मानहानि


अनूप शुक्ल 
आजकल मानहानि का दौर चल रहा है। बेइज्जतियों की भगदड़ मची हुई है। जिसे देखो वही लपका जा रहा है अदालत की तरफ़। मानहानि का दावा पेश करने के लिये। अदालतों की भी नाक में दम हुआ पड़ा है। एक से एक चिरकुट लोग अपनी मानहानि का मुकदमा धाँसे पड़े हैं अदालतों में। हाल यह कि जो जितना बड़ा चिरकुट उसका उतना ही बड़ा मानहानि का दावा। मतलब हर मानहानि का दावा दावावीर की चिरकुटई की मात्रा के समानुपाती है।

अदालतें हलकान हैं। व्यस्तता के आँसू रो रही हैं। उनका भी मन करता होगा- 'कोई अदालत हो जहाँ वे अपनी इस बेइज्जती के खिलाफ़ दावा कर सकें।'

मानहानि पर कुछ कहने से पहले इसका मतलब तय कर लिया जाये। मानहानि से मोटा मतलब निकलता है कि कोई व्यक्ति जैसा खुद को समझता है, कोई दूसरा व्यक्ति उसको उससे अलग बताये। उदाहरण के लिये कोई अपने को ईमानदार समझता है। समाज में भी अपनी ईमानदारी का भौकाल बनाये हुये है। ऐसे किसी व्यक्ति को कोई सरेआम बेईमान कह दे। लाखों, करोड़ों के घपले का इल्जाम लगा दे। अगला इस इल्जाम को बजाय दिल्लगी के गम्भीरता से ग्रहण कर ले। फ़िर हल्ला मचा दे- 'हमारी मानहानि हो गयी।' अदालत में मानहानि का दावा करने की धमकी दे दे। इसके बाद मानहानि का दावा कर भी दे। बस शुरु हो गया मानहानि का मीटर। 
दुनिया में जित्ते भी बड़े काम हुये सबमें मानहानि का योगदान है। सत्यनारायण की कथा में देवता को लगा उसकी मानहानि हुई। देवता रूठ गये। दुःखवर्षा कर दी भक्त पर। फ़िर जजमान ने उनको पटाया। मान दिया। मत्ता दिया। प्रसाद चढ़ाया। देवता खुश हो गये। भक्त के अच्छे दिन बहाल कर दिये।

ऋषिगण जहां अपमान महसूस हुआ नहीं कि फ़ौरन कमंडल से पानी छिड़ककर शाप जारी कर देते थे। पुराने-जमाने में राजा-महाराजाओं को जैसे ही कहीं से अपनी मानहानि की भनक मिली, वैसे ही हमले की पिपिहरी बजा देते थे। बदनामी से बरबादी भली। भले ही इतिहास की किताब में भी जगह न मिले लेकिन मानहानि के महल में रहना गवारा नहीं।

मानहानि के इतने प्रकार होते हैं कि उनको शब्दों में बयान करना मुश्किल है। 'अविगत गति कछु कहत न आवे' टाइप मामला होता है। गणित में कहा जाये तो मानहानि के प्रकारों की संख्या दुनिया के कुल लफ़ड़ों की संख्या से एक अधिक होती है। कहने का मतलब कि संसार में अगर 100 तरह के लफ़ड़े हैं तो मानहानि के प्रकार 101 होंगे। सूत्र रूप में कहें तो Y=X+1 (यहां X= दुनिया के कुल लफ़ड़े, Y=मानहानि के प्रकार) 
बेइज्जती के प्रकारों की गणित के पायजामें में घुसेड़ने के बाद आइये आपको मानहानि के कुछ पहलू दिखाते हैं। समझने में आसानी होगी आपको।

मानहानि जो है न वह लक्ष्मी की तरह चंचला होती है। कब किस रूप में हो जाये पता नहीं चलता। सीधी मानहानि का उदाहरण हमने आपको ऊपर बताया जिसमें किसी ईमानदार को बेईमान बता दिया जाये। उल्टी मानहानि भी होती है। जैसे किसी अरबों के घोटालेबाज को टिकियाचोर बताया जाये। पूरी दुनिया में जिसके हरामीपने का डंका पिटता हो उसको गली मोहल्ले के छिछोरेबाज की तरह बताया जाये। मानवमांसभक्षी ईदी अमीन की तुलना खेल-खेल में एक-दूसरे को नोच लेने वाले बच्चों से की जाये। 

