व्यवस्था परिवर्तन: नफे सिंह कादयान

नफे सिंह कादयान
   पृथ्वी को भ्रष्टाचार, आतंकवाद, हत्या, बलात्कार, चोरी-डकैतियों, गरीबी और युद्धों से मुक्त कर और भी सुंदर प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है। इसका मूलमंत्र है ‘शक्ति विभाजन, पारदर्शिता और जवाबदेही।’

    प्रशासक निरंतर अपने प्रशासनिक शक्ति समूहों के माध्यम से जनहित की भलाई के लिये प्रयासरत रहते हैं मगर फिर भी व्यवस्था में परिवर्तन की संभावनाएँ हमेशा बनी रहती हैं। भारत सहित विश्व के अन्य शक्ति समूहों की प्रशासनिक व्यवस्था के सामने कुछ बड़ी समस्याएँ हैं जिनमें भ्रष्टाचार, अव्यवस्था, असामाजिक तत्व एवम् युद्धजन्य अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष प्रमुख हैं। मेरा मानना है कि इन समस्याओं के कारण ही विश्व में भूख, गरीबी है, और इनके गर्भ से ही आतंकवाद, चोरी, डकैतियाँ, बलात्कार, हत्याओं जैसे संगीन जुर्म निकलते हैं।

    समस्या है तो उसका समाधान भी है। कोई ऐसी कारगर विधि होनी चाहिये जिससे पृथ्वी पर मानव समूहों में व्याप्त भ्रष्टाचार, आतंकवाद, हत्या, बलात्कार, गरीबी और अंतर्राष्ट्रीय युद्धों जैसी अनेक समस्याओं से निजात मिल सके। तेजी से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित कर अनियंत्रित रूप से फैल रही मानव कालोनियों को बहुमंजिला इमारतों में बसाया जा सके, भोजन, पानी, वायु न्यूनतम श्रम से सभी को उपलब्ध हो, पेड़-पौधों, फल-फूलों के साथ भयमुक्त खुले वातावरण में हमारी आने वाली पीढियों का बसेरा हो, और हम सभी पूरी पृथ्वी पर बिना किसी वीजा-पासपोर्ट के घूमने के लिये स्वतंत्र हों। बहुत ही सोच-विचार के बाद एक युक्ति मेरे दिमाग में आई है जिससे भ्रष्टाचार, आतंकवाद, हत्या, बलात्कार, चोरी-डकैती, गरीबी व अंर्तराष्ट्रीय युद्धों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह युक्ति है 'शक्ति विभाजन, पारदर्शिता और जवाबदेही। ये तीन मंत्र ऐसे हैं अगर इनका उपयोग सही तरीके से हो जाता है तो एक ऐसे नये मानव समाज की स्थापना हो जाएगी जिसमें हम सभी भयमुक्त वातावरण में जीवन व्यतीत कर सकेंगे।


    आजादी से अब तक अनेक राजनीतिक पार्टियों के शासन आए हैं। सभी ने अपने हिसाब से कुछ न कुछ सुधार किये हैं जिसकी वजह से हमारे देश भारत ने बहुत तरक्की की है। आम आदमी, गरीब, दलित, वंचितों के जीवन में भी व्यापक सुधार हुआ है मगर अभी भी अनेक क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। अभी (2018) वर्तमान शासन में राजनेताओं की छवि भ्रष्टाचार मुक्त बनी हुई है। कोई ऐसा मामला सुर्खियों में नही है मगर निचले स्तर पर भ्रष्टाचार अभी भी बना हुआ है। ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगमों, सरकारी विभागों, अनुदान प्राप्त संस्थाओं में निरंतर भ्रष्टाचार की खबरें अखबारों, टी.वी. चैनलों पर आती रहती हैं। मेरा मानना है कि देश की ग्राम पंचायतों, नगर पालिकाओं और अन्य सभी सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं में व्याप्त
भ्रष्टाचार से निजात दिलाने के लिए केवल एक ही अचूक मंत्र है। और वो है - शक्ति विभाजन, पारदर्शिता और जवाबदेही।

