दक्षिण अफ्रीका की मेरी यात्रा - श्रेयस गुप्ता

श्रेयस गुप्ता ड्यूक विश्वविद्यालय में तीसरे वर्ष के छात्र, और क्लास प्रेसिडेंट हैं। कंप्यूटर विज्ञान, मनोविज्ञान और शिक्षा का अध्ययन। हिंदी के दूसरे साल में। जन्म दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुआ था। एंटरप्रेन्योरशिप, खाना पकाने, फोटोग्राफी और दोस्तों के साथ समय बिताने में रुचि। संपर्क: shreyas.gupta@duke.edu


1999 के सितंबर में मैं दक्षिण अफ्रीका में पैदा हुआ था। जब मैं दो साल का था, हम अमेरिका चले आए। लेकिन उस देश से मेरा हमेशा ख़ास संबंध रहा। बीस साल बाद, मैं अपने विश्वविद्यालय के छात्रों के एक समूह के साथ गर्मियों के लिए केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में काम करने गया। यह मेरे पसंदीदा दिनों में से एक के बारे में कहानी है।

सुबह के दो बजे चुके हैं और मेरा समूह बैठक-कक्ष में बैठा है। हम जीवन के बारे सोच रहे थे, रूइबोस चाय पी रहे थे, और मज़ेदार कहानियाँ सुना रहे थे। क्योंकि आख़िर, हम सब सिर्फ दो सप्ताह पहले मिले थे। अब दो महीने के लिए दुनिया की दूसरी तरफ एक साथ रहने वाले थे। बातचीत बदल गयी और हमने अगले दिन के बारे में सोचना शुरू किया।

हम तीन-चोटियों पर चढ़ने की चुनौती पर विचार करने लगे। इन तीन पहाड़ों के नाम लायंस हेड, डेविल्स पीक और टेबल माउंटेन हैं। इस चुनौती को करने में एक दिन लगता है।

जब मिकेला और मैं सुबह उठकर बैठक कक्ष में गए तो ज़ैक इंतज़ार कर रहा था और हम थोड़ा हैरान थे कि वह वहाँ था। चुपचाप हमने एक दूसरे को देखा और उत्साह, भय, और थकान को देखा। हम रसोई में गए और सैंडविच, बादाम, पॉपकॉर्न और बहुत सारे पानी के साथ दिन के लिए खाना पैक किया। फिर, हम तीनों एक रोबोट के जैसे चल पड़े मन में उमंग लेकर।

सुबह छह बजे हम पहले पहाड़ के लिए घर से निकल गए। हम अंधेरे में चुपचाप कदम बढ़ाते रहे और पहाड़ पर चढ़ते रहे । सुबह 7:15 बजे, हम लायंस हेड के शिखर पर पहुँच गए। पक्षी चहक रहे थे और पानी चमक रहा था। हम एक दूसरे को देखते रहे और मुस्कुराते रहे और उगते सूरज का गौरव देखते रहे। हम तीनों अपनी वापसी में बहुत थके हुए थे और खुश भी थे।

जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया और हम एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ की ओर बढ़ते गए, हमने अपने आप को बादलों के बीच पाया, झरने के पीछे मस्ती करते हुए और सुन्दर नज़रों में गुफ्तगू करते पाया।

डेविल्स पीक पर चढ़ते हुए सबसे मुश्किल हिस्से के दौरान हम थक गए थे और प्यासे भी थे। हमारे पास भोजन और पानी का थैला था। ज़ैक और मैंने बैकपैक खोला और देखा कि हमारे पास पानी नहीं था। थकावट हमारे मन को भरने लगी थी। हम अब नहीं रुक सकते थे क्योंकि हम लगभग गंतव्य पर पहुँच गए थे। तभी हमें एक अजीब आवाज़ सुनाई पड़ी। जैसे-जैसे हमने कदम बढ़ाये हमें झरने की आवाज़ सुनाई पड़ी। ज़ैक और मैंने पानी में अपना सिर डुबोया और पानी पिया। मैंने अपने जीवन में कभी भी ऐसा मीठा या साफ पानी नहीं पिया था। हम बैठ गए, अपनी बोतलें भर लीं, और मन ही मन भगवान को धन्यवाद किया। मिकेला ने मुस्कराते हुए, मुझे बैग दिया और हम चढ़ते रहे।

