ओ जाने वालों हो सके तो लौट के आना ...

अनुराग शर्मा
🙏 लगता है जैसे कल की ही बात हो। पंडित जसराज पिट्सबर्ग में थे, भेंट तय थी परंतु उनकी तबियत अत्यधिक बिगड़ जाने के कारण वार्ता अनिश्चित काल के लिये टालनी पड़ी। पता न था कि कालचक्र घूमकर वापस नहीं आने वाला। हमारे समय के सर्वश्रेष्ठ गायकों में से एक पण्डित जसराज के देहांत ने संसारभर के संगीत प्रेमियों को रुलाया है। सेतु परिवार की ओर से श्रद्धांजलि।

हाल में ही भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का देहावसान हो गया। यह भी एक विरल संयोग है कि सेतु परिवार ने जब पुस्तक प्रकाशन के बारे में सोचा भी नहीं था तब जिस पहली पुस्तक का प्रस्ताव आया था वह तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बारे में थी। पुस्तक लगभग तैयार थी परंतु जैसी कहावत है, होइहै वही जो राम रचि राखा, और वह पुस्तक कभी प्रकाशित न हो सकी।

जीवनयात्रा में हमारे बहुत से मित्र बनते हैं। कभी मानव रूप में, कभी अन्य प्राणियों के रूप में, और कभी पुस्तकों व पत्र-पत्रिकाओं के रूप में। लम्बे समय से हमारे साथ रही दो पत्रिकाओं कादम्बिनी व नंदन के अवसान के समाचार ने साहित्य जगत में काफ़ी हलचल मचाई है।

संसार चलायमान है। परिवर्तन अवश्यम्भावी है। हम आप कल यहाँ नहीं थे। हमारे आपके संवाद, और हमारी कृतियाँ हमारे जाने के बाद भी लम्बे समय तक अनेक हृदयों को आंदोलित करने की सम्भावना रखते हैं। सहयोगी जी के नवगीतों से लेकर भावना जी की लघुकथाओं तक अनेक रोचक रचनाओं के साथ यह अंक आपको समर्पित है। अपनी प्रतिक्रिया अवश्य साझा करें ताकि आपके अनुभव की सहायता से आगामी अंक पहले से बेहतर बन सकें।

आपका आभारी,







सेतु, पिट्सबर्ग
31 अगस्त 2020 ✍️

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