     मैं भारत सहित सभी देशों के नीति-निर्धारकों, शासकों से विनम्र निवेदन करता हूँ कि भ्रष्टाचार, अव्यवस्था, आतंकवाद एवं युद्धजन्य अंर्तराष्ट्रीय संघर्षों के निदान के लिए मेरे निम्रलिखित 35 उपायों को कार्यान्वयन किया जाए-

1- भ्रष्टाचार निवारण के लिये इन्टरनेट का प्रयोग।
   इन्टरनेट भ्रष्टाचार मिटाने के लिए वरदान साबित हो सकता है इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के गोपनीय मामलों को छोड़कर बाकी सभी पंचायतों, नगर पालिकाओं, विधायकों, राज्य सभा सदस्यों, मंत्रियों कों मिलने वाली ग्राटों, सरकार से अनुदान लेने वाली गैर सरकारी संस्थाओं, ट्रस्टों  व अन्य सभी प्रकार के सरकारी संस्थानों के कार्यों, खर्चों का पूरा ब्योरा जिला स्तर पर सरकारी वेब साइटों पर डलवाने का प्रबंध किया जाए। गाँव/शहरों में कहाँ क्या-क्या बनवाया जा रहा है, कितने मजदूर, मिस्त्री व अन्य कामगार लगाए जा रहे हैं। उनके नाम पते, दी जाने वाली मजदूरी का विवरण, साइटों पर डाले जाएँ। ईंट, बजरी, रेत, सीमेंट, सरिया कहाँ किस रेट पर लिया गया, इसका सही ब्योरा सरकारी वेब साइटों पर डाला जाए।

     इसके अलावा गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ किस किस व्यक्ति को दिया गया है, किस को प्लाट दिया गया है किस को कालोनी, मकान मरम्मत शौचालय के पैसे दिए गए हैं। ऐसे सभी प्रकार के छोटे-बड़े विवरण सरकारी वेब साइटों पर डाले जाएँ। अभी सरकार मनरेगा जैसे कुछ कार्यों का विवरण साईटों पर डालने लगी है मगर पूरी जानकारी नही डाल रही। कई जगह कार्य देखने के लिए साइट पर पासवर्ड डालने होते हैं जिनके बारे आमजन को कुछ मालूम नहीं है। मनरेगा मजदूरों के नाम लिखे गए हैं उनके पिता का नाम, मकान नम्बर नहीं है, कई व्यक्ति एक ही नाम के होने के कारण पता ही नहीं चलता कि किसने काम किया है, फर्जी है या सही है।

  2- संस्थानों में भ्रष्टाचार निवारण के लिये शक्ति विभाजन, पारदर्शिता और जवाबदेही।
  देश के सभी गाँवों के हर वार्ड में सात या ग्यारह सदस्यों पर आधारित वार्ड कमेटियाँ बनाई जाएँ। वर्तमान व्यवस्था में हर वार्ड में केवल एक ही पंच है। कमेटियाँ ही सर्वसम्मति या चुनाव द्वारा अपने लिए सरपंच चुनाव करें जैसा की ब्लॉक समिति सदस्य, नगर पालिका और सासंद अपने लिए प्रधान चुनते हैं। शहरों की नगर पालिकाओं का भी इसी प्रकार से विस्तार किया जाये। वार्ड में सदस्यों की संख्या एक से बढ़ाकर सात की जाए।

 3- बैठकें।
  पंचायती संस्थानों में सभी सदस्यों को मिला कर बनने वाली ग्राम/शहरी सभा की हर महीने अनिवार्य बैठक  करवाई जाए। वर्तमान में किसी भी गाँव/शहर में ग्राम सभा की बैठक नही होती, केवल कागजी खानापूर्ति कर दी जाती है। इसी प्रकार शहरी नगर पालिकाओं व अन्य सरकारी अनुदान प्राप्त संस्थाओं की भी अनिवार्य मासिक बैठक होनी चाहिये।

 4- विकास कार्य।
   ग्राम सरपंच, नगर पालिका प्रधान सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं के प्रधान हर प्रकार के विकास व अन्य कार्य अपने वार्ड सदस्यों की सलाह लेकर बहुमत के आधार पर करें। सभी कार्यों की रूपरेखा मासिक बैठक में विचार विमर्श द्वारा तय की जाए।