हम छह घंटे से चढ़ रहे थे। वह मज़ेदार समय था जब ज़ैक ने अपनी शर्ट उतार दी और पहाड़ी पर भागना शुरू कर दिया। किसी तरह उसने सोचा कि इस चुनौती पर जींस पहनना एक अच्छा विचार है इसलिए वह पसीना बहा रहा था। मिकेला और मैं बहुत भ्रमित थे। जैसे-जैसे मिकेला और मैं चल रहे थे, उसने मुझे और व्यक्तिगत बातें बतानी शुरू कर दीं। हम बैठ गए, पहाड़ के किनारे से अपने पैर लटका दिए। उसने मुझे अपने परिवार, अपने दोस्तों और खुद के बारे में बताया। उसका परिवार लंदन में रहता था लेकिन उसका जन्म बॉस्टन में हुआ था। उसने मुझे एक कहानी के बारे में बताया कि कैसे उसकी माँ, पिता और छोटे भाई ने उसका मज़ाक उड़ाया। ज़ैक वापस आ गया और हमारे साथ बैठ गया और वह हमें अपनी बहन और माता-पिता के बारे में बताने लगा। उसने हमें एक कहानी बताई कि वह अपने बहनोई को क्यों पसंद नहीं करता था और वे आखिर कैसे दोस्त बन गए।

सब सुंदर था लेकिन ये मेरी पसंदीदा यादें नहीं थीं। मेरा मन प्रिय हिस्सा ज़ैक को अपना प्रिय गाना गाते हुए सुनना था, जिसने उसे रॉली शहर में अपने बचपन के सबसे अच्छे दोस्तों की याद दिला दी। और जब मिकेला डेविल्स पीक के चोटी पर अपना सैंडविच खा रही थी, तो उसने हमें बताया कि उसके छोटे भाई उसके लिए कितने महत्वपूर्ण थे और उसे उनपर कितना गर्व था।

हम केवल दो सप्ताह पहले मिले थे। लेकिन हम अपने बारे में बहुत सारी कहानियाँ साझा कर रहे थे और बहुत मज़े कर रहे थे। मैं अपने जीवन में कभी इतना हँसा नहीं था।

हम तीसरी चोटी तबेल माउंटेन की ओर बढ़ रहे थे। हमने पूरे केपटाउन शहर को देखा। जैसा हमने पहले पहाड़ की चोटी पर किया था, वैसे ही हमने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुराए। किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन हम बस इतने खुश थे। हमने चुनौती पूरी कर ली थी और हमने रास्ते में कुछ अद्भुत दोस्ती की थी। अब की बार हमने बिना कुछ कहे ही सब कुछ कह दिया था। आज भी हम उस नज़ारे के बारे में सोचते हैं तो हमें यकीन नहीं होता की हम तीनों मित्र वहाँ थे।

घर वापस आने के बाद, हमने स्नान किया और आराम किया। रूइबोस चाय के साथ बैठक कक्ष में वापस जाते हुए और हमने एक दूसरे से पूछा, “एक और पहाड़?”

ईमानदारी से कहूँ तो मैंने यह सोचकर इस कहानी के बारे में लिखना शुरू किया कि मैं एक ब्लॉग लिखूँगा

यह उस चुनौती की तरह है जो हम दोस्तों ने अपने सफर के लिये स्वीकारी थी। सभी को कुछ नया करने की चाहत। यह मेरे लिए और भी ख़ास थी क्योंकि इस से मेरे दोस्तों और दोस्ती की यादें जुड़ी हुई थीं।

(मिकेला और ज़ैक के साथ टेबल माउंटेन की चोटी)

(टेबल माउंटेन के किनारे का एक दृश्य)
(केप टाउन शहर का एक दृश्य)

(मिकेला और मैं पहाड़ से देखते हुए)

(ज़ैक और मिकेला मेरे साथ मजाक कर रहे थे)

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