद नाखुश है। उसने यहां बसने के लिए मेरी मदद माँगी है।' गोल्डी ने बताया 

एलिज़ाबेथ हैरान थी की गोल्डी को दफ्तर में निजी कामों के लिए समय कहाँ से मिल जाता है? उसे अपने मॉम-डैड से हफ़्तों-हफ़्तों बात करने की फ़ुर्सत नहीं मिल पाती! गोल्डी है कि भारत से लोगों को बुलाने और इस देश में उन्हें बसाने के बंदोबस्त में लगा हुआ है। तभी तो वह ऑफ़िस का काम भली-भाँति न कर पाने के कारण बदनाम है और ऐसी स्थिति में उसे प्रमोशन भी चाहिए। तिस पर, क्या रीटा इमीग्रेशन-ऑफिसर है जो राधा को वीज़ा दिला सकती है? 

'तुम तो मुझे कुछ बताना ही नहीं चाहते, ठीक वैसे ही जैसे तुम दोस्तों को मुझे बताए बग़ैर डिनर पर आमंत्रित कर लेते हो,' 

'ओह, अच्छा किया, डार्लिंग, जो तुमने मुझे याद दिला दिया, डिकी और उसकी नई पत्नी सारा इस शनिवार को डिनर पर आ रहे हैं,' गोल्डी ने वार्तालाप को एक नया आयाम देने की कोशिश की।
'क्या? तुम यह कैसे भूल सकते हो, डार्लिंग, कि पापा ने इस शनिवार को हमें थियेटर और डिनर के लिए निमंत्रित किया है।' 
'लिज़ मेरी जान, हम उनसे मिलने अगले हफ़्ते भी तो  जा सकते हैं,' गोल्डी को फ़िक्र हुई कि मेहमानों के लिए खाना कौन बनाएगा।
'लेकिन, अगले तुम्हारे बॉस और उसकी बहन आ रहे है। यही वज़ह है कि मैंने पापा से कहा कि वह इस शनिवार के लिए थियेटर के टिकट बुक करा लें। हम उनसे महीनों से नहीं मिले हैं।'
'भगवान के वास्ते, लिज़, तुमने अपनी सारी ज़िंदगी उनके साथ गुज़ारी है...' गोल्डी अपना आपा खोने लगा। 
'डार्लिंग, मुझे अफ़सोस है; पापा ने बहुत पहले ही टिकट बुक करा रखे हैं। हालांकि तुम्हारा मेरे साथ न चलना अशिष्टतापूर्ण होगा पर मैं अकेले चली जाऊंगी, केवल सौ पाउंड्स ही बर्बाद होंगे। तुम अपने दोस्तों को डिनर पर बाहर ले जा सकते हो।' एलिज़ाबेथ जानती है कि गोल्डी अपना गुज़र-बसर खुद कर ही नहीं सकता।
'मैंने उन्हें डिनर के लिए घर पर बुलाया है, न कि किसी रेस्तरॉ में।'
'डॉर्लिंग, किसी को इनवाइट करने से पहले डायरी तो देख लेते, मुझे अफ़सोस है कि मैं पापा-मामी को लास्ट मिनट पर मना नहीं कर सकती।' एलिज़ाबेथ को ख़ुद पर आश्चर्य हुआ कि पहली बार उसने गोल्डी का सामना करने की हिम्मत की।
'ठीक है, तुम अपने मम्मी-पापा के साथ मौज करो, मैं कुछ और बंदोबस्त कर लूँगा,' गोल्डी ने 'मम्मी-पापा' शब्दों पर ज़ोर देते हुए कहा। उसे अब भी विश्वास था की शाम तक एलिज़ाबेथ मान जाएगी।
एलिज़ाबेथ को झक मार कर अकेले ही जाना पड़ा। उन्हें गोल्डी का टिकट बेचना पड़ा।
'लिज़्ज़ी डार्लिंग, क्या गोल्डी हमारा साथ पसंद नहीं करता?'  मम्मी ने पहले भी कई बार बेटी से यह सवाल पूछा था।
'मॉम, ख़ाहमख़ाह, तुम चिंता करती हो। गोल्डी के इतने ढेर सारे दोस्त हैं कि...' लिज़ इतनी विचलित हो गई कि वह अपना वाक्य भी पूरा नहीं कर सकी। उसके पापा अपनी लाडली की मनोदशा बिना कहे ही समझते हैं। वह कितना चाहती थी कि गोल्डी कभी-कभी उसके पापा के साथ उठे बैठे, बियर पिए, टेनिस खेले पर न जाने क्यों वह उसके माम और डैड दोनों से ही खार खाता है।