 5-विकास कार्यों के ब्योरे।
 पंचायत व अन्य संस्थाओं की आय, सभी कार्यों पर हुए खर्चों के पूरे ब्योरे मासिक बैठक में सरपंच, पंचायत सचिव, संस्थाओं के अन्य प्रधानों द्वारा सभी सदस्यों को पढ़ कर सुनाए जाएँ। ब्योरे की एक एक फोटो कॉपी आमजन के लिए वार्ड सदस्यों को भी दी जाए। वार्ड सदस्यों के माध्यम से सभी लोगों को पंचायत व अन्य संस्थाओं की गतिविधियॉं देखने का अधिकार दिया जाए।

 6-उप-चुनाव।
 पंचायत और अन्य संस्थाओं के सदस्यों को सरपंच, अपने प्रधानों के कार्यों से संतुष्ट न होने पर उन्हे कभी भी दो तिहाई बहुमत से हटा कर उसके स्थान पर नये सरपंच, नगराधीश और अन्य प्रधानों को चुनने का अधिकार  दिया जाए। वार्ड की जनता को भी बहुमत से अपने पंचायत सदस्यों को बदलने का अधिकार दिया जाए।

 7-मासिक वेतन।
  पंच, सरपंचों, नगर पालिका सदस्यों और अन्य संस्थागत प्रधानों को मानदेय की बजाए  सांसद, विधान सभा सदस्यों की तरह उचित मासिक वेतन दिया जाए। वर्तमान में सरपंचों को बहुत ही कम मानदेय मिलता है जबकि उसे गाँव में आने वाले सरकारी कर्मचारियों के रोटी, चाय का प्रबंध तक करना पड़ता है।

 8-संसद मंत्रालय कमेटियाँ।
   देश के सभी मंत्रालयों को सांसद और विधान सभा सदस्यों द्वारा बहुमत के आधार पर चलाया जाना चाहिये। किसी एक मंत्रालय को सात सदस्यों पर आधारित कमेटी द्वारा चलाया जाए। जनहित के सभी निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाएँ। वर्तमान में किसी एक मंत्रालय या कई मंत्रालयों को एक ही मंत्री चलाता है। इसका मतलब तो ये है कि जनता के चुने हुए अन्य प्रतिनिधि बुद्धिहीन हैं।

 9- जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल।
  पंचायती संस्थानों, विधान सभा, लोक सभा और अन्य सभी संस्थागत जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल पाँच साल के लिये अस्थाई रूप में होना चाहिये। अगर वोट देकर सांसद व विधान सभा सदस्य बनाने वाली जनता को उनका कार्य पसंद नही आता तो वोट द्वारा ही कभी भी हटाने का अधिकार दिया जाए।

 10- जन-शासन।
  देश में लोकतंत्र के वर्तमान स्वरूप के बजाय जन-शासन को प्राथमिकता दी जाए। जनहित के सभी मामले लागू करने से पहले जनता की वोटिंग द्वारा राय लेकर ही उन्हें कार्यान्वयित किया जाए। वर्तमान इंटरनेट युग में ऑनलाइन वोटिंग भी करवाई जा सकती है। इसके लिए गाँव/शहरों की वार्ड कमेटियाँ अहम भूमिका निभा सकती हैं।

 11-सम्पतियों की जाँच।
  सरकारी कर्मचारियों, लोक सभा, विधान सभा सदस्यों, अनुदान प्राप्त संस्थाओं, न्यासों  के मालिकों की सम्पतियों की कम से कम पाँच साल में एक बार अनिवार्य जाँच की जाए। सभी अघोषित सम्पतियों को जब्त किया जाए और आय से अधिक सम्पति जमा करने वालों पर भष्टाचार का मुकदमा चला सजा दिलाई जाये।

12-कानून में संशोधन।
  कानून में संशोधन कर भ्रष्टाचार में दोषी व्यक्ति को चोरी के अपराधियों के समकक्ष सजा दी जाए और किसी भी संस्थान में मिली भगत से चलने वाली रिश्वतखोरी को संगठित अपराधों की श्रेणी में रख कर चोर डकैतों की तरह मुकदमे चला कर सजा दी जाए।

