काव्य: कीर्ती ‘कनक’

दीपक जैसा जलता बुझता जीवन है।
संग हवा के बहता जाता जीवन है।
रोज सफर की ओर चला जाता है ये।
गाड़ी के पहिये के जैसा जीवन है।
फूलों की भी महक इसी के भीतर है।
उपवन के जैसा ही होता जीवन है।
उठना, गिरना और सम्हल जाना लेकिन।
बिन पाँव के चलते रहना जीवन है।
ऊपर नीचे आना जाना कहाँ ‘कनक’ के वश में है।
सब किस्मत का लिखा अपना जीवन है।



गया जमाना बदला अच्छा।
बचपन खोकर बचपन अच्छा।
बस ख्वाईश के बोझ तले हैं।
सपने भर का सपना अच्छा।
काँप रहे हैं होठ हमारे।
कहने को तो सब कुछ अच्छा।
माँ के आँचल में सब कुछ था।
गुजर रहा है जो है अच्छा।
‘कनक’ कहाँ तक खुद को रोये।
जो भी चुप है वो ही अच्छा।



गुणों की खान होता है।
गुरु महान होता है।
साध लेता है जीवन को।
तभी विश्राम होता है।
पथिक भटका हुआ हो तो।
कहाँ आराम होता है।
बड़ी मुश्किल से जाना है।
घड़ी मुश्किल की हो तो ये।
सत्य का साथ होता है।
जिन्दगी की हर परीक्षा में।
‘कनक’ के साथ होता है।



आदमी बेईमान होता जा रहा है।
झूठ की दुकान होता जा रहा है।
हर गलत रस्ता इसी के पाँव में।
जानकर अनजान होता जा रहा है।
बेचकर ईमान अपना मुफ्त में।
कीमती सामान होता जा रहा है।
देखिए आबो-हवा इस शहर की।
मजहबी बारूद होता जा रहा है।
किस तरह रोके ‘कनक’ इस जहर को।
खुद ही एक हथियार होता जा रहा है।



नैतिकता का महत्व बड़ा है।
समरसता का ख्वाब अड़ा है।
खुशियों का एक ताना-बाना।
जीवन का आधार खड़ा है।
चाँद सितारे वो ही बनते।
जिनका कि सम्मान बड़ा है।
मिलता है सम्मान सभी को।
इसमें छोटा कौन बड़ा है?
‘कनक’ अभी असमंजस में है।
चादर ओढ़े कौन खड़ा है।



कहे कौन है अबला नारी।
नारी भीतर बस है नारी।
लिखती है इतिहास जगत का।
शब्दों की कालीन है नारी।
सिर्फ मर्द के हिस्से में ही।
हो जाती न्यौछावर नारी।
जो पुरुषत्व भरा है अन्दर्।
उसमें भी विद्यमान है नारी।
‘कनक’ कहाँ तक समझायेगी।
बाहर भीतर सब है नारी।



मिलन की रात में रूठे।
तुम्हारे ख्वाब तक झूठे।
कहाँ पर चन्द्रमा छोड़ा।
कहाँ पर तारे हैं टूटे।
हमारा जिस्म पाकर के।
तुम्हारे सब जूनून टूटे।
हुआ एक हादसा ऐसा।
सभी गुलबूटे हैं टूटे।
‘कनक’ रोकर गुजारेगी।
ये अपने भाग भी फूटे।



बेबस का है कहाँ सहारा।
साहिल पर भी दूर किनारा।
डूब रही है जालिम दुनियाँ।
आसमान में टूटा तारा।
कौन कहानी दुःख की सुनता।
जो जीता है वो ही हारा।
बहुत पुरानी रीत है यारो।
अपनों ने ही किया किनारा।
कब तक चलती ‘कनक’ अकेली।
ठहर गया जब जीवन सारा।



लड़कों से क्या कम है लड़की।
सूर्य है लड़का गंगा लड़की।
असमान भी सूना होता।
जो वर्षा न होती लड़की।
जीवन का यह पुष्प खिलाती।
धरती जैसी होती लड़की।
कब तक चलता पुरुष अकेला।
अगर साथ ना चलती लड़की।
मर्द ‘कनक’ क्या पैदा होते?
अगर गर्भ न धरती लड़की।




जिन्दगी जब भी गुजारी सोचकर।
लुटने वाले लुट गये हैं लूटकर।
गाँव को तस्दीक करता कौन है।
सब शहर में दौड़ते हैं छूटकर।
कर रहे तकदीर से जो जंग हैं।
हार जायेंगें किसी दिन खीज़कर।
एक ही तो था हमारे काम का।
वक्त वह भी जा रहा है रूठकर।
देखती है हश्र ए वहशत को ‘कनक’
कुछ दरिंदे ले गये हैं नौंचकर।



उत्साह जीवन सार जगाता।
जीने का अंदाज जगाता।
थके हुए मानव की गति को।
मंजिल तक हँस कर ले जाता।
अमृत रूपी रस है इसमें।
पल-पल ये सद्गुण उपजाता।
लय तान व तुकबन्दी है।
बहुत उच्च स्थान दिलाता।
‘कनक’ कनक को कर देता है।
मिट्टी को ये रत्न बनाता।



संदेह पाप का घर है।
जीवन एक सफर है।
जिसको यह लग जाता।
वो मानव इधर-उधर है।
सब खुशियों को हर लेता।
यह पीड़ाओं से तर है।
यह संदेह की बीमारी।
कर के भी ऊपर कर है।
घिर गई ‘कनक’ कुछ ऐसी।
अब घर से ही बेघर है।



कैसी यह तकदीर है यारो।
बिन सुलझी एक पीर है यारो।
बस कागज के ऊपर कागज।
कैसी यह तहरीर है यारो।
जीवन एक हिरण के जैसा।
उस पर यह एक तीर है यारो।
हँसता हुआ सिर्फ चेहरा है।
आँखों भीतर नीर है यारो।
‘कनक’ लगी जब ठोकर जाना।
कब रांझे की हीर है यारो।



अजीब है यह जिन्दगी का रंग अब।
साथ होकर कब कहाँ है संग अब।
वो खुले आंगन नहीं मिलते हैं वहाँ।
गाँव की गलियाँ हुईं हैं तंग अब।
एक फौजी घर में ही हारा हुआ।
किससे लड़ने जायेगा वो जंग अब।
ख्वाहिशों की पीर के दालान में।
रिश्ते होते जा रहे अपंग अब।
रो रही है एक सदी से यूँ ‘कनक’
लाश होते जा रहे हैं अंग अब।



बस यादों में जिन्दा यारी।
साँसें भी हैं हारी-हारी।
कहाँ गयी सपनों की दुनियाँ।
कहाँ गयी वो हिस्सेदारी।
कसम राम की मिलकर खाते।
झूठी-सच्ची बारी-बारी।
वो माचिस के ताश अभी भी।
आँखें कर देते हैं भारी।
जिन्दा नहीं ‘कनक’ रहती है।
बस जिन्दा रहती है यारी।

संस्कृत शोधछात्रा (दयालबाग डीम्ड विश्वविद्यालय आगरा)
भारत के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
विशेष-ग्रामीण क्षेत्रों में हिन्दी साहित्य के प्रति लोगों को जागरूक करना।

1 comment :

  1. सभी सुधी साहित्यकारों को उत्कृष्ट लेखन की बधाई

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