दो शब्द: नव वर्षांक

सन् 2017 के पहले अंक में सेतु के सभी पाठकों का अभिनंदन!

अनुराग शर्मा
भारतीय वाङ्मय के  'ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्या' या 'सर्वं दुखम् सर्वं क्षणिकम्' जैसे कथन जहाँ हमें जीवन की नश्वरता की याद दिलाते हैं, वहीं 'मृत्योर्मामृतम् गमय' जैसे बोधवचन मानो एक नई आशा का संचार भी करते हैं। छोटे से जीवन में एक वर्ष का समय भी कोई कम नहीं होता। बल्कि समय के विभिन्न मानकों में वर्ष इसलिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ऋतुओं का एक चक्र सम्पन्न होता है। 2016 के गमन के साथ एक वर्ष और बीत गया है। नये वर्ष 2017 के साथ सेतु ने आठवें अंक में प्रवेश किया है। जनवरी नई आशा का मास है। नववर्ष के उल्लास के साथ लोहड़ी, बिहु, पोंगल, भोगी, मकर संक्रांति आदि के उत्सव तो हैं ही, ज्ञान और कला का उत्सव वसंत पंचमी भी सामने ही है।

जनवरी में ही दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला भी लगता है। इस बार के मेले में सेतु के हिंदी सम्पादक दीपक मशाल के रुझान प्रकाशन द्वारा प्रकाशित लघुकथा संग्रह 'खिड़कियों से' का भी विमोचन हुआ है। दीपक को शुभकामनाएँ।

2016 के समापन से पहले सेतु के सम्पादनमण्डल ने हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं के दो-दो प्रतिनिधियों को उनके योगदान के लिये सम्मानित करने का निर्णय लिया था। अंग्रेज़ी में उषा किशोर तथा तबिश खैर के चुनाव के बाद हिंदी के क्षेत्र में मैत्रेयी पुष्पा तथा शैलेश भारतवासी को वर्ष 2016 का सेतु हिंदी सम्मान देने का निर्णय किया है। इस सम्मान के लिये स्वीकृति देने हेतु मैं इन दोनों गुणीजनों का सेतु सम्पादन मण्डल की ओर से आभारी हूँ।

सेतु के इस अंक में प्रस्तुत है, बदलते मौसमों, और बदलते मूड के वैविध्य को काव्य में ढालते हुए संकलन, पतझड़ सावन वसंत बहार पुस्तक की एक समीक्षा प्रसिद्ध साहित्यकार 'पंकज सुबीर' की ओजस्वी लेखनी से। प्रसिद्ध बहुभाषी साहित्यकार देवी नागरानी द्वारा कमल किशोर गोयनका की पुस्तक समीक्षा इस अंक का विशेष आकर्षण है। काव्य में इस बार दामोदर मोरे, अनुराग मिश्र और सत्या शर्मा के साथ भारतवंशी साहित्य की शृंखला में इस बार मॉरिशस से वत्सला राधाकिसून की कविताएँ भी हैं।

हिंदी में यूनिकोड के प्रयोग के बारे में सभी आवश्यक जानकारी के लिये इस अंक में हम आपके लिये लेकर आये हैं, एक विशेष आलेख 'यूनिकोड अपनाइये'। सेतु के स्थाई स्तम्भ के रूप में हुतात्माओं के त्याग की याद दिलाने के लिये 'बिस्मिल की आत्मकथा' तो है ही आपके लिये फ़ोटो-फ़ीचर, व्यंग्य, अनुवाद, लघुकथा, आलेख, निबंध, संस्मरण भी हैं।

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आभार,
अनुराग शर्मा
सेतु, पिट्सबर्ग, संयुक्त राज्य अमेरिका