स्वास्थ्य: कोरोना से लड़ाई में आपकी तैयारी

कौशलेंद्र

- डॉ. कौशलेन्द्र

विपरीत स्थितियों में भी जीने की राह तलाश कर लेना हर प्राणी की विशेषता है। हम पिछले सत्तर सालों से चीन और पाकिस्तान के साथ जूझते हुये अपने अस्तित्व की रक्षा का संघर्ष करते आ रहे हैं। हमने प्लेग, और एड्स जैसी बीमारियों का भी सामना किया है और अब सार्स परिवार के ज़िद्दी सदस्य कोरोना के वर्तमान स्ट्रेन का भी सामना कर रहे हैं।

अब जबकि यह तय हो चुका है कि हमें लम्बे समय तक कोरोना का सामना करते रहना पड़ेगा तो उसके लिए विशेष तैयारियाँ भी करनी ही होंगी। इस आलेख में हम उन सम्भावनाओं के बारे में चर्चा करेंगे जिन्हें सामान्यरूप से अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाये रखते हुये कोरोना जैसे विषाणुओं का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए अपने शरीर को तैयार कर सकेंगे।

1- विजय संकल्प –हर नई समस्या का समाधान सम्भव है, हमें इस संकल्प के साथ स्वयं को मानसिक तौर पर तैयार करना होगा।

2- लड़ाई के लिए शरीर में उपयुक्त परिस्थितियों का निर्माण –हल्दी डालकर उबाले हुये पानी से दिन भर में दो बार गरारा करते रहने से गले की कोशिकाएँ अपेक्षाकृत अधिक सक्षम बनी रहती हैं और प्रभावी तरीके से हर तरह के माइक्रॉब्स का सामना करने के लिए तैयार हो जाती हैं।

3- विटामिन सी की भूमिका –शरीर की कोशिका में स्थित माइटोकॉन्ड्रिया की बेहतरी के लिए विटामिन सी की महत्वपूर्ण भूमिका जगज़ाहिर है। संतुलित मात्रा में विटामिन सी का उपयोग न केवल कोशिकीय ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को निष्क्रिय करता है बल्कि कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को भी रोकने में सहायक होता है। संक्षेप में समझा जाय तो शरीर की आंतरिक गड़बड़ियों को सुधारने के साथ-साथ बाहर से आने वाले हानिकारक माइक्रॉब्स के विरुद्ध शरीर के प्रतिरक्षातंत्र को भी मज़बूत करने में वीटामिन सी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नीबू, संतरा, मुसम्मी, अमरूद और आँवला जैसी चीजों में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा पायी जाती है।

4- प्रोटीन की भूमिका – रोगप्रतिरोध क्षमता उत्पन्न करने में प्रोटीन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है अतः उच्चगुणवत्तायुक्त किंतु सुपाच्य प्रोटीन का स्तेमाल वायरस से लड़ने के लिए शरीर को सक्षम बनाता है।

5- एण्टीऑक्सीडेण्ट्स की भूमिका –शरीर की कोशिकाओं को निरंतर कार्य करते रहना होता है जिसके परिणामस्वरूप हमारे शरीर में हमेशा कुछ फ़्री-रेडिकल्स बनते रहते हैं जो किसी भी बीमारी को आमंत्रित करने के लिए प्रारम्भिक और महत्वपूर्ण घटक होते हैं। यूँ समझा जाय कि फ़्री रेडिकल्स कोशिकीय फ़ैक्ट्री से निकलने वाला मॉलीकुलर कचरा है जिसे तुरंत निष्क्रिय करना आवश्यक होता है। फ़्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करने के लिए कोशिकाओं को एण्टीऑक्सीडेण्ट्स की आवश्यकता होती है। उच्चगुणवत्ता वाले एण्टीऑक्सीडेण्ट्स प्राप्त करने के लिए गरम मसालों से अच्छा और कुछ भी नहीं है। बस शर्त यह है कि गरम मसालों को तेल में न भूना जाय बल्कि पीसकर दाल या सब्जी में, सेवन करते समय ऊपर से मिलाया जाय। औषधीयरूप में लेने के लिए इन्हें शहद या पानी के साथ भी लिया जा सकता है। ध्यान रहे कि उच्चगुणवत्तावाले एण्टीऑक्सीडेण्ट्स की सूची में लौंग का स्थान प्रथम क्रम पर है, शायद इसीलिए संस्कृत में इसका नाम देवकुसुम रखा गया होगा। यह भी ध्यान रहे कि तक्कोलम् (चक्रफूल, Star anise, illicium verum) में पाया जाने वाला औषधीय घटक शिकिमिक एसिड (Shikimic acid) एक प्रभावी एण्टीवायरल एज़ेंट है जिसका प्रयोग सार्स के इलाज़ के लिए प्रभावी मानी जाने वाली दवा Oseltamivir (Tamiflu) के निर्माण में किया जाता है।

6- ज़िंक का एण्टीवायरल प्रभाव – एण्टीवायरल मेटेलिक द्रव्यों में ज़िंक सर्वोपरि है। जिन खाद्य पदार्थों में ज़िंक पाया जाता है, एण्टीवायरल कार्मुकता के लिए उनका सेवन किया जा सकता है। कद्दू (Pumpkin) के बीजों में पर्याप्त ज़िंक पाया जाता है और ये सहज उपलब्ध भी है।

7- एण्टीवायरल जड़ी-बूटियाँ –गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा।

8- रोगप्रतिरोधक्षमता बढ़ाने वाले खाद्यपदार्थ – छुहारा, गाजर, मशरूम, गाय का घी, दूध।

महापुरुषों ने कहा है – धरती पर वह सब कुछ उपलब्ध है जिसकी हमें आवश्यकता है, अभाव केवल उसकी योजना का है।

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