साहित्यिक हलकों में भी उलटी मानहानि के नमूने मिल सकते हैं। अपने लेखन की खुद ही प्रशंसा करने वाले को कवि भूषण के समान बताया जाये। विसंगति की शिकायत करने पर समझाइश दी जाये -’अरे भाई, भूषण जी तो सिर्फ़ कवि थे। आप तो भूषण और शिवाजी/छत्रसाल के कम्बो पैकेज हो। मतलब वीर भी खुद वीर के चारण भी खुद।’ अगला इतने पर मान जायेगा। न माने तो उसको उसकी विधा का देवता घोषित करके गेंदे की माला पहना दी जाये। अगला बेचारा ’स्तुति-स्नेह-सरोवर’ में छप्पछैंया करते आशीष देने के अलावा और कुछ कर भी न पायेगा। 

आजकल पैसे ने मानहानि के पाले में कबड्डी खेलना शुरु कर दिया है। करोड़ों के दावे होते देख बाजार मानहानि के हलके में प्रवेश करने के लिये अंगड़ाई ले रहा है। बड़ी बात नहीं कल को बाजार में मानहानि कराने और उससे निपटने के पैकेज आ जायें। बाजार में बेइज्जती करवाने और उसके बाद मानहानि का दावा पेश करने की स्कीमें चलने लगें। मेडिको-लीगल केस की तर्ज पर मानहानि-लीगल वकीलों के अलग बस्ते खुल जायें। बाजार की कुछ स्कीमें इस तरह की हो सकती हैं-
1. घर बैठे बेइज्जती करायें। मानहानि का दावा करें। तुरंत भुगतान पायें। 
2. बिना बेइज्जती के मानहानि दावा करें। भुगतान दावा पाने के बाद।
3. मनचाही मानहानि करायें। भुगतान किस्तों में। कैसलेस सुविधा उपलब्ध।
4. बेइज्जती में इज्जत का एहसास। आपके घर के एकदम पास। सुविधायें झकास।
5. बिना पिटे पिटने का एहसास पायें। मानहानि का दावे के लिये प्रमाण पायें।

मानहानि का बाजार चल निकलने के बाद तरह-तरह की मानहानि और उससे निपटने के तरीके बाजार में चल निकलेंगे। तरह-तरह से मानहानि करने के तरीके बताये जायेंगे जिससे आदमी की इज्जत भी उतर जाये और अगला प्रमाणित भी न कर पाये कि उसकी बेइज्जती हुई है। कुछ-कुछ गांधी डिग्री वाली पुलिस की पिटाई की तरह जिसमें पिटने वाला चोट को जिन्दगी भर महसूस भले करे लेकिन साबित नहीं कर सकता कि वह पुलिस-प्रेम का शिकार हुआ है।

आप किसी ख्यातनाम लेखक से कह सकते हैं जित्ता खराब आप लिखते हैं उससे ज्यादा खराब तो मैं अपने बायें हाथ से लिख सकता हूं। लेखक अगर इसको अपनी मानहानि समझता है और अदालत में घसीटने की धमकी देता है तो आप उसको समझा सकते हैं कि - 'आपके समझने में गलती हुई। मैं तो आपके लेखन की तारीफ़ कर रहा था। मैं बायें हाथ से लिखता हूं। मेरे कहने का मतलब यह था कि मैं कितना भी अच्छा लिखूं लूं पर वह आपके लेखन से खराब ही होगा।'

मानहानि महसूस होने पर होती है। मानो तो मानहानि। वर्ना आम बात। वो सेल्स मैन वाला किस्सा आपने सुना होगा। एक सेल्समैन ने कुछ दिन की सेल्समैनी के बाद त्यागपत्र दिया। उससे दुकान मालिक ने नौकरी छोड़ने का कारण पूछा-’ क्या बात है? तन्ख्वाह कम है? कोई शिकायत है?’ नौकरी छोड़ने वाले ने कहा-’कोई शिकायत या पैसे की बात नहीं लेकिन सेल्समैनी में ग्राहक जिस तरह बात करते हैं उससे बेड़ी बेइज्जती महसूस होती है।’ मालिक ने बड़े आश्चर्य के साथ कहा- 'यार ये तुमने नई बात बताई। हमने भी जिन्दगी भर सेल्समैनी की है। हमको लोगों ने गालियाँ दी, दफ़ा हो जाने के लिये पीटने की धमकी दी, कुछ ने अमल भी किया लेकिन हमारी बेइज्जती आज तक नहीं हुई।'

अपने देश की आम जनता भी इसी दुकान के मालिक की तरह है। तरह-तरह के लोग इसको धोखा देते हैं, सेवा करने के नाम पर ठगते हैं, लूटते हैं, हाल-बेहाल करते हैं लेकिन जनता इसे अपनी मानहानि नहीं मानती। वह सोचती है यह तो आम बात है। 

आपको इत्ता पढ़ना पड़ा बेफ़ालतू में। कहीं आपकी शान में तो कोई गुस्ताखी नहीं हुई! मने पूछ रहे हैं। हो तो बता दीजियेगा। किसी की मानहानि करने का अपना कोई इरादा नहीं है।

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