लघुकथाएँ: अनघा जोगलेकर

अनघा जोगलेकर
लापरवाही

घर की छत पर लगे एंटीने पर रोज कबूतर बैठा करते थे। अपनी हलचल से वे एंटीने पर लगे तार को बार-बार छेड़ा करते थे जिसके कारण टीवी पर आड़ी-टेढ़ी रेखाएँ आतीं। लेकिन थोड़ी ही देर में फिर अच्छी पिक्चर क्वालिटी आने लगती। इसलिए मैंने और घरवालों ने भी इस ओर कभी ज्यादा ध्यान नही दिया।

लेकिन आज... अचानक पिक्चर गायब हो गई। टीवी से मात्र आवाज़ आ रही थी। मैं
दौड़कर छत पर गया। देखा, आज कबूतर की जगह... बंदर कूदा था एंटीने पर।

नीचे टीवी से आवाज़ आ रही थी - मुहल्लों में होने वाली छेड़छाड़ अब बलात्कार में तब्दील...

उजाड़ भूमि

सब कुछ तैयार था। खेत चुन लिया गया था। हल, अच्छी प्रजाति के बीज, खाद सब लाया जा चुका था। प्रजा को प्रतीक्षा थी तो बस महाराज के आने की। तभी राजपथ पर गतिविधियाँ तीव्र हो उठीं। सब उस ओर आतुरता से देखने लगे।

दस घोड़ों में जुता रथ, खेत के सामने आकर रुका। महाराज जनक अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए नीचे उतरे। मन्त्र उच्चारण के साथ उन्होंने हाथ मे हल थाम लिया। प्रजा जयजयकार कर उठी।
हल तीव्र गति से जमीन उधेड़ रहा था। लगभग आधा खेत जुत चुका था। महाराज पसीने से लथपथ हो चुके थे परंतु वे रुकने को तैयार न थे। उनकी आँखें कुछ ढूंढ रही थीं।

जब लगभग पूरा खेत जुत चुका तो महाराज की प्रश्नवाचक आँखे मंत्री पर जा टिकीं। अपने महाराज की आँखों में
समाए प्रश्न को समझ, उन्होंने सर झुका दिया। फिर हल्के से बोले, "महाराज, आज आपको कोई भूमिजा न मिलेगी क्योंकि अब कन्याओं को खेत मे नही फेंका जाता। अब उन्हें गर्भ में ही मार दिया जाता है।"

4 comments :

  1. उजाड़ भूमि....मार्मिक लघु कथा

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  2. 'लापरवाही'और 'उजाड़ भूमि'दोनो ही लघुकथाओं में प्रतीकात्मक रूप से विसंगतियों पर चोट की गई है।अस्सी-नब्बे के दशक में लोगों का ध्यान टी.वी.स्क्रीन पर रहता था और जैसे ही कुछ व्यवधान आता था छत पर एंटेना की तरफ भागते थे,उसका डायरेक्शन ठीक करते थे।हमारी जरा सी लापरवाही असामाजिक तत्वों का हौंसला बढ़ा देती है।
    'उजाड़ भूमि'में भी पौराणिक संदर्भ लेकर समसामयिक विसंगति कन्याभ्रूण हत्या पर चोट की गई है।

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  3. Bhayavah samay ka Aaeena dikhati Laghukatha'Ujaad Bhumi'. va 'Laaparwahi' me prachhann Gehra vyang...Kya baat hai. Angha ji ko khoob Badhaee.

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  4. उजाड़ ठीक है। पर पहली लघुकथा में कोशिश अच्‍छी हुई है। पर कबूतर और बंदर की तुलना कुछ जमी नहीं। दूसरी बात टीवी के एंटिना से पक्षियों या जानवरों की छेड़छाड़ कैसे रोकी जा सकती है।

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