माँ तुम लौट क्यूँ नही आती- रंजना नौटियाल

रंजना नौटियाल 
माँ तुम लौट क्यूँ नही आती 
साँझ ढले मिलते है किवाड़ बंद मुझे 
बेसब्र सी चलती तुम नज़र नही आती... 
माँ तुम लौट क्यूँ नही आती

थाली मे मिलती है रोटी सब्ज़ी तरकारी 
सिलबट्टे मे पीस के चटनी कोई नही बनाती
माँ तुम लौट क्यूँ नही आती

दाल भारत के साथ नही मिलता दही अचार
किसी की आँखो मे मेरी फ़िक्र नज़र नही आती
माँ तुम लौट क्यूँ नही आती

दिन कई बीते , न तोल लगाया बालों मे
हल्के हाथो की मालिश बहुत याद आती 
माँ तुम लौट क्यूँ नही आती 

कहने को तो सब है पर इस सर्दी मे
तसले मे रख के कोयले की आग 
मेरे तन को नही गरमाती ........
माँ तुम लौट क्यूँ नही आती 

घर है बच्चे है परिवार बड़ा है
तुझ सा दुनिया मे कौन खरा है
तेरी कमी कोई शै न पूरी कर पाती 
माँ तुम फिर से लौट क्यूँ नही आती।