देवनागरी भारती की सुनो

आचार्य शीलक राम

आचार्य शीलक राम


राष्ट्रभाषा मजाक बनी, प्रत्येक विभाग में उपेक्षित
यहाँ-वहाँ कहीं भी देखो, अनपढ़ हों चाहे शिक्षित (1)

ऐसा गुलाम बनाया हमें, विदेशी भाषा लगती प्यारी
अपना खेल बिगाड़ रहे, हर दिन चढ़ती जाती उधारी (2)

सम्मानित विदेशी व्यवहार में, निज भाषा में हो अपमान
अपनी बोलने में हीनभावना, पग-पग पर व्यवधान (3)

राष्ट्रभाषा देवनागरी भारती, अपने दम पर चलती
न सरकार-न कोई संगठन, रूप नए-नए ढलती (4)

राजनीतिक दल यहाँ कोई भी, सभी अंग्रेजी के गुलाम
अपना अपमान खुद करवा रहे, छिपे में नहीं सरेआम 卌

चुनावपूर्व में वायदा किया, भूले चुनाव के बाद
राष्ट्रभाषा देवनागरी सुनो, चुनाव समय फिर याद (6)

स्व-भावों की अभिव्यक्ति को, राष्ट्रभाषा ही सक्षम
विदेशी में पाखण्डी बनते हम, नहीं सत्य अभिव्यक्ति दम (7)

क्या विद्यालय-क्या महाविद्यालय, विश्वविद्यालय भारत सारे
विदेशी भाषा व्यवहार में, कतई फोड़ दिए भाग हमारे (8)

शिक्षा-विभाग या डाक-विभाग, रेलवे-विभाग या रक्षा
अन्तरिक्ष-विभाग, अंग्रेजी बोलता, अंग्रेजी में प्रबन्धन शिक्षा (9)

होटल सारे अंग्रेजीमय सुनो, अंग्रेजी से सना व्यापार
वन-विभाग अंग्रेजी बोलता, विदेशी में पुलिस व्यवहार (10)

भारतीय सुनो हम नाम के, न्याय नहीं निज भाषा में।
अटर-पटर अंग्रेजी बोलते, जमीनी भारत भरा निराशा में (11)

राष्ट्रभाषा के सब पीछे पड़े, नेता हों या अभिनेता।
फिल्म उद्योग अंग्रेजी गंदगी में, दिवस-रात्रि सोता (12)

सड़क हमारी सब भारतीय, लेकिन अंग्रेजी में काम।
परिवहन-विभाग कागज सब, प्रयोग विदेशीपन बदनाम (13)

वोट मांगते भारतीय भाषाओं में, अंग्रेजी में करते काम।
जात ऐसी भारतीय नेता की, समस्त धरा शहर व गाम (14)

संवाद में जब तक दो-चार शब्द, अंग्रेजी के न आ जाएँ।
गलत-सलत इसको बोले बिना, सभ्य हम कैसे कहलाएँ (15)

नेता विरोधी देवनागरी भारती, धर्मगुरु विलासी हमारे।
आजीविका भारतीय भाषाओं में, फिर भी भारती विरोधी सारे (16)

हीनभावना इतनी भरी, अंग्रेजी के बने हैं दास।
मातृभाषा-राष्ट्रभाषा विलाप करें, बाकी कौन उल्लास (17)

पुतले बने हीनभावना से भरे, भारत धरा सब वासी।
देवनागरी भारती से दूर किए, स्वयं नेता अंग्रेजी विलासी (18)

जागो भारतीय-जगाओ भारतीय, राष्ट्रभाषा का करो व्यवहार।
कैसा भी परस्पर संवाद हो, बाहर-भीतर, घर-परिवार (19)

देवनागरी भारती भारत को, रख सकती है सुनो एक।
नेता, धर्मगुरु, सुधारक सब; सुनो भारतवासी प्रत्येक (20)

चुनाव समय जब वोट मांगने आएँ, सत्ता में आने के बाद।
पूछते रहो अपने नेताओं से, भारती की क्यों न आई याद (21)

नेताओं के ही भरोसे मत रहो, इन पर दबाव बनाओ।
किसी एक का यह काम नहीं, अधिकांश भारतीय चले आओ (22)

भारत भारतीय भाषा बोल सकता, असंभव विदेशी में बोलना।
भारत भारत तभी बन पाऐगा, निज भाषा में शुरू हो डोलना (23)

सही आजादी तभी आ पाऐगी, जब हम भारतीय भाषा बोलें।
वास्तव में हम क्या कहना चाहते, रहस्य चित्त के खोलें (24)

भारतीय नेता सब पाश्चात्य सोच के, ऐसा ही चाहते विकास।
स्व-भाषाओं के नित व्यवहार बिना, नहीं मिला कुछ खास (25)

तारे टूटकर सब नीचे गिरें, चंद्रमा कहीं दूर चला जाए।
धरा हमारी खण्ड-खण्ड बिखरे, भारती बिन भारत न बन पाए (26)

कोई अदृश्य शक्ति न आऐगी, हमारी मदद करने को।
निज प्रयास से सब होगा यह, देवनगारी भारती उभरने को (27)

केन्द्रीय नेतृत्व ईमानदार यदि, पलभर में कर सकता संभव।
हमारा भारत-हम सब भारतीय, कुछ भी नहीं हमें असंभव (28)

बिना किसी भी सहयोग के, देवनागरी विश्वभाषा बनी।
करोड़ लोग इसे बोलते, सरलता-सहजता सुनी (29)

सर्वाधिक लोग धरा पर सुनो, देवनागरी बोल रहे।
झूठ इसमें नहीं रत्तीभर नहीं, हर सर्वेक्षण इसे कहे (30)

साहित्यकारों की सोच ठीक  हो; लेखक, कवि, अधिकारी।
देवनागरी विश्व पर राज करे, सहयोग मिले यदि सरकारी (31)

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