मैं तुम्हें भौतिकी में नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने की सोच रहा हूँ - सी.वी.रमन

मेहेर वान

- मेहेर वान

19 अक्टूबर 1910 को लाहौर (वर्तमान पकिस्तान) में जन्मे सुब्रमण्यम चंद्रशेखर पिछली सदी के महानतम खगोल-वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उन्हें सफ़ेद बौने तारों के द्रव्यमान सम्बन्धी “चंद्रशेखर सीमा” खोजने के लिए सन 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। यह शोध कार्य उन्होंने अपनी जवानी के दिनों में काफी पहले ही कर लिया था। वह प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक सी.वी.रमन के भतीजे थे। सी.वी.रमन ने उनके शोधकार्य के महत्व को काफी पहले समझ लिया था और उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने का प्रस्ताव रखा था जिसे चंद्रशेखर ने एक सिरे से खारिज़ कर दिया था। इसके 25 साल बाद एस.चंद्रशेखर को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

*******************************************************
सी.वी. रमन का सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को पत्र:

17 नवम्बर, 1948

मेरे प्रिय चंद्रशेखर,

मैं तुम्हें भौतिकी में नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने की सोच रहा हूँ। मुझे आश्चर्य है कि तुम कहीं इसे मेरा अपरिपक्व कदम तो नहीं समझोगे...

सस्नेह तुम्हारा,
सी वी रमन

********************************************************
चंद्रशेखर ने इसका उत्तर इस प्रकार दिया था :-

29 नबम्बर, 1948

निश्चित रूप से यह जानना बहुत प्रशंशापूर्ण है कि आप मुझे नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने का विचार कर रहे हैं। इस तथ्य के बाद भी कि खगोल-विज्ञानी इस पुरस्कार के योग्य नहीं हैं (उन्होंने रसेल, यहाँ तक कि कार्बन चक्र के आविष्कार के लिए बेथे के नाम पर भी गौर नहीं किया)। ... जैसे कि उन्होंने जी. आई. टेलर पर भी गौर क्यों नहीं किया जिनका मेरे हिसाब से पुरस्कार के लिए दावा स्पष्ट था। मैं किसी भी तरह से इस मामले में गलत तरीके से विनम्र नहीं हो रहा, लेकिन मैं ईमानदारी से यह महसूस करता हूँ कि नोबेल कमिटी के लिये मेरे नाम का प्रस्ताव अत्यंत अनुचित होगा।

आपका स्नेहाकांक्षी
एस. चंद्रशेखर

**********************************************************
रमन अपने विचार पर कायम थे और सन 1949 में रमन ने फिर से एस. चंद्रशेखर से आग्रह किया था -

21 दिसंबर. 1949

मेरे प्रिय चंद्रशेखर,

... यद्यपि मैं यह नहीं सोचता कि यह तर्क सही है कि खगोलविज्ञानी इस पुरस्कार के लिए अयोग्य हैं। ... यदि यह मुझे तुम्हारी उपलब्धियों के बारे में कहना होता तो मेरे लिए यह कहना बहुत आसान होता कि तुम्हारे लिए प्रथम द्रष्टतया कोई ऐसा मामला है या नहीं...

सस्नेह तुम्हारा,
सी वी रमन

*******************************************************
चंद्रशेखर ने पुनः मना कर दिया था-

28 दिसंबर, 1949

मैं नहीं सोचता कि मैंने जो भी किया है वह नोबेल पुरस्कार के योग्य है... नोबेल पुरस्कार योग्य होने की बहुत ही नगण्य सम्भावना होने पर भी क्या यह उचित नहीं होगा कि आपके साथ मेरे विशेषाधिकार के बजाय, कोई खगोल विज्ञानी जो कि मेरे काम को बेहतर जानता हो, वह मेरे नाम का प्रस्ताव रखे... मैं आपसे कठोरता से प्रार्थना करता हूँ कि मेरे इनकार को अंतिम समझें... मैं विश्वास दिलाता हूँ कि मेरे काम में आपकी रूचि का मैं अत्यंत सम्मान और प्रशंसा करता हूँ।

आपका स्नेहाकांक्षी
एस. चंद्रशेखर
****************************************

सन 1950 में जब डॉ रमेशन, प्रो.रमन से मिले तो रमन ने चन्द्रशेखर के इन इनकार भरे पत्रों का ज़िक्र करते हुए उनसे कहा था, “मैं उसे नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करना चाह रहा था, वह निश्चित रूप से एक नोबेल पुरस्कार लायक है। सबसे महत्वपूर्ण कारण उसके द्वारा कोपेनहेगन से लिखा गया शोध पत्र था, तब वह मात्र 21 या 22 साल का था। ... यदि उसके निष्कर्ष सच सिद्ध होते हैं तो यह भौतिकी में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।”

इसके लगभग 25 साल बाद सन 1983 में एस. चंद्रशेखर को भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला। एस. चंद्रशेखर को नोबेल पुरस्कार लेते हुए रमन नहीं देख पाए, सन 1970 में सी.वी. रमन की मृत्यु हो गई थी।

(सारे पत्र “करेंट साइंस: अंक 70, 1996 से साभार अनूदित)

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।