मुश्किल से एक माह भी नहीं गुजरा कि राधा अचानक लंदन पहुँच गयी, उसे सिटी-युनिवर्सिटी में एम.बी.ए में दाख़िला मिल गया था। गोल्डी 'बैटर-हाफ़' को इतनी बड़ी बात बताना भी भूल गया था। गोल्डी के ज़ोर देने और किटकिट से बचने के लिए एलिज़ाबेथ उसके साथ राधा से मिलने गई। उसके चाचा-चाची, जयेश और सुशीला, का मकान हैरो की एक पॉश कॉलोनी में था। एलिज़ाबेथ ने देखा कि हर तरफ मार्बल की टाइल्स और ट्यूब-लाइट्स लगी थीं, लाउन्ज में देवी देवताओं की तस्वीरें लगी थीं और सस्ती मूर्तियां सजी थीं; न जाने क्यों गोल्डी इस सजावट से बहुत प्रभावित नज़र आ रहा था; या फिर यह राधा की उपस्थिति का कमाल था? 
जैसा किस एलिज़ाबेथ ने अनुमान लगा रखा था, गोल्डी और राधा के बीच अधिक बातचीत नहीं हुई। शायद उनकी सारी बातें फोन पर हो चुकी थीं। गुजराती नमकीन और मिठाईयों के साथ चाय पीने के बाद, गोल्डी चलने को उठ खड़ा हुआ। 

'भाई-भाभी कह रहे थे कि तुम लोग राधा के लिए एक सूटेबल ब्वाय ढूंढने में हमारी मदद करोगे?' अचानक सुशीला ने फ़ुसफ़ुसाकर पूछा।
'ओह, मैंने समझा कि राधा यहाँ पढ़ाई के लिए आई है,' एलिज़ाबेथ ने कहा।
'वो तो उसे यहां आने का बहाना चाहिए था न, हम सब चाहते हैं कि वह जल्दी से अपना घर बसा ले,' जयेश बोल पड़े।
'ऐसी क्या ज़ल्दी पड़ी है, अंकल जी, पढ़ाई ख़त्म करने के बाद भी तो उसकी शादी हो सकती है,' गोल्डी बोला 
'यू डोंट नो, कितना पैसा लगाया है मोटो भाई ने इसे यहां भेजने पर? पढ़ाई तो ये शादी के बाद भी कर सकती है, बस एक अच्छा लड़का मिल जाए,' लगा कि वे बहुत जल्दी में थे। 
'राधा, क्या तुम भी यही चाहती हो?' गोल्डी ने तल्ख़ी से पूछा तो राधा उसकी ओर बेचारगी से देखने लगी। ख़ामोश रही; खोई-खोई सी; हो सकता है कि वह थकी हुई हो। 
'लिज़ डार्लिंग, रात में पढ़ने के लिए इन साइड-लैंपों की रोशनी नाकाफ़ी है,' बिस्तर पर बैठते हुए गोल्डी बोला, 'अपने लाउंज और बेडरूम में हमें भी ट्यूब-लाइट्स लगवा लेनी चाहिए।' 
एलिज़ाबेथ के कान खड़े हो गए। गोल्डी के रिश्तेदारों ने शादी के उपहार में उन्हें शीशे और धातु की चमचमाती वस्तुएं भेंट की थीं। लिज़ ने उनमें से ज़्यादातर को यह कहते हुए वहीं छोड़ दिया कि वे इतना भारी सामान अपने साथ लन्दन नहीं ले जा सकते। गोल्डी की ज़िद पर कुछ सामान उनके फ़्लैट पर पहुँच ही गया, जिसे एलिज़ाबेथ ने अपने ख़ाली कमरे में रखवा दिया; गोल्डी को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगा था।
'अगर तुम्हें वो चीज़ें पसंद नहीं हैं तो हम उन्हें अपने दोस्तों को ख़ास मौकों पर उपहार में दे सकते हैं।' 
'डार्लिंग, यहां उपहार किसी की ज़रुरत या हॉबी के मुताबिक़ दिए जाते हैं न कि जो घर में बेकार पड़ा है वो उठा के दे दो। तुम बेशक उन्हें अपने दोस्तों को उपहार में दे सकते हो।' 
चाहे राधा की शादी का मसला हो या उसकी पढ़ाई का, फ़ोन पर उन दोनों की लगातार बातचीत से एलिज़ाबेथ ऊब चुकी थी, न जाने दोनों के बीच चल क्या रहा है? एलिज़ाबेथ से क्षमा-याचना सहित, जब तब वह उठकर लाउन्ज अथवा बालकनी में जाकर राधा को फ़ोन किया करता; ऐसे में नाश्ता बासी हो जाता अथवा डिनर ठंडा। एलिज़ाबेथ ने अब परवाह करना ही छोड़ दिया था; वह घंटे आध घंटे में लौटता तो अपना खाना खुद माइक्रो में गर्म करके चुपचाप खा लेता।

