लघुकथा: हरितलवक

अनघा जोगलेकर


       दादी की पुण्यतिथि पर आज पूरा परिवार इकट्ठा हुआ था। दादी की तस्वीर देख, मेरा बचपन मेरी आँखों के सामने घूम गया।

          मुझे जन्म देते ही मेरी माँ चल बसी थी। अब दादी ही पूरे परिवार की धुरी थीं। वे सुबह सबसे पहले उठतीं और रात में जब सब सो जाते, तभी सोतीं। वे दिन भर व्यस्त रहतीं। कभी चौके में तो कभी स्वेटर बुनने में। कभी हम बच्चों के साथ खेलतीं तो कभी आंगन में चिड़ियों को दाना डालतीं।

      उनके रहते पूरा घर जीवंत रहता था लेकिन जैसे-जैसे उनके चेहरे पर झुर्रियाँ बढ़ती गईं, उनके बेटों में जायजाद को लेकर मनमुटाव भी बढ़ने लगे। जब बड़े पापा ने दादी से उनकी जमापूंजी के बारे में पूछा तो अपनी आँखों में उभर आई पानी की लकीर को छुपाने के लिए वे आंगन में चली आईं थीं। मैं भी उनके पीछे हो ली।

          वे एक बड़े से पेड़ पर हाथ घुमाते हुए बोलीं थीं, "जानती है बेटा, पेड़ हरे क्यों होते हैं?"

    "क्यों दादी?"

"क्योंकि इनमें हरितलवक होता है जो इनमें ऊर्जा भरता है। इनको भोजन बनाने में सहायता करता है और इन्हें हरा रखता है।"

      "यदि ये सूख गया तो..."

    "तो... तो बेटा, पेड़ भी सूख जाएगा।"

           ... दादी के जाने के बाद हमारा हरा-भरा परिवार सूख गया। हमें एक सूत्र में बांधने वाला कोई न रहा। सब जायजाद में अपना-अपना हिस्सा ले, अलग हो गए। धीरे-धीरे सबमें दूरियाँ बढ़ गईं।"

       आँखों से ढुलक आए आँसुओं की नमी से मेरी तंद्रा टूटी और मैं आंगन में उसी पेड़ के पास आकर खड़ी हो गई लेकिन वह पेड़ अब सूख चुका था।

          तभी घर के भीतर से आवाज़ आई, "सुन, तेरी भाभी के बेटा हुआ है। अभी-अभी खबर आई है।"

          अचानक सब में नई ऊर्जा का संचार हो गया। मेरा मन भी हुलस उठा, "दादी, आप परदादी बन गए" मैंने मन ही मन कहा। ध्यान से देखा तो उस सूखे पेड़ में भी एक छोटी सी कोपल उग आई थी।

          "अब यह पेड़ कभी नहीं सूखेगा।" मैंने खुशी में अपनी आँखें मूंद लीं।

3 comments :

  1. मृदुलाMarch 1, 2018 at 12:23 PM

    बहुत खूब। आशावादी

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  2. इसे लिखे जाने का उद्देश्‍य क्‍या है, यह समझ ही नहीं आया।

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  3. पूरे परिवार को बांधे रखने वाली दादी स्वयं प्रतीकात्मक रूप में एक क्लोरोफिल है फिर दादी की क्लोरोफिल के बारे में सीख की यादें फिर परिवार में नए सदस्य के आगमन से आपसी मनमुटाव भुलाकर एक हो जाना और पेड़ में नई कोपल का फूटना एक आशा का संचार दर्शाता है।कुल मिलाकर लघुकथा एक उपदेशात्मक लघुकथा बन गयी लगती है।

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