ग़ज़ल- पवन कुमार

पवन कुमार 
जुनूँ में रेत को यूँ ही नहीं निचोड़ा था
किसी की प्यास ज़ियादा थी पानी थोड़ा था

तमाम उम्र भटकते रहे थे वहशत में
बस एक मर्तबा हमने हिसार तोड़ा था

बिखर गए थे कई वाकये भी सिक्कों से
तुम्हारी याद की गुल्लक को रात तोड़ा था

फिर उसके बाद से आँखों  से नींद गायब थी
किसी ख़याल ने एहसास को झिंझोड़ा था

जुनूँ में रेत को यूँ ही नहीं निचोड़ा था
हमारी प्यास ज़ियादा थी आब थोड़ा था