मैं तुम्हें अब भी बहुत प्यार करता हूँ- रिचर्ड फ़ाइनमेन

- मेहेर वान

प्रोफ़ेसर रिचर्ड फ़ाइनमेन दुनियाँ के अब तक के सबसे प्रभावशाली भौतिकविदों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने भौतिकी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें क्वान्टम भौतिकी के पाथ-इन्टीग्रल्स, क्वांटम एलेक्ट्रोडायनामिक्स, कण भौतिकी के क्षेत्र में किये गये शोध कार्य के लिये जाना जाता है। उन्हें 1965 में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया। फ़ाइनमेन अपनी युवावस्था में अमेरिका में परमाणु बम बनाने वाले मैनहैटन प्रोजेक्ट से जुड़े रहे। वह एक प्रखर शिक्षक थे। उनके द्वारा दिये गये “फ़ाइनमेन लेक्चर्स ऑन फिजिक्स” जैसे व्याख्यान आज भी बहुमूल्य हैं।

रिचर्ड  व आर्लीन फ़ाइनमेन
उन्हें अपने स्कूल की सखि आर्लीन से प्रेम हुआ और उन्होंने आर्लीन से विवाह का निर्णय लिया। उसी समय पता चला कि आर्लीन को तपेदिक (टीबी / ट्यूबरक्लोसिस) की बीमारी है। उस समय तपेदिक का इलाज नहीं था, जिन्हें ट्यूबरक्लोसिस हो जाती थी वे जल्दी ही मर जाते थे। अमेरिका में उस समय एकांत इलाकों में अस्पताल बनाये गये थे जिनमें इन मरीजों को सामान्य लोगों से अलग रखा जाता था ताकि बीमारी अन्य लोगों में न फ़ैले। फ़ाइनमैन के माता-पिता ऐसी लड़की से अपने बेटे की शादी करने के लिये कतई तैयार नहीं थे जिसे एक-दो साल में मर जाना हो। लेकिन फ़ाइनमेन कहना था कि उन्हें आर्लीन के साथ ही रहना है भले ही वह समय कुछ साल का ही क्यों न हो, वह आर्लीन की देखभाल करना चाहते थे। जब फ़ाइनमेन का आर्लीन से विवाह हुआ तभी फ़ाइनमैन मैनहैटन प्रोजेक्ट में काम करने लॉस-अलामोस चले गये। लेकिन साथ में आर्लीन को भी ले गये और वहाँ से सबसे नजदीक अस्पताल में आर्लीन को भर्ती करा दिया। उन्हें जैसे भी समय मिलता, वह आर्लीन से मिलने चले जाते। अस्पताल दूर-दराज एकांत इलाके में था इसलिये लॉस-अलामोस से अस्पताल जाने में रात भर का समय लगता।

मेहेर वान
एक दिन जब फ़ाइनमेन काम कर रहे थे तब अस्पताल से फोन आया कि आर्लीन की मौत नजदीक है। फ़ाइनमेन एक दोस्त की कार मांगकर अस्पताल पहुँचे और आर्लीन के पास घंटों बैठे रहे। उन्होंने आर्लीन की सांस को थमते हुये और शुरु होते हुये देखा। वह देख रहे थे कि आर्लीन की कोशिकायें सांस के लिये तड़प रहीं हैं, दिल रक्त को नसों में नहीं धकेल पा रहा है। आर्लीन प्राण त्याग रही है। फिर अचानक से एक लम्बी सांस आयी और सब खत्म हो गया। नर्स ने बताया कि आर्लीन यह दुनियाँ छोड़ चुकी है। फ़ाइनमेन की जीवनी लिखने वाले लिखते हैं कि फ़ाइनमेन ने आर्लीन को अंतिम चुम्बन किया और अंतिम संस्कार करने के बाद आर्लीन का सामान पैक करके वापस लॉस-अलामोस लौट आये। वह बहुत लम्बे वक्त तक परेशान रहे। लगभग २ साल बाद उन्होंने यह पत्र अपनी मृत पत्नी के लिये लिखा था। इस पत्र को उन्होंने एक लिफ़ाफ़े में बन्द करके रख दिया था। यह पत्र उनकी अल्मारी में रखा रहा। फ़ाइनमेन की मौत के बाद जब उनके सामान को देखा जा रहा था तब 1988 में यह हृदय-विदारक पत्र मिला।

अक्टूबर 17, 1946

प्रिय आर्लीन,

मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ, प्रिय!
मुझे पता है, तुम्हें यह सुनना कितना अच्छा लगता है- लेकिन मैं यह केवल इसलिये नहीं लिखता हूँ कि तुम्हें अच्छा लगे- मैं इसलिये लिखता हूँ क्योंकि तुम्हारे लिये लिखे गये ये शब्द मुझे गर्मजोशी से भर देते हैं।