 13-भ्रष्टाचारियों की सूचना पर ईनाम।
  भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्तियों के बारे में सूचना देने वाले लोगों के लिए पूरे देश में न्यूनतम पचास हजार रुपये इनाम राशि की घोषणा की जाए और उसका नाम, पता गुप्त रखा जाए।

 14- कर्मचारियों का सम्मान।
  ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ सरकारी कर्मचारियों और अन्य संस्थागत प्रधानों, सदस्यों को देश के राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मानित किया जाए। उनके परिवारों को उनकी नियुक्ति स्थान के आसपास रखने का प्रबंध किया जाए या परिवार साथ रखने की इजाजत दी जाए। ऐसा प्रबंध भी किया जाए जिसमें बड़े ऑफिसर व नेता अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से अपने घरेलू कार्य न करा सकें।

 15- श्रमिकों के उत्थान के लिये।
   असंगठित क्षेत्र के जो लोग कल कारखानों या अन्य किसी भी प्रकार के संस्थानों मे कार्यरत हैं। सभी का श्रम विभाग या समाज कल्याण के स्थानीय कार्यालय मे पंजीकरण करवाया जाए। सभी कामगारों के स्थानीय बैंकों में जीरो बैंलस पर बैंक खाते खुलवाए जाएँ। जिनका पूरा ब्योरा श्रम विभाग की साईट पर डाल जाए। सभी संस्थानों के मालिकों से वर्करों का मासिक वेतन उनके बैंक खाते में जमा करवाया जाए। इस प्रकार सरकार के साथ पूरे देश को साइट पर पता रहेगा कि कौन किस को क्या वेतन दे रहा है। जो भी संस्थान मालिक सरकार द्वारा बनाए श्रम कानूनों का उल्लघन करे उसके लिए सख्त कारावास व दंड का प्रावधान होना चाहिये। वर्तमान में बहुत से संस्थान, मालिक अपने कर्मचारियों को दो-तीन हजार रुपये से भी कम वेतन दे उनसे बारह से चौदह घण्टे तक कार्य करवाते हैं।

 16-सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता।
  सभी सरकारी महकमों में होने वाली नई भर्तियों का पूरा डाटा, नाम, पता, योग्यता का पूर्ण विवरण सरकारी वेब साइटों पर डाला जाए। ग्राम/शहर के वार्ड से लेकर जिला स्तर तक शिक्षित बेरोजगार लोगों की योग्यता के आधार पर सूचियाँ बनाई जाएँ। सभी भर्तियों में योग्यता क्रमांक के हिसाब से नौकरियाँ दी जाएँ।

 17-कागजात के मकडज़ाल से छुटकारा।
 सरकारी कामों में लोगों को अनावश्यक लालफीताशाही के मकडज़ाल से बचाया जाए। लोगों की लाइनें लगवाने के बजाए सभी काम क्रमानुसार डाक द्वारा निपटाए जाएँ। राशन कार्ड, आधार कार्ड, नागरिकता प्रमाण पत्र और सभी प्रकार के पहचान पत्रों का एक ही कागज पर डाटा बनाया जाए। लोगों के जाति, आय, निवास, जन्म, मरण प्रमाण पत्र बनाने का कार्य गाँवों/ शहरों के वार्ड पंचों, नगर पालिका सदस्यों को सौंपा जाए।

 18-शिकायत पर कार्यवाई।
  उपभोक्ता द्वारा शिकायत करने पर ही किसी दूकानदार, रेहड़ी फड़ वाले, दूधियों व अन्य छोटे व्यवसाइयों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए। आजादी से अब तक  नकली, मिलावटी खाद्य पदार्थों की आड़ में छोटे गरीब लोगों को भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा लूटा जा रहा है। छोटे व्यवसाय करने वाले गरीब लोगों के धंधों पर रोक लगाने के बजाए उन पर उचित टैक्स लगाया जाए।

 19- गरीबों को आरक्षण का लाभ।
   जाति, धर्म पर आधारित सभी आरक्षण बंद कर इन्हें किसी भी परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर लागू किया जाए। किसी एक परिवार की आर्थिक स्थिति का आँकलन कर वार्ड स्तरीय सूचियाँ बनाई जाएँ। सरकारी काम-काज में किसी की जाति धर्म का उल्लेख न किया जाए।

