आँखें - दो कविताएँ

अमलेन्दु अस्थाना

वरिष्ठ उपसंपादक, दैनिक भास्कर, पटना

आँखों की भाषा - 1

जब भावनाएँ अंतिम सीमा तक जाकर थक जाएंगी,
शब्दकोश का अंतिम शब्द भी खर्च हो चुका होगा,
अभिव्यक्ति के सारे रास्ते बंद हो चुके होंगे,
तब मेरी आँखें एकटक देखेंगी तुम्हें,
इस इंतजार में कि तुम शायद समझ सको
मेरी आँखों की भाषा।।

आँखों की भाषा - 2

जब गहन शोर होगा,
शब्द आपस में टकराकर फूट रहे होंगे,
तब भीड़ का सबसे उदास चेहरा,
अपनी आँखों से बयां कर देगा सब कुछ।।

3 comments :

  1. Very well written. Eyes do tell a lot...

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    1. Thank U so much for appreciating my words

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    2. Thank U for appreciating my words my feelings

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