तुम्हें पत्र लिखे हुये एक बहुत लम्बा समय हो गया – लगभग २ साल, लेकिन मैं जानता हूँ कि तुम मुझे माफ़ कर दोगी क्योंकि तुम समझती हो कि मैं कैसा हूँ, जिद्दी और यथार्थवादी; और मैं यह भी सोचता रहा कि अब तुम्हें पत्र लिखने का कोई मतलब नहीं है।

लेकिन मेरी प्यारी बीवी, अब मुझे पता है कि जिस काम को करने में मैंने इतनी देरी की, उसे अब करना सही है, और जो मैं पहले बहुत अधिक करता रहा हूँ। मैं तुम्हें कहना चाहता हूँ कि मैं तुम्हें प्यार करता हूँ। मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ। मैं तुम्हें हमेशा प्यार करूंगा।

मेरे दिमाग के लिये यह समझना बहुत कठिन है कि तुम्हें मरने के बाद प्यार करने का क्या मतलब है- लेकिन फिर भी मैं तुम्हारी देखभाल करना चाहता हूँ, तुम्हें सुकून देना चाहता हूँ- और मैं चाहता हूँ कि तुम भी मुझे प्यार करो और मेरी देखभाल करो। मेरे पास ऐसी तमाम समस्यायें हैं जिनके बारे में मुझे तुमसे मशविरा लेना है- मैं तुम्हारे साथ बहुत छोटे-छोटे काम करना चाहता हूँ। मैंने अब के पहले कभी नहीं सोचा था कि हम ऐसा कर भी सकते हैं। हमें क्या करना चाहिए? हमने साथ में कपड़े बनाना सीखना शुरु किया था- या चीनी भाषा सीखना शुरु किया था- या साथ फिल्म प्रोजेक्टर लिया था। क्या मैं अब कुछ नहीं कर सकता? नहीं। मैं अब तुम्हारे बिना अकेला हूँ। तुम नयी-नयी योजनायें बनाने वाली और हमारे तमाम अटपटे रोमांचक काम करने के लिये भड़काने वाली लड़की थीं।

जब तुम बीमार थीं तो परेशान थीं क्योंकि तुम मुझे वह सब कुछ नहीं दे पायीं जो मुझे तुम देना चाहतीं थीं और तुम्हारे विचार से जिस सब की मुझे ज़रूरत थी। तुम्हें चिन्ता करने की ज़रूरत नहीं है। जैसे मैंने तुम्हें तब कहा था कि वास्तविक रूप से मेरी कोई जरूरतें नहीं थीं क्योंकि मैं तुम्हें तमाम तरह से इतना प्यार करता था। और अब यह पहले से बहुत अधिक सच है- तुम मुझे अब कुछ नहीं दे सकती फिर भी मैं तुम्हें इतना प्यार करता हूँ कि तुम किसी और को प्यार करने के रास्ते में भी मेरे सामने खड़ी होती हो- लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम वहाँ रहो। तुम मृत होकर भी मेरे लिये उन सबसे बहुत बेहतर हो जो जिंदा हैं।

मुझे पता है कि तुम मुझे विश्वास दिलाओगी कि मैं बेवकूफ़ हूँ- और यह कि तुम मुझे पूरी तरह से खुश देखना चाहती हो और तुम मेरे रास्ते में नहीं आना चाहती। मैं शर्त लगा सकता हूँ कि तुम्हें आश्चर्य होगा कि इन दो सालों में (तुम्हारे सिवा, प्रिय) मेरी कोई भी प्रेमिका नहीं है। लेकिन, प्रिय, तुम इसमें कुछ नहीं कर सकती, न ही मैं कुछ कर सकता हूँ- मैं नहीं समझ पाता कि मैं तमाम लड़कियों से मिला और बहुत अच्छी लड़कियों से भी, और मैं अकेला भी नहीं रहना चाहता- लेकिन दो-तीन मुलाकातों के बाद सब कुछ राख हो जाता है। मेरे लिये केवल तुम बची हो। तुम यथार्थ हो।
मेरी प्यारी बीवी, मैं सच में तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ।

मैं अपनी बीवी से प्यार करता हूँ। मेरी बीवी मर चुकी है।

- रिचर्ड
पुनश्व: कृपया, इस पत्र को तुम्हें भेज न पाने के लिये माफ़ करना- मैं तुम्हारा नया पता नहीं जानता।