 20-मौलिक अधिकारों का दायरा बढ़ाया जाए।
   सभी प्रकार के  रीति-रिवाज, जाति, धर्म, पहनने ओढने, अपने इष्ट देवों की पूजा करने, सैक्स करने, जीवन जीने, अपनी इच्छा से देह त्यागने के मामले में लोगों को पूरी तरह से स्वतंत्रता दी जाए। ये आमजन के निजी मामले होने चाहिये। दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा मिलकर किये गए ऐसे कार्य जायज होने चाहिये जिनसे किसी का अहित न हो।

 21-विविधता पूर्ण खेती।
  देश की कुल जनसंख्या की खाद्य जरूरतों का आँकलन कर किसानों से विविधता पूर्ण खेती करवाई जाए। एक दूसरे के साथ लगती जमीन वाले दो-तीन एकड़ भूमि वाले किसानों की कमेंटियाँ बना कर सामूहिक खेती करवाई जाए। उन्हें खेती के उपकरण दिये जाएँ।

 22-उपजाऊ भूमि की गणना।
  देश में कुल कितनी उपजाऊ भूमि है, कितनी हर वर्ष अधिगृहीत कर ली जाती है, जंगल, पेड़, गाय, भैसों जैसे दुधारू पशुओं की गणना कर ऐसे सभी आँकड़े सरकारी वेब साईटों पर डाले जाएँ।

 23-धारा रेखीय मार्ग।
  मैदानी इलाकों में सीधी धारा-रेखीय सड़कें बनाई जाएँ। देश के मध्य बिंदु को आधार बना कर लम्बे रोड बनाए जाएँ जिनके आस पास बहुमंजिली इमारतें बना कर उनमें अव्यवस्थित तरीके से फैलती जा रही मानव कालोनियों को बसाया जाए।

 24-उपजाऊ भूमि का व्यवसायीकरण बन्द किया जाए।
  देश में समकानून बना कर लाभ के लिए उपजाऊ भूमि का व्यवसायीकरण बन्द किया जाए। भूमि केवल कृषि व आवासीय आवश्यकताओं के लिए दी जाए। देश में अव्यवस्थित रूप से फैल रही मानव कालोनियों को बहुमंजिली इमारतों में बसा कर उपजाऊ भूमि को बचाया जाए।

 25-जर्जर इमारतें हटाना।
   देश में वर्षों से खाली पड़े सरकारी, गैर सरकारी रकबे पर या तो खेती करवाई जाए या पेड़-पौधे लगवाए जाएँ। ऐतिहासिक इमारतों को छोड़कर बाकी थाना, तहसीलों, अदालतों व अन्य सरकारी, गैर सरकारी पुरानी जर्जर इमारतों के मलबे को हटा कर उनके स्थान पर पेड़-पोधे लगाए जाएँ।

26-देशी फसलों का संरक्षण।
  देश में लुप्त होते जा रहे बबूल, शीशम, बरगद, सींबल, जांडी, सीरस जैसे अनेक प्रकार के वृक्षों को लगा कर लुप्त होने से बचाया जाए। साथ ही देशी टमाटर, घीया, बैंगन जैसी देशी सब्जियों को भी बचाया जाए।

 27-झुग्गी झोंपडियों में रहने वालों के लिये।
  पृथ्वी पर जो पैदा हुआ है उसे प्राकृतिक रूप से आवास बनाने व कार्य कर अपने बच्चों का पेट भरने का पूरा  हक है। ईश्वर किसी के नाम जमीनों की रजिस्ट्री नहीं करता इसलिए झुग्गी झोपडियों में रहने वालों, सड़कों के किनारों व फुटपाथों पर रेहड़ी खोखे लगाने वालों को हटाने के बजाए उन पर उचित मासिक या वार्षिक शुल्क लगाया जाए। अगर किसी रुकावट के कारण हटाना जरूरी हुआ तो उन्हें हटाने से पहले नई जगह दी जाए।

