मेरे अनुरागी मन में ... 🙏 श्रद्धाञ्जलि योगेश

अनुराग शर्मा
इस अंक के साथ सेतु पत्रिका चार वर्ष पूर्ण कर चुकी है। जून 2016 से आरम्भ हुई यह यात्रा आप सभी के सहयोग से यहाँ तक पहुँची है। यह सम्पादकीय लिखते समय सेतु के अंतर्जाल पर 14 लाख 40 हज़ार 400 हिट्स हो चुके हैं।  मुझे पता नहीं कि सेतु की प्रसिद्धि कितनी है लेकिन इस बात का संतोष है कि उत्कृष्ट लेखकों, सुधी पाठकों, और उत्साही सम्पादन मण्डल के सहयोग से हम अपना कार्य निरंतर करते रहे हैं। पिछले छह मास से सेतु का पीडीएफ़ अपलोड बाधित है, जिसे इस मास से सतत करने की योजना है। इस बीच सेतु प्रकाशन की ध्वजा तले दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, कुछ अन्य अभी प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं।

गीतकार योगेश गौड़
(19 मार्च 1943 - 29 मई 2020)
इस शुक्रवार, 29 मई 2020 को हमने हिंदी के एक ऐसे उत्कृष्ट कवि और गीतकार को खोया है जिसके फ़िल्मी गीत लगभग चार दशकों से हमारे हृदय को आंदोलित करते रहे हैं। उनके गीतों पर शायद कभी कोई शोध नहीं हुआ, न उनकी कोई जीवनी लिखी गयी, न ही उन्हें कोई बड़े फ़िल्मी, या साहित्यिक सम्मान मिलने की कोई सूचना है लेकिन अपने गीतों के माध्यम से वे अपने श्रोताओं के हृदय में ऐसा स्थान बना चुके हैं जिसे कोई कभी छीन नहीं सकता। 1943 में लखनऊ में जन्मे गीतकार योगेश की कहानी घनघोर संघर्ष के बीच भी मानवता और कृतज्ञता के साथ-साथ काव्य-सौंदर्य और गुणवत्ता के संतुलन की, निराशाओं के जंगल में आशा के पुष्प पल्लवित करते रहने की गाथा है। सेतु परिवार की ओर से हिंदी के इस 'अनसंग हीरो' को विनम्र श्रद्धाञ्जलि! 

विश्व की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक व शैक्षिक सूचियों में सेतु ने अपना स्थान स्वतः पाया है, जिनमें से कुछ नीचे अनुसूचित हैं। शायद हमारे सुधी शिक्षाविदों का ध्यान इस बात पर नहीं गया है कि भारत के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सूची में इस समय सेतु का नाम नहीं है। यदि आप सेतु में लिखते हैं, सेतु पढ़ते हैं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से सम्बंधित शिक्षण संस्थान से सम्बद्ध हैं तो हिंदी के प्रति अपने दायित्व से न्याय करते हुए सेतु की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सूची के लिये अवश्य अनुमोदित करेंगे ऐसा मेरा विश्वास है: 

याद दिला दूँ कि सेतु के अंग्रेज़ी संस्करण के सम्पादक डॉ. सुनील शर्मा की पहल पर सेतु ने फेसबुक पर महामारी काल में विडियो साहित्य पाठ की शृंखला आरम्भ की है। यद्यपि हिंदी में अतिथि सम्पादन के हमारे अनुरोधों को उत्साही प्रत्युत्तर नहीं मिले किंतु अतिथि सम्पादकों की शृंखला अंग्रेज़ी संस्करण का एक नियमित स्तम्भ बन चुकी है। यह बताते हुए मुझे प्रसन्नता है कि सेतु के आगामी अंक (जून 2020 वार्षिकाङ्क) में भारत की द्वैभाषिक लेखिका नीलम सक्सेना चंद्रा ने हिंदी कवयित्रियों का अतिथि संकलन समाहित करने की चुनौती ली है।

45 रचनाओं के साथ सेतु के इस 48वें अंक में आपका स्वागत है। अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवश्य अवगत कराइये।

आपका,







सेतु, पिट्सबर्ग ✍️

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