Multilingual Poetry :: बहुभाषी काव्य

बहुभाषी काव्य, पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी में - ਰਾਮੇਸ਼ਵਰ ਸਿੰਘ - रामेश्वर सिंह
Multilingual Poetry (Punjabi, Hindi, and English) by Rameshwer Singh
Rameshwer Singh : रामेश्वर सिंह

ਨਹੀਂ ਦਿਖਦੇ ਕੀਤੇ ਭੀ !

ਸੁਣ ਮਾਲੀ,
ਕਿੱਥੇ ਹਨ ਸਾਡੇ ਓ ਪਿਆਰੇ ਫੂਲ
ਜੋ ਅਜੇ ਤਕ ਥੇ ਖਿਲਦੇ ।
ਮਹਿਕ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਬਸਦੀ ਦਿਲਾਂ ਵਿਚ
ਓ ਤਾਂ ਹੁੱਣ ਨਹੀਂ ਦਿਖਦੇ !

ਥਕ ਗਏ ਪੈਰ ਮੇਰੇ
ਚਲਦੇ ਚਲਦੇ,
ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਲੱਭਦੇ ਲੱਭਦੇ
ਏਹਸਾਸ ਹੀ ਹੈ ਬਸਦਾ ਦਿਲਾਂ ਵਿਚ
ਓ ਤਾਂ ਹੁੱਣ ਨਹੀਂ ਦਿਖਦੇ ।

ਸੁਣ ਮਾਲੀ,
ਪਤਾ ਨਹੀਂ, ਪਰ ਲਗਦਾ ਹੈ
ਤੁਹਾਡੇ ਵੇੜੇ ਹੁੱਣ
ਯੇ ਫੂਲ ਹੈ ਮਿਲਦੇ ।

ਰੂਹਾਨੀ ਪਰ ਮੁਸ਼ਕਲ ਰਾਹ ਤੇ
ਸਦਾ ਚਲਦੇ ਕਦਮ ਮੇਰੇ
ਚਲਦੇ ਹੀ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ ।

ਤੁਹਾਡਾ ਬਾਗ ਲੱਭਦੇ ਲੱਭਦੇ
ਜਿੱਥੇ ਹੁੱਣ ਯੇ ਫੁੱਲ ਹੈ ਮਿਲਦੇ ।

....................

नहीं दिखदे किते भी !

सुण माली,
किथे हन साडे ओ प्यारे फूल
जो अजे तक थे खिलदे ।
महक उना दी बसदी दिलां बिच
पर ओ तं हुण नहीं दिखदे !

थक गए पैर मेरे
चलदे चलदे,
उना नु लबदे लबदे
एहसास ही है बसदा दिलां बिच
ओ तं हुण नही दिखदे।

सुण माली,
पता नहीं, पर लगदा है
तुहाडे वेड़े हुण
ए फूल है मिलदे ।

रूहानी पर मुश्किल राह ते
सदा चलदे कदम मेरे
चलदे ही जा रहे हन ।

तुहाडा बाग़ लबदे लबदे
जिथे हुण ए फूल है मिलदे ।
...................


अब कहीं नहीं दिखते !

सुन माली,
कहाँ गए हमारे वे प्यारे फूल
जो अब तक थे खिलते !
बस यादों की खुश्बू उनकी,
वे कहीं नहीं दिखते।

थक गए पांव मेरे
दिन बीतते,रात ढलते
चलते चलते
उन्हें ढूंढते ढूंढते ।
बस एहसास उनका,
वे कहीं नहीं दिखते ।

सुन माली,
लगता है मुझे
पर पता नही,
तुम्हारे प्रांगण में ही
हमसे बिछड़े फूल है मिलते ।
अलौकिक पर दुर्गम यात्रा पर
सदा चलते कदम मेरे
चलते ही जा रहे ।

तुम्हारा बाग़ ढूंढते ढूंढते
जहाँ अब ये फूल है मिलते ।
...................

Where These Flowers Can Be Seen!

My ever walking feet
Climb a path so steep
Looking for the garden
My passion so deep !

Oh tell me,
Great Gardener,
Where,oh where,
Have disappeared
Our beloved ones,
Once plucked by you
Nowhere to be seen.

My ever walking feet
Climb a path so steep
Looking for the garden
My passion so deep !

Somewhere in the
Mystic Universe,
You have a Divine Garden,
I think, not know,
Where  these flowers can be seen.

My ever walking feet
Climb a path so steep
Looking for the garden
My passion so deep !

It would be
A blissful journey though tortuous,
So as to reach your abode
Where
These beloved flowers,
You,the Great Gardener,
And I would meet.

My ever walking feet
Climb a path so steep
Looking for the garden
My passion so deep!

सेतु, जनवरी 2018 # काव्य # Poetry # Setu, January 2018

1 comment :

  1. सिर्फ़ एक कविता से क्या होगा? कवि के रूप में रामेश्वर सिंह को जानने के लिए इनकी कम से कम आठ-दस कविताएँ तो देनी ही चाहिए। एक कविता देकर तो आप लोग, बस, ख़ानापूरी कर रहे हैं।

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