 28-सुरक्षा समूहों का गठन।
  आतंकवादियों, चोरों डकैतों, दंगा फसादियों, बलात्कारियों से निपटने के लिए सभी गाँव/शहरों मे वार्ड सुरक्षा समूह बनाए जाएँ। इनमें युवक, युवतियों को आत्म रक्षा के लिए हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाए। किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले उसके चाल-चलन के बारे में उसके निवास स्थान के अंतर्गत आने वाले वार्ड सदस्यों व आसपास के गणमान्य लोगों की राय ली जाए।

 29- वीटो पावर का खात्मा।
   संयुक्त राष्ट्र संघ का व्यवस्थित रूप से पुर्नगठन किया जाए। इसमें वीटो पॉवर, स्थाई, अस्थाई के लिए कोई स्थान नही होना चाहिये। हर एक देश को एक इकाई मान कर इसमें सभी देशों की सामूहिक शक्ति का प्रतिनिधित्व किया जाए। अर्थात अमीर गरीब सभी देशों को बराबरी का दर्जा दिया जाए।

 30- अंर्तराष्ट्रीय समस्याओं का निपटारा।
  सभी देशों की परस्पर होने वाली अंर्तराष्ट्रीय समस्याओं का निपटारा संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सर्वसम्मति या वोटिंग द्वारा बहुमत के आधार पर किया जाए। इसमे किसी एक देश को केवल एक वोट देने का अधिकार हो फिर चाहे वो बड़ा देश हो या छोटा। सभी के वोट की बराबर कीमत होनी चाहिये।

  31-सीमाओं का निर्धारण।
  विश्व के कर्णधारों द्वारा सभी देशों की सीमाओं का निर्धारण भी एक ही बार में जनमत से कर लिया जाए। अधिकतर युद्धात्मक संघर्षजन्य स्थितियाँ सीमाओं के कारण ही हो रही हैं, अत: इसका निपटारा पक्के तौर पर एक ही बार में हो जाना चाहिये, तभी मानव समूहों में स्थाई शांति आ सकती है।

 32-विश्व सेना का गठन।
 एक ऐसी विश्व सेना का गठन किया जाए जिसमें सभी देशों के सैनिक सम्मिलित हों। इस पर सामूहिक विश्व संगठन का नियंत्रण होना चाहिये। इसमे कोई एक देश अपने क्षेत्रफल के हिसाब से सैनिक भेजे। इससे आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा। युद्धों का अंत हो जाएगा। देशों मे भाईचारा बढ़ेगा और पूरी दुनिया एक परिवार मे बदल जायेगी।

 33- वैज्ञानिक अनुसंधान।
  विश्व के सभी वैज्ञानिकों को अलग-अलग देशों में अनुसंधान न कर एक ही जगह पर कुल मानवता की भलाई के लिए कार्य करना चाहिये। इसमे सभी देशों के सबसे योग्य वैज्ञानिक शामिल हों।

 34-ध्यान, योग, आत्म रक्षा के लिए ट्रेनिंग।
  लोगों को बचपन से ही ध्यान, योग, आत्म रक्षा के लिए ट्रेनिंग व कम से कम संसाधनों के इस्तेमाल से जीवन जीने की शिक्षा अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिये। किसी एक व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने के लिए कितने संसाधनों की आवश्यकता होती है इसका निर्धारण किया जाए। अनावश्यक संसाधनों पर रोक लगाई जाए। इससे एक नये प्रकार के अहिंसक परम मानव की श्रृंखला का निर्माण होगा। आतंकवाद व असामाजिक तत्व नही पनप सकेंगे। पशुवृति का अंत हो जाएगा। अत्यधिक संसाधन एकत्र करने की हवस का भी अंत होगा जिसके कारण व्यक्ति लोभ में फंसा है।

 35- पृथ्वी भ्रमण की आजादी।
  व्यक्ति गाँव, शहर, प्रदेश, देशों में नहीं रहता बल्कि पृथ्वी पर रहता है। ये सब आभासी वर्गीकरण है। पृथ्वी पर पैदा होने वाले सभी पृथ्वी वासी हैं इसलिये सभी को उसके धरातल के किसी भी भू-भाग पर बिना किसी वीसा पासपोर्ट के जाने पर कोई रोक न लगाई जाये।

(पुस्तक 'व्यवस्था परिवर्तन' का सार-संक्षेप, लेखक और प्रकाशक नफे सिंह कादयान द्वारा प्रस्तुत)

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