पुस्तक समीक्षा: सपने में सपना (डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’)

समीक्षक: शोभा अग्रवाल

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पुस्तक- सपने में सपना (बाल कहानी संग्रह)
ISBN- 81-88464-01-5
रचनाकार- डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’
प्रकाशक- जाह्नवी प्रकाशन दरियागंज, दिल्ली-110002
पृष्ठ- 64
मूल्य- ₹ 100.00
प्रकाशन वर्ष- 2020
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दो दर्जन से अधिक सरकारी एवं गैर सरकारी पुरस्कारों से सम्मानित वरिष्ठ बाल-साहित्यकार ‘डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’ जी ने बाल साहित्य की हर विधा में लिख कर बाल साहित्य को समृद्ध करने का सराहनीय कार्य किया है।

दिनेश पाठक ‘शशि’
उनके बाल कहानी संग्रह ‘सपने में सपना’ की हर कहानी की अपनी एक अलग रीढ़ है और अपना एक अलग संदेश है। इन कहानियों की विशेषता है कि हर कहानी में दैनिक जीवन से जुड़ी हुई किसी न किसी समस्या का वर्णन है व उसका समाधान भी बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

जैसे- पहली कहानी ‘हेल बोप्प’में प्रातः जागरण का सन्देश है। ‘पराया दुःख’ कहानी में बच्चे के पिता ने नीचे की मंजिल में रहने वाले अंकल के साथ मिल कर योजनाबद्ध तरीके से बच्चे को सौहार्द्र का संदेश दिया है। सत्य है किसी दूसरे की पीड़ा को समझने के लिए आवश्यक है कि उसकी परिस्थिति में स्वयं को रख कर अनुभव करें।
इसी प्रकार ‘भूल’ कहानी में एक बच्चा रितेश अपने पिता से बीस रुपए ले कर स्कूल गया। एक गरीब लड़का सिर पर टोकरी रख कर फल बेचता था। कुछ बदमाश बच्चों ने उसके सब बेर लूट लिए, साथ ही उसकी जेब से सारे पैसे भी निकाल लिए। रितेश ने अपने पापा से लिए हुए बीस रुपए उस लड़के को दे दिए व अन्य साथियों से भी चन्दा इकट्ठा करके उस गरीब लड़के की मदद की। रितेश ने यह सत्य घटना डर के कारण घर वालों को नहीं बताई। रितेश के माता-पिता को लगा कि रितेश ने पैसे कहीं खो दिए हैं। तब उन्होंने रितेश को काफी डाँटा। सच्चाई पता चलने पर रितेश और उसके माता-पिता को अपनी भूल का एहसास हुआ। सबने स्वीकार किया कि परिवार में परस्पर दूरी नहीं होनी चाहिए। एक दूसरे को खुल कर सच्चाई बतानी चाहिए। संग्रह की इस कहानी पर ‘शार्ट फिल्म’ का निर्माण भी हुआ है।
‘और चोरी रुक गई’ कहानी में भोलू रीछ की मोटर साइकिल से उसका पड़ोसी लोमड़दास पेट्रोल की चोरी करता रहता है, लेकिन लोमड़दास के बच्चे की तबियत खराब हो जाने पर भोलू रीछ ही लोमड़दास की मदद करता है। इस प्रकार लोमड़दास भी सुधर जाता है व आगे से चोरी न करने की शपथ लेता है।

‘पश्चाताप’ कहानी में समीर नाम के एक बदमाश लड़के के सुधार की कहानी है। विद्यालय जाते समय उसके रास्ते में एक रेल का फाटक पड़ता था। जब कभी उधर से रेल गुजरनी होती थी  तब रेल का फाटक बन्द रहता था। समीर कुछ पत्थर इकट्ठा कर लेता था। रेल के गुजरते समय समीर रेलगाड़ी के शीशे पर पत्थर फेंकता था। उसके दोस्त उसको ऐसा करने से मना करते थे किन्तु समीर नहीं मानता था। एक बार उसे एक सपना आया कि उसके इस कृत्य की वजह से रेलगाड़ी से उसके घर आ रहे उसके मामाजी को चोट लग गई है और वह अस्पताल में भर्ती हैं। जागने पर उसने सपने की बात माँ को बताई। साथ ही रेलगाड़ी पर पत्थर मारने के अपने कृत्य को भी उसने स्वीकारा और भविष्य में अच्छा बच्चा बनने का संकल्प लिया।

चौंसठ पृष्ठीय इस पुस्तक को सुस्पष्ट चित्रांकन द्वारा सजीव कर दिया गया है । पुस्तक में अच्छे कागज का भी प्रयोग किया गया है तथा मूल्य भी ठीक है ।

वस्तुतः रोचक बाल साहित्य ही एक ऐसी विधा है जो समाज के भावी नागरिकों के सुदृढ़ चरित्र की नींव है। लेखक इसमें पूर्णतया खरे उतरे हैं। ‘भ्राताश्री डॉ.दिनेश पाठक शशि जी की लेखनी इसी प्रकार समाज का कल्याण करती रहे।

शुभाशंसाएँ

1 comment :

  1. श्रद्धेय डॉ दिनेश पाठक 'शशि' जी पुस्तक सपने में सपना की सुंदर समीक्षा हेतु लेखक व समीक्षक को हार्दिक बधाई।

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