इक बिरहमन ने कहा है ...

इक बिरहमन ने कहा है, के ये साल अच्छा है ... 


सेतु के पाठकों, उनके परिजनों, और मित्रों को नववर्ष की मंगलकामनाएँ!



इक और साल गुज़रा बला टली यारों, 
जितना कट जाये, बबाल अच्छा है ...

यह तो हुई मज़ाक की बात शायरे-अज़ीम से क्षमायाचना के साथ। ज्ञातव्य है कि ऋतुयें आती-जाती हैं,  कालचक्र चलता रहता है। जीवन की भंगुरता को समझते हुए भी हम अमृत्व की कामना करते हैं, स्थायित्व के स्वप्न देखते हैं। अपने आज को बीते कल से बेहतर बनाने के विचार में न केवल बुद्धिमता है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों का हित भी अपेक्षित है। परिवर्तन अवश्यम्भावी है, हम उसे रोक तो नहीं सकते लेकिन हमारे संकल्प परिवर्तन की दिशा को प्रभावित अवश्य कर सकते हैं।

नववर्ष की पूर्वसंध्या पर जहाँ बहुत से लोग नये संकल्प लेते हैं, वहीं यह समय पिछले संकल्पों के अवलोकन, जाँच, और मूल्यांकन का भी है। आइये हम सब अपने संसार को पहले से बेहतर बनाने में यथासम्भव योगदान देने का संकल्प लें। हमारा थोड़ा-थोड़ा सा सहयोग भी बूंदों की तरह मिलकर एक सागर बनाने की क्षमता रखता है। चलना ही काफ़ी नहीं, गति की दिशा का निर्धारण भी महत्वपूर्ण है। यदि हम सब अपनी-अपनी मर्ज़ी से अनियमित दिशाओं में चलते रहे तो शायद ही कहीं पहुँचें। मिलकर काम करने में सबका हित जुड़ा है। एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं।

एक-एक अंक करके इस अंक को मिलाकर सेतु के 19 अंक आपके सामने आ चुके हैं। जाते-जाते यह साल एक खुशखबरी और दे गया है। अब हिंदी साहित्य की सबसे विशाल परियोजनाओं में से एक कविताकोश पर सेतु के सभी पिछले अंकों के पीडीएफ़ संस्करण डाउनलोड के लिये उपलब्ध हैं। नये अंकों के पीडीएफ़ भी नियमित समयांतराल पर वहाँ उपलब्ध कराये जाते रहेंगे।  

भारतीय परम्परा, उल्लास, पर्व, और उत्सवों की परम्परा है। हमारे नववर्ष समारोह एक जनवरी तक सीमित नहीं। उसके बाद भी भारतीय पंचांगों के अनुसार कई नववर्ष आरम्भ होंगे और वर्षपर्यंत चलते रहेंगे। हर वर्ष की भाँति सन् 2018 के आरम्भ में दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह विश्व हिंदी सम्मेलन का वर्ष भी है, इस वर्ष का आयोजन मॉरिशस में होने वाला है। इनके अतिरिक्त जनवरी में हिंदी का एक और उत्सव भी होना है। 10 जनवरी, 2006 को पहली बार 'विश्व हिंदी दिवस' का आयोजन किया गया था। तब से हर वर्ष यह दिन संसार भर में मुख्यतः भारतीय सरकारी संस्थानों में नियमित रूप से मनाया जाता है। यदि सम्भव हो तो आप भी इस उत्सव में भाग लीजिये।

सेतु द्वारा इस वर्ष आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी लघुकथा प्रतियोगिता में अब तक सवा सौ से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हो चुकी हैं। यह अंक आपके सामने आने तक इस प्रतियोगिता की समय सीमा समाप्त हो चुकी होगी। प्रतियोगिता नियमों के अनुकूल पाई गई सभी प्रविष्टियों का मूल्यांकन निर्णायकों द्वारा अगले मास से आरम्भ किया जायेगा।  एक सफल आयोजन के लिये सभी सहयोगियों का हार्दिक धन्यवाद तथा रचना भेजने वाले लेखकों को शुभकामनाएँ।

सभी स्थाई स्तम्भों के साथ, इस अंक में आप सभी के वाचन, विचार-मंथन, जानकारी, तथा मनोरंजन के लिये भरपूर सामग्री है।

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा

2 comments :

  1. आदरणीय शर्मा साहब,
    सादर अभिवादन।
    सेतु दिसम्बर -2017 का सम्पादकीय बहुत ही सटीक प्रेरक लगाा । आपने सच ही लिखा है-‘‘चलना ही काफ़ी नहींए गति की दिशा का निर्धारण भी महत्वपूर्ण है’’ आपको साधुवाद। पूरा अंक अभी नहीं पढ़ पाया हूँ। पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया दूंगा।

    सादर आपका ही-
    डाॅ.दिनेश पाठक‘शशि’
    28 सारंग विहार,मथुरा-281006

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हार्दिक आभार शशि जी!

      Delete

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।