पुस्तक समीक्षा: भारत भाग्य विधाता (आचार्य नीरज शास्त्री)

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

28, सारंग विहार, मथुरा-6; चलभाष: +91 941 272 7361; ईमेल: drdinesh57@gmail.com


पुस्तक: भारत भाग्य विधाता (गीत संग्रह)
ISBN 978-81-8111-374-5
रचनाकार: आचार्य नीरज शास्त्री
प्रकाशक: जवाहर पुस्तकालय, मथुरा
पृष्ठ: 104, मूल्य: ₹ 200.00 रुपये, प्रकाशन वर्ष: 2018

--------------------------------------------------------------------------
भारत के गौरव और क्रान्तिकारियों के बलिदान का गान करती साथ ही समाज की विद्रूपताओं के प्रति विद्रोह का विधान रचती पुस्तक: भारत भाग्य विधाता
--------------------------------------------------------------------------

हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में लेखनी चलाने वाले, लगभग पाँच दर्जन पुस्तकों के रचयिता, शिक्षाविद्, साहित्यकार आचार्य नीरज शास्त्री जी का गीत-संग्रह ‘‘भारत भाग्य विधाता’’ एक ऐसा संग्रह है जिसमें प्राचीन भारत के गौरव की गाथा और देश के क्रान्तिकारियों के बलिदान को उजागर करती हुई उत्कृष्ट रचनाओं का समावेश तो है ही समाज में फैली विषमताओं के निराकरण हेतु विद्रोही कविताओं का भी समुचित समावेश किया गया है। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के प्रकाशन अनुदान योजना-2018 के अन्तर्गत प्रकाशित, इस कृति में 54 पद्य रचनाएँ संग्रहीत की गई हैं। आचार्य नीरजशास्त्री जी तन-मन और धन से भी पूर्ण रूपेण राष्ट्रवादी कवि है। देश-भक्ति की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी है। भारतीय संस्कृति का निर्वहन करते हुए उन्होंने काव्य-कृति का शुभारम्भ भी ईश-वंदना से किया है और ईश-वंदना में भी अपने देश-हित की ही कामना नीरज जी ने की है -

अभयता का हमको माँ वरदान दो।
हम जिएँ अपने प्यारे वतन के लिए। (पृष्ठ-27)

 मातृभूमि के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए नीरज जी ने अपने वतन की विशेषताओं का उल्लेख ‘ऐ वतन! अहले वतन!’ रचना में करते हुए लिखा है- सागर तेरे चरण पखारे देवलोक भी तुझे निहारे हे वीर-भूमि तेरी खातिर अर्पित तन-मन-प्राण हमारे।(पृष्ठ-31) गौरव, सम्मान और स्वाभिमान के प्रतीक अपने देश के झंडे का गुणगान ‘‘तिरंगे’’ रचना में करते हुए कवि ने लिखा है- पंजाब-मध्य-गुजरात-असम तक तेरी जय-जयकार है। कर्नाटक-बंगाल-आंध्र से सिक्किम तक घर-द्वार है। अरुणाचल-कश्मीर-केरला तक तेरी सरकार है। (पृष्ठ-32)
दिनेश पाठक ‘शशि’

भारत देश ही एक ऐसा देश है जहाँ की धरती पर राम, कृष्ण, नानक, महावीर और गौतम बुद्ध जैसे अनेकानेक ईश्वर और संतों ने जन्म लिया है। आचार्य नीरज शास्त्री ने ‘भारत भाग्य विधाता’ के माध्यम से यह तथ्य उजागर करते हुए संसार को बतलाने का प्रयास किया है कि भारत देश वंदनीय और पूजनीय है-

राम-कृष्ण-नानक की धरती
महावीर-गौतम की धरती
संत-प्रसविनी वसुंधरा यह
आओ इसकी करें साधना।
आओ करें हम मातृ-वंदना
आओ करें हम मातृ-अर्चना। (पृष्ठ-35)

