एक परेशान माँ के नाम फ़्रायड का पत्र


मेहेर वान 
सन 1935 में एक परेशान माँ ने मनोविश्लेषण के प्रणेता और उस समय के जाने माने मनोचिकित्सक प्रोफ़ेसर सिगमंड फ़्रायड ने पत्र लिखकर संपर्क किया.वह चाहती थीं कि प्रोफ़ेसर फ़्रायड उनके पुत्र का इलाज़ करें। उनका पुत्र समलैंगिक था, मगर यह बात माँ अपने पत्र में साफ़-साफ़ नहीं लिख पाईं थीं हालाँकि उन्होंने लड़के के लक्षणों का उल्लेख पत्र में किया था। प्रोफ़ेसर फ़्रायड मानते थे कि मानव दोनों तरफ़ (नर और मादा) समान रूप से कामुकता में आकर्षित हो सकता है। परेशान माँ को प्रोफ़ेसर फ्रायड ने पत्र के रूप में यह उत्तर दिया था। तब समलैंगिकता को लेकर बहुत खुलकर बात नहीं होती थी। उस समय समलैंगिकता को लेकर जागरुकता भी नहीं थी और न ही उतनी वैज्ञानिक समझ विकसित हुई थी। यह पत्र माँ ने अल्फ़्रेड किन्से को भेजा था जिसका नोट पत्र के चित्र में चिपका हुआ है. यह पत्र बाद में अमेरिकन जर्नल ऑफ़ साइकेट्री के 1951 अंक में प्रकाशित हुआ था।



09 अप्रैल, 1935
प्रोफ़ेसर डॉ. फ़्रायड

प्रिय श्रीमती [.........]

आपके पत्र के ज़रिये मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि आपका पुत्र समलैंगिक है। मैं सबसे ज़्यादा इस तथ्य से प्रभावित हूँ कि आपने उसके बारे में बताते हुये एक बार भी इस शब्द का उल्लेख नहीं किया है। क्या मैं आपसे पूछ सकता हूँ कि आप इस (के इस्तेमाल) से क्यों बच रहीं हैं? समलैंगिकता निश्चित रूप से कोई श्रेष्ठता नहीं है , लेकिन इसमें शर्मिंदगी के लिये भी कुछ नहीं है, न चरित्रहीनता, और न ही अपकर्ष; हम इसे कामुक प्रक्रिया का एक भिन्न स्वरूप मानते हैं, यह लैंगिक विकास की एक खास तरह की प्रक्रिया में उत्पन्न होता है। तमाम उच्च कोटि के सम्माननीय लोग प्राचीन और आधुनिक काल में समलैंगिक रहे हैं, उनमें से तमाम दुनियाँ के सबसे महान लोगों में से हैं। (प्लेटो, माइकेलएंजेलो, लियोनार्डो द विंसी इत्यादि) समलैंगिकता को अपराध की तरह दंडित करना एक उच्च कोटि का अन्याय है और निर्दयता भी है। अगर आप मुझ पर विश्वास नहीं करती हैं तो हैवलोक एल्लिस की किताबें पढ़कर देखिये।

क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूँ यह कहने से आपका मतलब मेरी समझ में यह है कि क्या मैं (आपके पुत्र में) समलैंगिकता को खत्म करके, सामान्य विषमलैंगिकता को उत्पन्न कर सकता हूँ? इसका उत्तर है कि सामान्य तौर पर हम इसे प्राप्त कर सकने का वादा नहीं कर सकते। कई मामलों में हमने विषमलैंगिक प्रवृत्तियों के उच्च कोटि के स्तर को पाने में सफलता प्राप्त की है जो कि सभी समलैंगिकों में उपस्थित थी, मगर बहुत सारे मामलों में यह संभव नहीं हो सका है। यह महज गुणवत्ता और व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करता है। इलाज़ के परिणामों के बारे भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

 (मनो)विश्लेषण आपके पुत्र के लिये क्या कर सकता है यह एक अन्य बात है। यदि वह खुश नहीं है, विक्षिप्त है, मानसिक द्वन्द्व से विखरा हुआ है, और अपने सामाजिक जीवन में हिचकता है, तो (मनो)विश्लेषण आपके बेटे के मन मष्तिष्क में शान्ति, जीवन में समरसता, पूर्ण कार्यकुशलता वापस ला सकता है, चाहे वह समलैंगिक बना रहे अथवा वापस सामान्य हो जाये। यदि आप उसका मेरे साथ मनोविश्लेषण कराने के लिये अपना मन बनाती हैं- मुझे उम्मीद नहीं आप ऐसा करेंगीं- तो उसे वियना आना पड़ेगा. मेरा यह जगह छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. हालांकि, उत्तर देने में आप हिचकियेगा नहीं।

शुभकामनाओं सहित, भवदीय

फ़्रायड

अनुलेख: मुझे आपकी लिखावट पढ़ने में कोई बहुत मुश्किल नहीं हुयी. आशा है कि मेरी लिखावट और मेरी अंग्रेज़ी पढ़ना भी आपके लिये बहुत कठिनाई भरा काम साबित नहीं होगा.