एक शाम जब घर लौटी तो एलिज़ाबेथ ने राधा को अपने दरवाज़े के आगे बैठा पाया। उसकी आँखें सूजी हुई थीं; शायद चाचा-चाची से लड़-झगड़ कर आई थी। एलिज़ाबेथ के पूछने के बावजूद, वह चुपचाप चाय नाश्ता करती रही किन्तु गोल्डी के आने पर जो उसने बोलना शुरू किया तो देर रात तक बोलती ही रही। जो कुछ एलिज़ाबेथ के पल्ले पड़ा वह यह था किस वह चाचा-चाची से आज़िज़ आ चुकी थी, जो उसे पश्चिमी स्टाइल के कपड़े पहनने, शाम को बाहर जाने और घर देर से लौटने आदि पर एतराज़ करते थे। 
'राधा, मैंने तुमसे कहा था न कि अभी तुम लो-प्रोफ़ाइल में रहो, थोड़ा सब्र और कर लो...' गोल्डी ने उसे शांत करने का प्रयत्न किया।
'गोल्डी, तुम जानते हो, मैंने कितना सब्र किया है पर लोग मेरा पीछा नहीं छोड़ते,'

एलिज़ाबेथ सोच रही थी कि राधा के इस कथन कहने का क्या मतलब था? क्या वह शादी नहीं करना चाहती? गोल्डी पर उसका किस तरह का अंकुश है? उसकी बकबक वह इतना सहन कैसे कर लेता है? वे उसे अपनी बातचीत में शामिल क्यों नहीं करते? जब कभी वह गोल्डी से पूछती है, वह यह कहकर उसे टाल देता है कि 'अरे, इंडियन गर्ल्स ऐसी-ही होती हैं' या 'लिज़ डार्लिंग, तुम अपना दिमाग़ खराब क्यों कर रही हो, मैं सम्हाल लूंगा।'
एलिज़ाबेथ ने खुद को इतना उपेक्षित अनुभव किया कि अपना दिल हल्का करने के लिए उसने रीटा को फोन करके पास के ही पब में बुलाया हालांकि वह जानती थी कि रीटा उसे क्या सुनाएगी, 'काश! किस तुमने मेरी बातों पर पहले ध्यान दिया होता तो आज यह दिन देखने को तो नहीं मिलता।' 
'लिज़ डिअर, कंपनी की बदहाली से निपटना तुम्हारा रोज़ का काम है। तुम अपनी इस छोटी सी समस्या को क्यों नहीं सुलझा पा रही? न तुम किसी से कुछ कहती हो और न ही किसी की सुनती हो,' जैसे ही रीटा आई, उसने अपना गुबार उड़ेल दिया।
'मैं यहां अपना ग़म ग़लत करने आई हूँ...'  
'लिज़, जब तक तुम किसी समस्या को समझोगी ही नहीं, उसे सुलझाओगी कैसे? जब तुम हमारी मल्टी-मिलिनेयर कंपनी की समस्यों को सुलझा सकती हो तो अपनी छोटी सी गृहस्थी...,' रीटा झुंझलाते ड्रिंक्स लेने के लिए उठ खड़ी हुई।

