अभिमन्यु अनत - एक युग का अंत

अभिमन्यु अनत
9 अगस्त, 1937 :: 5 जून 2018
हिंदी भारत की सर्वप्रमुख भाषा है। लेकिन भारत के बाहर भी हिन्दी का एक भरा-पूरा संसार बसता है। और उस संसार को यदि किसी एक व्यक्ति के रूप में निरूपित करना हो तो नि:संदेह एक ही नाम जिह्वा पर आता है - अभिमन्यु अनत। भाग्यशाली हूँ कि आप्रवासी हिंदी साहित्य सृजन सम्मान के बहाने अनत जी के आवास 'सम्वादिता' पर उनसे सपरिवार मिलने का अवसर मिला। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

प्रस्तुत वार्षिकांक के साथ सेतु ने अपने प्रकाशन के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर लिया है। एक विनम्र आरम्भ से यहाँ तक की यात्रा आप सबके सहयोग के बिना सम्भव न थी। हिंदी व अंग्रेज़ी संस्करणों को मिलाकर कुल 106 रचनाओं के साथ यह सेतु द्वैभाषिक का अब तक का सबसे बड़ा अंक है।

सेतु में प्रकाशन के उद्देश्य से सेतु को भेजी गई रचनाओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इनमें से कई रचनाएँ पूर्वप्रकाशित होने, या यूनिकोड में न होने के कारण हम उनके प्रयोग में असमर्थ हैं। कृपया ध्यान रखें कि सेतु को केवल स्वरचित, मौलिक, व अप्रकाशित रचना ही भेजें। और इस आशय की घोषणा रचना भेजने वाली ईमेल में अवश्य करें। रचना भेजने से पहले कृपया एक बार प्रूफ़रीड करके सामान्य व्याकरण त्रुटियाँ हटा दें। रचनाओं में विराम चिह्न तथा अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप का प्रयोग वाँछित है। इस सम्बंध में सहायता के लिये कृपया सही लिखें आलेख ध्यान से पढ़ें। रचना भेजने के नियमों का सारांश निम्न है:
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शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा


3 comments :

  1. प्रिय अनुराग शर्मा जी,

    सेतु के दो सफल और उपयोगी वर्षों की उपलब्धियों का साक्षी यह अंक प्राप्त हुवा.
    इतने कम समय में सेतु ने दोनों माध्यमों में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है. निश्चय ही
    आपका ओर आपके सम्सपादकीय सहयोगियों के अनथक परिश्रम व लगन के बिना यह
    संभव नहीं था. यह प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है. मेरी बधाई और शुभकामनायें.

    चन्द्रमोहन भंडारी

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    1. 🙏 आभार भंडारी जी

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  2. सेतु के बढते कदमों को नमन ।संपादकीय से लेकर अंत तक के लेख समय समय पर पढता हूँ। सेतु मेरी मनपसंद पत्रिका बन गईहै। हर माह प्रतीक्षा में रहता हूँ। संपादकजी को बधाई शुभकामनाएँ ।

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