जब आइंस्टीन ने राष्ट्रपति का पद ठुकराया


मेहेर वान 
आइंस्टीन की राजनैतिक और सामाजिक समझ वैज्ञानिक होते हुये भी बेजोड़ थी। उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर इज़राइल के प्रधानमंत्री डेविड बेन-ग्यूरियन ने उन्हें इज़राइल के राष्ट्रपति का पद प्रस्तावित किया था। यह 1952 की बात है, चूँकि अल्बर्ट आइंसटीन उस समय अमेरिका में रह रहे थे, बेन-ग्यूरियन ने  अमेरिका के इज़राइली दूतावास में मंत्री के बतौर कार्यरत डेविड गोयटीन के हाथों यह पत्र भेजा था। हालाँकि आइंस्टीन ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। इसके महज तीन साल बाद सन 1955 में अल्बर्ट आइंस्टीन की मृत्यु हो गयी थी। वह पत्र इस प्रकार है- 


इज़राइली दूतावास
वाशिंगटन डी.सी.
17 नवम्बर, 1952

प्रिय प्रोफ़ेसर आइंस्टीन:
इस पत्र के वाहक जेरुसलम के श्री डेविड गोयटीन हैं जो वाशिंगटन में हमारे दूतावास में बतौर मंत्री कार्यरत हैं। उनके पास आपके लिये एक प्रश्न है, जिसे प्रधानमंत्री बेन-ग्यूरियन ने मुझे आपसे पूछने के लिये कहा था, और वह यह है कि यदि नायसेट (इज़राइल की संसद) द्वारा वोट के ज़रिये आपको (इज़राइल का) राष्ट्रपति पद प्रस्तावित किया जाये तो क्या आप उसे स्वीकार करेंगे? स्वीकारोक्ति में आपको इज़राइल आना होगा और (यहाँ की) नागरिकता लेनी होगी। प्रधानमंत्री ने मुझे आश्वस्त किया है कि इन परिस्थितियों में भी, सरकार और जनता, जो कि आपके परिश्रम की श्रेष्ठता से भलीभाँति परिचित है, आपको अपने वैज्ञानिक कार्य करने की पूर्ण सुविधा और स्वतंत्रता प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री के प्रश्न के मायनों के बारे में आप जो भी जानना चाहेंगे, वह हर एक जानकारी श्री गोयटीन आपको उपलब्ध करायेंगे।

आपके झुकाव या निर्णय के सम्बन्ध में एक या दो दिन के अन्दर आपके लिये सुलभ स्थान पर आपसे बात-चीत का मौका प्रदान करने के लिये, मुझे आपका गहराई से आभारी होना चाहिये। आज शाम जो चिंतायें और संदेह आपने मुझसे साझा किये थे उन्हें मैं समझता हूँ. दूसरी ओर, आपके किसी भी जवाब के सम्बन्ध में मैं चिंतित हूँ कि आप महसूस करें कि प्रधानमंत्री के प्रश्न में वह अत्यन्त गहरा सम्मान समाहित है जो यहूदी लोग अपने किसी भी बेटे पर न्यौछावर कर सकते हैं। व्यक्तिगत सम्मान के इस तत्व के साथ, हमारी यह भावनायें भी शामिल हैं कि इज़राइल अपने भौतिक क्षेत्रफ़ल में भले ही एक छोटा सा राज्य है, लेकिन यह महानता के उस स्तर तक उदित हो सकता है जिस स्तर का यह आध्यात्म और बौद्धिक परंपराओं की सर्वोत्कृष्ट ऊँचाई का एक उदाहरण है, जिसे यहूदियों ने अपने बेहतरीन दिमागों और दिलों के ज़रिये पुरातन काल और आधुनिक काल में स्थापित किया है।

जैसा कि आप जानते हैं, हमारे पहले राष्ट्रपति ने हमें इन्हीं महान दृष्टिकोंणों के साथ प्रारब्ध की ओर देखना सिखाया है, आप स्वयं भी  हमें ऐसा करने के लिये प्रेरित करते रहते हैं।
अतएव, इस प्रश्न का जैसा भी जवाब हो, मुझे आशा है कि आप उनके बारे में उदारता से सोचेंगे जिन्होंने यह प्रश्न आपसे पूछा है, और उन  उच्च उद्देश्यों और मंशाओं की प्रशंसा करेंगे जिन्होंने जन-इतिहास के इस गंभीर समय में उन्हें आपके बारे में सोचने के लिये उत्साहित किया है।


व्यक्तिगत शुभकामनाओं सहित,

अब्बा एबन
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आइंस्टाइन का उत्तर:


हमारे इज़राइल राज्य के इस प्रस्ताव से मैं गहरे तक द्रवित महसूस कर रहा हूँ, और एक क्षण के लिये दुखी और शर्मिंदा भी हुआ हूँ कि मैं यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सकता। पूरे जीवन भर मेरा सरोकार वस्तुनिष्ठ मामलों से रहा है, अतः मुझमें लोगों से व्यवहार स्थापित करने और शासकीय कार्य सम्हालने की प्राकृतिक योग्यता और अनुभव दोनों की कमी है। अतएव, मैं इस महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिये एक अनुपयुक्त उम्मीदवार हूँ। वैसे, मेरा बुढ़ापा मेरी क्षमताओं को कुछ हद तक सीमित नहीं करता, इन कारणों से मैं खुद को इस महान जिम्मेवारी को पूरा करने वाला उपयुक्त उम्मीदवार नहीं समझता।

मैं इन परिस्थितियों से भी बहुत अधिक विचलित हूँ कि जब से मुझे दुनिया के देशों के बीच हमारी संदिग्ध स्थिति होने के बारे में पता चला है, मेरे सबसे मज़बूत मानवीय बन्धन वाले रिश्ते यहूदी लोगों से रहे हैं। 

जो इंसान पिछले वर्षों की कठिन और दुःखद परिस्थितियों के साथ, अपने कन्धों पर हमारी स्वतंत्रता के संघर्ष के नेतृत्व का बोझ ढोता रहा, उसको खोने के बाद, मैं तहे-दिल से यह कामना करता हूँ कि आपको अपने जीवन के कार्यों और व्यक्तित्व वाला ऐसा इंसान मिले जो इस कठिन और ज़िम्मेदाराना कार्य को सम्हालने का साहस उठा सके।

आपका-

प्रोफ़ेसर अल्बर्ट आइंसटीन
प्रिंसटन न्यू जर्सी
18 नवम्बर, 1952