डॉ अभिषेक कुमार के काव्य संग्रह 'रस्सा खोल' में प्रगतिवादी यथार्थ

समीक्षा: रस्सा खोल

लेखक: अभिषेक कुमार
विधा: काव्य संग्रह
प्रकाशक: मिश्रा एण्ड मिश्रा पब्लिकेशन
समीक्षक: मोनिका देवी
******************

रस्सा खोल' काव्य संग्रह डॉ अभिषेक कुमार द्वारा लिखित एक अनूठा प्रयोगधर्मी  काव्य है, जिसमे अपने नाम के अनुसार समाज के हर वर्ग को चेताया गया है तथा उसकी पोल खोल कर रख दी है। यह सौ कड़ियों वाली एक लंबी कविताओं का समावेश है जिसमे कवि ने जीवन का शायद ही कोई पक्ष हो जिसे इसमें पूरी निडरता के साथ आलक्षित नही किया गया हो। इसकी प्रत्येक कविता आपको सोचने पर मजबूर कर देती है, समाज मे घटित होने वाले घटनाओं, राजनीति में बनते बिगड़ते रिश्तों को भी दिखाया गया है। विश्वभर में फैली पूंजीवादी  समस्या को दर्शाया गया है। अंधविश्वास पर गहरी चोट की गई है। एक महिला के प्रति किस प्रकार समाज के दकियानूसी रीति रिवाज लाद दिए जाता है, इस आधुनिक युग मे भी यह सब देखने को मिलता है इस ओर  भी कवि ने पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है।

         काव्य संग्रह में कवि की निडरता तो दिखता ही है साथ ही साथ एक ओर जहाँ किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों, आदिवासियों और अबलाओं की दयनीय स्तिथि को देखकर जहाँ कवि का खून खौल उठता है वहीं दूसरी तरफ पूंजीवादी नवसाम्राज्यवादी व्यवस्था के खिलाफ कवि का गुस्सा फूटता महसूस किया जा सकता है। कवि एक ओर जहाँ धार्मिक पाखंड को देखकर असह्य हो उठता है वहीं दूसरी तरफ विसंगतियों को बढ़ते देख जड़ बुद्धिजीवियों को ललकारते हुए कहता है "तमाशाबीन बुद्धिजीवियों मौन तोड़ कुछ तो बोल, बढ़ती असहिष्णुता, नफरत और असुरक्षा के खिलाफ हल्ला बोल।"

            गरीबी, भूख, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पूंजीवादी नवसाम्राज्यवाद, चुनाव व्यवस्था, पर्यावरण - विनाश, डायन-प्रथा आदि विषयों पर बेबाकी से कलम चलाते हुए कवि डॉ अभिषेक प्रेम जैसा विषय को भी बहुत बारीकी से उकेरा है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि इस काव्य संग्रह में कवि का प्रेम वासनामूलक नहीं अपितु कवि का प्रेम समग्र रूप से मानव प्रेम बनकर प्रस्फुटित हुआ है।

निन्यानवीं  कड़ी जिसमें कवि ने देश को गर्वित भाव से रखते हुए,देश के प्रति समर्पित हो जाने को,ज्ञान व जप सिखाती यह कविताएँ अग्रसर है। यह कड़ी वास्तव में प्रत्येक देशप्रेमियों को गर्व से भरने वाली है।जबकि कवि ने काव्य संग्रह के अंतिम अर्थात सौंवी कड़ी में देश के प्रति एक समावेशी विजन प्रस्तुत किया है जो कि कवि के सपनो का भारत है। इस अंतिम कड़ी में कवि कहता है -

जहाँ जात धर्म का फसाद ना हो / जहाँ व्यर्थ आडंबर आबाद ना हो
जहाँ हिन्दू मुस्लिम का रगड़ा ना हो / जहाँ मंदिर मस्जिद का झगड़ा ना हो
जहाँ स्त्रियों का पंख लहूलुहान ना हो / जहाँ गरीब - मजलूमों पर भारी
पूंजीपतियों का जहान ना हो
मेरे सपनों का ऐसा भारत है / सपने की इस भारत की जय बोल

अपनी तलाश में स्वयं को खोजने के लिए प्रेरित करती,ओर शोषण से  शोषित होते वर्ग को चेताती कवि की रचना बहुत ही सबल है।आज झूठ फ़रेब से नेता जनता को अपना बना रहे है इसके लिए भी कवि की पंक्तियों से जनाक्रोश झलकता है वादा सब छलावा है। कॉरपरेट जीवन की जीती जागती जिंदगी से रूबरू करती कविता है जो काफी हद तक कॉरपोरेट सेक्टर के चोंचलेबाजी और शोषण के तरीके को समझाने में सफल हुई है।

व्याकरणजनित कुछ अशुद्धियों और टंकण संबंधी कुछ विसंगतियों को परे रखकर देखने पर यह काव्य संग्रह वास्तव में एक जनपक्षीय, लयात्मक और प्रतिरोधी काव्य संग्रह है जिसमे मानव जीवन के लगभग हर पक्ष को समाहित करने की कोशिश की गई है। काव्य संग्रह के विस्तृत फलक की विवेचना करने पर कवि अपने लक्ष्य के काफी करीब दिखता है। कवि के प्रतिरोधी वाक्यों में भविष्य की संभावनाएँ दिखती है, जिसके लिए डॉ अभिषेक बधाई के पात्र हैं। शेखर सावंत की भूमिका अपने आप मे अद्वितीय है जो इस काव्य संग्रह में चार चांद लगाती प्रतीत होती है।

परिचय

लेखक: डॉ अभिषेक कुमार
शिक्षा:- स्वास्थ्य विज्ञान में स्नातकोत्तर, वर्तमान में हिंदी स्नातक छात्र (IGNOU) सृजन :- विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ ( कविता / आलेख ) प्रकाशित प्रकाशन :- एक लयात्मक, प्रतिरोधी था जनपक्षीय काव्य संग्रह 'रस्सा खोल' प्रकाशित , काव्य संग्रह 'प्रतिरोध के स्वर', 'शक्ति' तथा 'डॉ. अभिषेक की विरहांजली' प्रकाशनाधीन , एक गद्य

समीक्षक: डॉ. मोनिका देवी
एम. ए. हिंदी, एम. फ़िल, पीएचडी
सहायक आचार्य हिंदी विभाग, अल्पाइन पीजी कॉलेज, जलालाबाद, शामली, उत्तर प्रदेश.

अब तक पाँच पुस्तकें प्रकाशित जिनके नाम हैं :- (1)अनुवाद के विविध आयाम (2)भगवतीशरण मिश्र के उपन्यास लक्ष्मण रेखा में समकालीनता बोध (3)समकालीन उपन्यासों में विविध विमर्श (4) अंतिम दशक की कहानियों में वैचारिक संघर्ष (5)समकालीन कहानियों में विविध विमर्श  तथा किन्नर जीवनीपरक उपन्यास प्रकाशनाधीन।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।