एलिज़ाबेथ के दिमाग़ में यक-ब-यक एक तूफ़ान-सा उठ खड़ा हुआ। क्यों नहीं चाहती वह अपनी मुसीबत से निपटना? अमरीका में आए तूफ़ान-केटरीना से निपटना उसके लिए कोई मुश्किल बात नहीं, यह उसके पेशे की बात है; कंपनी के नुक्सान और फ़ायदे को मद्देनज़र रखकर ही उसे निर्णय लेना होता है, निजि तौर पर उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, ग़लत हुआ तो अधिक से अधिक उसका बोनस कम हो जाएगा। वह यह भी जानती है कि उसकी अपनी मुसीबतों की जड़ में कौन है पर इस जड़ को उखाड़ फेंकने के लिए क्या उसे अपने वैवाहिक संबंधों को दांव पर लगा देना चाहिए? उसके इसी डर का फ़ायदा उठा रहा है गोल्डी।
'लिज़्ज़ी डिअर, जीवन में तुम्हें मैंने इतना स्ट्रेस्ड कभी नहीं देखा, गोल्डी निश्चित रूप से तुम्हारे लायक नहीं है, समय बर्बाद न करो तो बेहतर होगा, ।' माँ ने भी उससे यही बात कही थी।
एलिज़ाबेथ घर लौटी कि वह इसी वक्त गोल्डी से सफ़ाई मांगेगी किन्तु वहाँ तो चारों तरफ़ ख़ामोशी पसरी हुई थी; वह देर तक जागती रही। सुबह उठी तो देखा राधा चादर ताने सो रही थी। 
'उसे सोने दो, डार्लिंग, उसके चाचा-चाची ने उसकी ज़िंदगी को जहन्नुम बना रखा है। वे उसकी शादी के लिए बार-बार लड़के दिखाते हैं जबकि वह शादी करना ही नहीं चाहती।' गोल्डी ने उसके कान में फुसफुसा कर कहा और दफ्तर के लिए निकल गया।

