दो शब्द - अनुराग शर्मा

नमस्कार मित्रों,

पिट्सबर्ग से प्रकाशित द्वैभाषिक पत्रिका सेतु का छठा अंक आपकी सेवा में प्रस्तुत करते हुए यह बताना ज़रूरी समझता हूँ कि सेतु को अपनी आईएसएसएन संख्या मिल गई है। छोटी, छोटी ही सही, ये मंज़िलें हमें इस बात का एहसास अवश्य कराती हैं कि सेतु एक लम्बी दौड़ का घोड़ा है।

इस माह प्रसिद्ध साहित्यकार विवेकीराय जी के निधन से हिंदी साहित्य को एक बडी क्षति हुई है। सेतु परिवार की और से दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि।

हिंदी काव्य प्रतियोगिता के बारे में आपकी उत्सुकता को समझते हुए मैं यह बताना भी ज़रूरी समझता हूँ कि अपेक्षा से कहीं अधिक रचनाएं पाने के कारण निर्णयकार्य कुछ धीमा अवश्य हुआ है परंतु रुका नहीं है। कार्य पूर्ण होते ही हम विजेताओं की घोषणा करेंगे। प्रकाशन के इच्छुक मित्रों से बार फिर अनुरोध करना चाहता हूँकि हमें भेजी गई अन्य कई रचनाएं भी यूनिकोड में न होने पर हम खुद को उनका प्रयोग कर सकने में असमर्थ पाते हैं। कृपया रचना भेजने के नियमों को ध्यान से पढकर रचनाएं setuhindi@gmail.com पर ही भेजिये:
सेतु में प्रकाशन के उद्देश्य से भेजी गई रचना यूनिकोड में टंकित, स्वरचित, मौलिक, व अप्रकाशित होनी चाहिये। पहली बार रचना भेजते समय उसके साथ लेखक का संक्षिप्त परिचय तथा स्पष्ट चित्र भी भेजें। रचना भेजने से पहले लेखकों से निवेदन (विस्तृत नियम) पढकर कृपया उनसे सहमति भी दें।
इस अंक में "बिस्मिल की आत्मकथा" के तीसरे खण्ड के साथ-साथ सभी स्तम्भ तथा गद्य व पद्य में अनेक साहित्यिक रचनाएं उपस्थित हैं। स्तरीय साहित्य पढने का आनंद उठाते हुए पत्रिका के इस अंक के बारे में हमें अपनी राय से अवगत अवश्य करायें।

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा  
पिट्सबर्ग, अमेरिका