टैगोर का विक्रम साराभाई के लिए अनुशंसा पत्र

मेहेर वान

- मेहेर वान

विक्रम साराभाई को भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। विक्रम साराभाई अहमदाबाद, गुजरात के व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले प्रसिद्ध जैन परिवार में जन्मे थे। उनके पिता अहमदाबाद के प्रमुख व्यापारियों में से एक थे। विक्रम साराभाई स्कूल के दिनों से ही बहुत सक्रिय और बहुतमुखी प्रतिभा के धनी मालूम होने लगे थे। उनकी स्मरण-शक्ति तेज़ थी और वह एक साथ कई तरह के क्रिया कलापों में अपना ध्यान एकाग्र कर पाते थे। इस बात का एक उदाहरण यह है कि बचपन में ही उन्हें हिंदी, अंग्रजी, संस्कृत, बांग्ला और गुजराती भाषाओं का ज्ञान था, गुजराती उनकी मातृभाषा भी थी। विक्रम न सिर्फ विभिन्न भाषाओं में निपुण थे बल्कि उन्हें इतिहास, भूगोल, मूर्तिकला, चित्रकला, संगीत, नृत्य, भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और कृषि जैसे विषयों में गहरी रूचि थी, जिसके ठोस उदाहरण उनके जीवन की तमाम घटनाओं से मिलते रहे हैं। बाद में उन्होंने गणित और भौतिकी को अपने जीवन का माध्यम बनाने का निर्णय लिया और उसमें महारत हासिल की। कला और साहित्य से उनका पैतृक रिश्ता था। उनके पिता जी कला और साहित्य में गहरी रूचि रखते थे और उनके यहाँ उस समय के नामचीन कलाकार और साहित्यिक व्यक्तित्व घर आकर अतिथि के रूप में समय गुज़ारा करते थे। ये सब साराभाई परिवार के परम मित्रों में से थे, और समय-समय पर इनके यहाँ आते रहते थे और साराभाई परिवार का आतिथ्य ग्रहण करते थे।

घर के बच्चे इन लोगों से न सिर्फ बात करते थे बल्कि उनका सानिध्य भी बच्चों को मिलता रहता था। इन तमाम हस्तियों में से कुछ नाम यह हैं- गाँधी जी, जवाहर लाल नेहरू, मोतीलाल नेहरु, इंदिरा गाँधी, जगदीश चन्द्र बोस, सी.वी.रमण, जिद्दू कृष्णमूर्ती, पृथ्वीराज कपूर, मदन मोहन मालवीय, सरदार पटेल, मुहम्मद अली जिन्नाह, डॉ राधाकृष्णन, सरोजिनी नायडू, मौलाना आज़ाद और रवींद्रनाथ टैगोर आदि। रवींद्रनाथ टैगोर की साराभाई परिवार से गहरी मित्रता थी और उनका अहमदाबाद में उनका आना-जाना था। उन दिनों साराभाई परिवार के बच्चों को नृत्य और चित्रकला सिखाने के लिए रवींद्रनाथ टैगोर ने शिक्षक भी उपलब्ध कराये गए थे, जिनमे से अधिकतर बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, और मणिपुर से आये थे। सन 1920 में टैगोर ने एक महीने के लिए साराभाई परिवार के अतिथि के रूप में समय गुज़ारा और इस समय उन्होंने विक्रम को बहुत करीब से देखा। विक्रम साराभाई की जीवनी लिखने वाले लिखते हैं कि रवींद्रनाथ टैगोर विक्रम के बारे में अक्सर यह कहते थे, “यह लड़का बड़ा होकर कुछ ऊँचा हासिल करेगा”। जब विक्रम साराभाई कुछ बड़े हुए और उन्हें उच्च डिग्रियों के लिए एक अच्छे विश्वविद्यालय में प्रवेश हासिल करना था तब उन्हीं रवींद्रनाथ टैगोर ने विक्रम साराभाई के लिए एक अनुशंसा पत्र लिखा था-

*****************************************************************************
उत्तरायण,
शान्तिनिकेतन, बंगाल
नवम्बर 1, 1935

मैं अत्यंत हर्ष के साथ कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को श्री विक्रम साराभाई के प्रवेश-प्रार्थना-पत्र के सम्बन्ध में अनुशंशा पत्र लिख रहा हूँ। वह विज्ञान में गहरी रूचि रखने वाला एक नौजवान है और मुझे दृढ़ विश्वास है कि कैम्ब्रिज में पढाई करना उनके लिए बढ़ी अहमियत वाला साबित होगा। मैं उनके व्यक्तित्व और परिवार से परिचित हूँ। वह बॉम्बे प्रेसिडेंसी के एक बहुत ही समृद्ध और सांस्कृतिक परिवार से सम्बंधित हैं और इस समय उनके एक भाई और एक बहन ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़ाई कर रहे हैं। मेरे निर्णय से वह उक्त विश्वविद्यालय में पढाई करने के लिए अत्यंत उपयुक्त और यथोचित व्यक्ति हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर
(हस्ताक्षर)

***************************************************************

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।