उसी शाम को डारचेस्टर में क्रिसमस के उपलक्ष्य में कोई जलसा था। दफ्तर का काम निपटा कर एलिज़ाबेथ और रीटा वहाँ कुछ देर में पहुंचीं तो देखा गोल्डी, राधा, डिक, सारा और लीना एक ही मेज़ पर बैठे हुए शराब पी रहे थे। एलिज़ाबेथ का हाथ थामे रीटा सीधा बार की ओर चल दी। रीटा ने आज एलिज़ाबेथ को खूब अच्छे से तैयार किया था; डिज़ाइनर सुर्ख ड्रेस में वह सचमुच इतनी खूबसूरत लग रही थी कि उनकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी के कई अधिकारी उसकी ओर विशेष रूप से खिंचे आ रहे थे। रीटा ने उससे वादा लिया था कि आज वे दोनों पार्टी का पूरा लुत्फ़ उठाएंगी और गोल्डी एवं राधा को लेकर कोई माथापच्ची नहीं करेंगी। सो, दुश्चिंताओं का छू-मंतर करने और सारी समस्याओं को भुलाने के लिए वे दोनों शराब पीने लगीं। 
'गोल्डी को देखो। वह अपनी निग़ाहें तुम्हीं पर जमाए है।' रीटा ने लिज़ के कान में फ़ुसफ़ुसाकर कहा। 
'रीटा, तुम तो कह रही थीं की हम इस बरे में कोई बात नहीं करेंगे,' 
'हाँ यार, पर गोल्डी को चिंता में देख कर दिल ठंडा हो गया।'
'गोल्डी जैसा है, वैसा ही रहेगा। मैं जान गयी हूँ कि मैं उसके साथ कभी खुश नहीं रह सकती इसलिए मैंने उसे आज़ाद छोड़ देने का फ़ैसला ले लिया है।'
'लिज़, शुक्र है, तुम्हें अक्ल तो आई पर उसे छोड़ने से पहले अपने बैंक एकाउंट्स वगैरह सेफ़गार्ड कर लेना,'
'रीटा, ज़िंदगी बैंक में जमा पाउंड्स से कहीं अधिक कीमती है,'  तभी उनके बॉस पीटर हेज़ ने उन्हें अपनी मेज़ पर आकर बैठने की दावत दी तो रीटा बहुत खुश हुई। जैसे ही एलिज़ाबेथ को चूमने के लिए पीटर उस पर झुका, गोल्डी से और अधिक बरदाश्त नहीं हुआ, वह दौड़ कर उनकी मेज़ पर पहुँच गया। 
'लिज़ डार्लिंग, तुम्हारी सीट हमारी मेज़ पर है, चलो,'
'मैं यहां ठीक हूँ, डार्लिंग, तुम अपनी राधा के पास जाकर बैठो, तुम्हारी जोड़ी अच्छी लगती है,'
'यह तुम क्या कह रही हो?' गोल्डी हक्का बक्का रह गया; एलिज़ाबेथ ने पहले कभी उससे इस तरह से बात नहीं की थी। 
'बनो मत, गोल्डी, तुम अच्छी तरह जानते हो कि लिज़ किसके बारे में बात कर रही है,' रीटा बीच में ही टपक पड़ी, 'आज क्रिसमस है, लीव हर अलोन।' 
'तुम चुप रहो रीटा, मुझे पता है, मेरी भोली-भाली लिज़ को तुम ही भड़काती रही हो। लिज़, डार्लिंग, चलो, हमें यहाँ से चलना चाहिए,'  
एलिज़ाबेथ बॉस के सामने तमाशा बनना नहीं चाहती थी इसलिए 'माफ़ कीजिएगा' कहती हुई गोल्डी के साथ चल दी पर वापिस अपनी मेज़ पर लौटने के बजाय, गोल्डी बाहर लाउन्ज में रखे सोफ़े पर आ बैठा। यहाँ से उसका घर खिसक लेने का इरादा था।
'लिज़ डार्लिंग, तुम्हारे दिमाग़ में यह बात आई भी कैसे? तुम अच्छी तरह से जानती हो कि यू रियली आर माई बैटर हाफ़, ' 
'आई डोंट वांट टु हिअर एनी मोर लाइज़, गोल्डी, प्लीज़ लीव मी अलोन,' गोल्डी जान गया था कि उसका खेल ख़त्म होने को है।
'मुझे पहले ही तुम्हें सच बता देना चाहिए था, लिज़ डार्लिंग,' गोल्डी एलिज़ाबेथ के कान में फ़ुसफ़ुसाया, 'राधा इज़ ए लेस्बियन। मैंने राधा से वादा किया था कि मैं किसी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताऊंगा, तुम्हें भी नहीं। इसी वज़ह से उसके माँ-बाप ने उसे यहाँ भेज दिया लेकिन उसके चाचा-चाची उसकी शादी पर अड़े हैं। आई एम सो सो सौरी, पलीज़ मुझे माफ़ कर दो, डार्लिंग।'
'सच कह रहे हो?' गोल्डी की सच्चाई को सहर्ष स्वीकार करके एलिज़ाबेथ अपनी दुश्चिंताओं से निजात पाना चाहती थी; जबकि उसका मन कुछ और ही कह रहा था।

