काव्य: अनुराग सिंह ‘नमन’

आँसू की लीक

आ रहा काल रथ चलकर
संशय, विघ्नों को हरकर,
मैं सहज देखता रहता
विश्वास हृदय में भरकर।

खो जाना नियति सबकी
है कीर्ति अमर अब किसकी,
है पूर्ण हुआ कब मानव
हर ले संत्रास जगत की।

हर बेला ही खिलता हो
है पुष्प कौन बलशाली,
पतझड़ के हर मौसम में
खाली हो जाती डाली।

करुणा पर प्रेम कथायें
जब भारी पड़ जाती हैं,
सर्वस्व मनुजता पर वे
बोझिल सी हो जाती हैं।

इंसानों की बस्ती में
भ्रम किसका टूट सका है,
जो लिखा भाग्य समतल पर
है कौन? जो मेट सका है।।

पुलकावलियाँ संसृत हैं
विस्तृत हैं करुण कथायें,
जो जीवन रस में पगकर
आँसू बन बाहर आयें।

हैं निर्जन में जन जाकर
उनको क्या कोई भय है?
उन माटी के लालों को
करता कौन अभय है?

है देह दीप्ति अलौकिक
लौकिक बस थोड़ा दु:ख है,
जो पारावार विजेता
उस कालजयी को सुख है।


जीवन कैसा


जब तृण कोई स्वयं खड़ा हो तूफाँ से भिड़ जाये
जब पत्ते खड़खड़ाकर आपको नींद से जगायें,
जब सुनहली धूप बदन पर गिरकर छिटक जाये
जब बारिश की बूंदें धारासार आपके अंतस को भिगायें,
तब समझना जीवन की अठखेलियाँ कैसी होती हैं!

जब सुन्दर झरने झिलमिल-झिलमिल अपने हाथ हिलायें
जब पत्थर उन्हें समेटने को अपनी बाहें फैलाये,
जब नदियों की धारा पल-पल कुछ संगीत सुनाये
जब हरियाली अपने वस्त्रों को चहुँदिश फैलाये,
तब समझना स्वार्थरहित जीवन कैसा होता है!

जब काल निरंतर मुँह फैलाये आँखें लाल किये आये
जब देख दशानन की काया को अम्बर भी थर्राये,
जब काले मेघ भयानक गर्जन को रह-रह अकुलाये
जब क्रोध मनुज के प्रिय विवेक को धीरे-धीरे खाये,
तब समझना जीवन की विषमता कैसी होती है!

जब शोक, वेदना, करुणा, आँसू एक साथ आ जायें
जब टीस किसी कोने से, बन खीझ पटल पर आये,
जब चिंगारी उभरे कोई और लील हृदय को जाये
जब अँधियारी रातों में चंदा बेबस रात बिताये,
तब समझना जीवन में सामंजस्य कैसा होता है!

गजल

इल्ज़ाम कुछ इस तरह लगाया गया मुझ पर,
जो नहीं था वही, बताया गया अक़्सर।।

बियाबानों से कैसे ये शहरों के झगड़े,
मेरी उदासी का मजाक बनाया गया अक़्सर।।

अपने ही कर बैठे अपनों से अदावत,
ज़रा सी बात पर शहरों को जलाया गया अक़्सर।।

तुझे खुशी है तो हँस ले जी भर,
मेरी हँसी पर सवाल उठाया गया अक़्सर।।

मैं खुद को मज़बूत पाऊँ भी तो कैसे,
मेरी बुनियाद को हिलाया गया अक़्सर।।

हर बार बिखरकर उग आया हूँ मैं,
कोशिशें बर्बादी की नाकाम हुई हैं अक़्सर।।

1 comment :

  1. शानदार जबदस्त जिंदाबाद

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