डॉ. श्रीश पाठक

परिचय 
जन्म तो १ मई १९८५ को प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में, पर मूल निवासी:  जनपद संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश के सरयू तीरे बसा गाँव बईसा।

पिता जी भाव-विभोर होकर पढ़ते रामचरितमानस रोज और यहीं से शायद जगी साहित्यिक अभिरुचि। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर के आदरणीय आचार्यों ने परिष्कृत भी किया और अभिवृत्ति को अभिव्यक्ति भी दी।

गोरखपुर विश्वविद्यालय से कलास्नातक एवं राजनीति शास्त्र में परास्नातक।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के सहज साहित्यिक परिसर में 'नवोत्पल साहित्यिक मंच' का सामूहिक सञ्चालन।
विभिन्न अख़बारों में कवितायें प्रकाशित।
अंतर्राज्यीय स्तर कविता पाठ में गोल्ड मेडल।
युवा सप्तकविमंडल में चयनित।
विभिन्न कवि सम्मेलनों में परिभाग एवं सञ्चालन।
परिसर की 'नवाक्षर' पत्रिका का संपादन।

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली  से अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध के द. एशियाई अध्ययन विभाग में एम.फिल. एवं सीमा सुरक्षा विषय पर पीएचडी।

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई शोधपत्र प्रकाशित।

श्रीश उवाच, नवोत्पल, सदाग्रह, प्रखर दैनन्दिनी  ब्लॉग सञ्चालन।

सस्वर कविता-पाठ में रूचि।

नियमित आलेख लेखन: नमस्ते भारत, NewsCaptured, गुलमोहर, etc.

सम्प्रति गल्गोटियाज यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र अध्यापन।

लेखकवृंद