दोनों के पीछे खड़ी राधा और रीटा ने गोल्डी की सारी बातें सुन ली थीं। राधा गुस्से से काँप रही थी। गोल्डी का सिर अपनी तरफ़ ज़बरदस्ती घुमाते हुए उसने पूछा, 'गोल्डी, तुमने लिज़ से अभी अभी क्या कहा?' 
गोल्डी को काटो तो ख़ून नहीं, उसके चेहरे का रंग पीला पड़ चुका था।
'बस यही कि हम बचपन के दोस्त हैं और इसलिए मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ। तुम जाकर अपनी टेबल पर बैठो, मैं लिज़ को लेकर आता हूँ।' एलिज़ाबेथ का हाथ पकड़ वह हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ। 
'गोल्डी ने लिज़ को बताया है कि तुम लेस्बियन हो, राधा,' रीटा बोली, जो अपनी कमर पर हाथ रखे खड़ी थी। 
'मैंने सुन लिया है, थैंक यू, रीटा, मैं इस कमीने और हरामखोर के मुंह से दोबारा सुनना चाहती हूँ, ' यकायक राधा ने गोल्डी का गला पकड़ लिया। गोल्डी अपने को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। 
'मैं इन झूठे इल्ज़ामों से तंग आ चुका हूँ, यू आर आल मैड...,' गोल्डी तीन क्रोधित महिलाओं से बच निकलने का रास्ता ढूंढ रहा था।
'राधा, तुम्हें इतने दिन हो गए यहां आए हुए, तुमने मुझसे कुछ कहा क्यों नहीं?' एलिज़ाबेथ ने अपना गुस्सा राधा पर निकालना चाहा। 
'इस घटिया आदमी ने हमें बताया कि तुम्हें बदनामी से बचाने के लिए इसे तुमसे विवाह करना पड़ा और तुम इसे जल्दी ही तलाक दे दोगी ताकि ये मुझसे शादी कर सके,' रीटा ने एलिज़ाबेथ को थाम न लेती तो शायद वह इस सदमें से बेहोश होकर गिर ही जाती।
'व्हाट डून यू मीन, मुझे किस बदनामी से बचा रहे थे तुम, गोल्डी?' किंकर्तव्यविमूढ़ एलिज़ाबेथ ने गोल्डी से पूछा। 
'लिज़ डार्लिंग, उसकी बात मत सुनो। यह पूरी मेन्टल है। इसी की वजह से मुझे बड़ौदा से भागना पड़ा ताकि मैं ...' गोल्डी ने एक आख़िरी दांव फेंका।

'शट-अप, इस झूठे ने हमें बताया था कि तुम एक भयंकर बलात्कार की शिकार हो गयी थीं और जब तुम्हें गर्भ ठहर गया तो तुम्हारे पैरेंट्स ने इससे इल्तजा की कि तुम्हारी इज़्ज़त बचाने के लिए वह तुमसे शादी कर ले...' 
'लिज़ डार्लिंग, यह हमारी शादी-शुदा ज़िंदगी बरबाद करना चाहती है। इसके पहले कि बहुत देर हो जाय, मेरी बात सुनो...' एलिज़ाबेथ के आगे गोल्डी अपने घुटनों के बल बैठ गया। 

'इसके पहले किस हम पुलिस को बुलाएं, बैक-ऑफ़, गोल्डी, तुम्हारा खेल ख़त्म हो चुका है।' रीटा ने लड़खड़ाती हुई एलिज़ाबेथ को अपनी बाँहों में जकड़ लिया।

एकाएक एलिज़ाबेथ को याद आया कि जब राधा के परिवार में सब उसे इतनी नफ़रत से देख रहे थे। उसने सुन रखा था कि एशियाई देशों में किसी अविवाहित लड़की के गर्भ ठहर जाना बहुत बड़ा कलंक माना जाता है और ये भी कि ऐसी लड़कियों की वहाँ हत्या तक कर दी जाती है या वे खुदकुशी कर लेती हैं।

'लिज़, माई डार्लिंग, मैं मन से तुम्हें अपनी अर्धांगिनी मानता हूँ, प्लीज़ फॉरगिव मी, जानू।' गोल्डी इस वक्त भी यही सोच रहा था कि आज क्रिसमस है, शायद लिज़ उसे माफ़ कर दे।

'ही इज़ ए कंपलसरी लायर, लिज़,' रीटा बोली, चलो अंदर चलकर बात करते हैं।' रीटा लिज़ और राधा को खींचते हुए अंदर हॉल में ले आई। इस समय रात के पूरे बारह बजे थे, बगल में बिग-बेन का घंटा ज़ोर ज़ोर से टनटना उठा। शैम्पेन की बोतलें खुल रही थीं, गाते-नाचते मेहमान एक दूसरे को चूमते हुए बधाई दे रहे थे। लिज़, राधा और रीटा भी इन्हीं में शामिल थीं और गोल्डी, कौन गोल्डी?   

(मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद: मनोज मोक्षेन्द्र)