फूल खिले हैं गुलशन गुलशन - प्रबोध गोविल

प्रबोध गोविल
उनका नाम बहुत से साहित्यकारों ने व्यंग्य और उपहास से लिया। किन्तु उन्होंने कभी किसी साहित्यकार पर हल्की टिप्पणी नहीं की। साहित्यकार फिल्मी दुनिया में जाते थे और कभी आंगन को टेढ़ा बताकर, कैमरे को शैतान बताकर या छैनी को भौंथरा बता कर लौट आते थे, किन्तु उनकी किताबों पर इतनी फ़िल्में बनीं कि लोगों ने उन्हें हमेशा के लिए मुंबई ही बुला लिया।

समीक्षक उन्हें लुगदी साहित्यकार कहते थे क्योंकि उनकी किताबें शायद इतनी पढ़ी जाती थीं कि एक से दूसरे हाथों में जा-जाकर उनकी किताब लुगदी ही बन जाती थी।

गुलशन नंदा
वे ऐसा 'घटिया' और 'बाजारू' लिखते थे जिस पर राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर, राखी गुलज़ार, मुमताज़,संजीव कुमार, वहीदा रहमान आदि जैसे कलाकार अभिनय कर के लिविंग लीजेंड्स बन गए।

उनका न कहीं सम्मान होता था और न कभी कोई पुरस्कार ही उन्हें मिला। कई ख्यातिप्राप्त लेखक मन ही मन ये सोचा ज़रूर करते थे कि इनके एक चौथाई पाठक भी अगर हमें पढ़ लें तो हमारा लिखना सफल हो जाए।

उन्होंने कभी अपनी कोई किताब किसी को पढ़ने के लिए अपने आप नहीं दी, कभी किसी पुस्तकालय ने उनकी कोई किताब नहीं खरीदी। जिसने भी उन्हें पढ़ा, ख़रीद कर ही पढ़ा। उनकी किसी किताब की किसी पंक्ति या शब्द पर कभी अश्लीलता का कोई आरोप नहीं लगा।

गुलशन नंदा (जन्म: 1929 - देहांत: 16 नवम्बर 1985)
उनके लेखन पर किसी ने कभी कोई शोध नहीं की, न ही कभी पाठ्यक्रम में उन्हें पढ़ाने की किसी ने अनुशंसा की, अलबत्ता उनका नाम जानते सब थे चाहे शिक्षक हों, चाहें विद्यार्थी, चाहे गृहणी हो या व्यापारी, अफ़सर, डॉक्टर, इंजिनियर, वकील, कलाकार या और कुछ, क्योंकि सभी कभी न कभी उन्हें, या उनके बारे में पढ़ ज़रूर चुके थे।

उनका नाम???
नाम जाने दीजिए, नाम में क्या रखा है... साहित्य के क्षेत्र में उनका नाम लेना पवित्र नहीं माना जाता!


सम्पादकीय नोट: सन् 1929 में गुजराँवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे गुलशन नंदा का नाम वर्तमान भारत के लेखकों और पठकथा-लेखकों में प्रमुख है। साठ और सत्तर के दशक में उनके अनेक उपन्यासों पर हिंदी फ़िल्में बनीं जिनमें उस काल की दर्ज़न भर सुपर-हिट सामाजिक-प्रेमिल-ऐक्शन फ़िल्में समाहित हैं। फूलों की सेज, काजल, नील कमल, खिलौना, कटी पतंग, नया ज़माना, महबूबा, शर्मीली, दाग़, पत्थर के सनम, सावन की घटा, झील के उस पार, उनकी कुछ प्रसिद्ध फ़िल्मों के नाम हैं। उन्हें छह बार श्रेष्ठ कथावस्तु के फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार सम्मान के लिये नामित किया गया था।




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