आचार्य नीरज शास्त्री एक अति भावुक और संवेदनशील कवि हैं। वह जहाँ अपने देश भारत की युगों-युगों से स्थापित विश्व-गुरु की छवि से आल्हादित होते हैं, वहीं  देश के कुछ मौका परस्त, देशद्रोही और आतंकवादियों के कार्यों से दुखित भी होते नजर आते हैं। ‘बच्चा-बच्चा देश का...’ तथा ‘मझधारों में...’ कविताओं में उनका यही दुःख शब्द बनकर उजागर हो रहा है-
विश्व-गुरु राष्ट्र दिशाहीन हो गया
लूट-मार-हिंसा में प्रवीण हो गया   
दिलों से प्रेमभाव का नाम मिट गया 
धर्म-कर्म-सत्य से इंसान हट गया।  (पृष्ठ-38)
तथा
आतंकी बम-कांड कर रहे, भीड़ भरे बाजारों में 
भारत माँ का रक्त बह रहा, गंगा-यमुना धारों में 
कुछ अपने ही बने हुए हैं, बाधक वतन परस्ती में 
निर्दोषों का कत्ल हो रहा, आज हमारी बस्ती में।   (पृष्ठ-40)

‘देखो कैसा हाल हो गया’- कविता में गरीबी और शोषण का उल्लेख करते हुए कवि ने षोषक वर्ग को लताड़ा है-
मजदूरों की बरसातों में टूटी छान चुआती 
मेहनत करके एक वक्त की रोटी नहीं मिल पाती 
पण्डा अण्डा-मांस खा रहे, शर्म न इनको आती
हाला-प्याला-मधुशाला की इनको याद सताती। (पृष्ठ-42)

‘मँहगाई’ रचना में मँहगाई के प्रति तो ‘पर्यावरण’ कविता में प्रदूषित होते जा रहे पर्यावरण के प्रति  जहाँ कवि की चिंता प्रकट हुई है -
‘खाती है यह स्वयं मलाई
आतंकवाद को फैला करके
लेागों को गुमराह कर रही
ये ही खून-खराबा करके।
भारत भू के स्वाभिमान को
यह बाजार में लाई है। (पृष्ठ-43) 

पॉलीथिन पेपर या कि हो फाइबर
मौत के हैं भयंकर साधन सभी। (पृष्ठ-46) 
 
देशभक्तिपरक इस काव्य संग्रह में आचार्य नीरजशास्त्री ने अपने हृदय की पवित्रतम भावना ‘राष्ट्र-भक्ति’ की जिन रचनाओं में सशक्त अभिव्यक्ति की है उनमें से कुछ रचनाओं के नाम हैं-आज तम्हारी भारत माता, देश प्रेम के गीत, सिसक-सिसक मानवता रोती, रणवीरों का अवतार चाहिए, मिटा नहीं जो तलवारों से, गीत विजय के गायेंगे, पुनः शिवाजी आयेंगे, राही कदम बढ़ाता चल, शिरा तंत्र में खून नहीं, गहन कोहरा चीर दूंगा, नव इतिहास रचाना है, भारत वर्ष महान है, भारत माँ तुमको वंदन, सम्मान नहीं जाने देंगे, वीरत्व जगाना मित्रो,ओ, गद्दारो, यह देश दार्शनिक है, भारत सपूत तू जाग आदि । इन रचनाओं में भारत माँ के शौर्य, महानता,संस्कृति आदि के उल्लेख से अपनी मातृभूमि के प्रति राष्ट्र-प्रेम की की अभिव्यक्ति की है।

हमें आजादी मिले 70 वर्ष हो गये किन्तु हमारी मातृभाषा हिन्दी आज तक भी राष्ट्र-भाषा के पद पर स्थापित न हो सकी। कवि ने इसके लिए राजनीतिक  गन्दगी को दोषी ठहराते हुए ‘हिन्दी हिन्दुस्तान लिखूंगा’’ तथा ‘हिन्दी है भारत की बिन्दी’ रचनाओं के माध्यम से अपने राष्ट्रीय भाषाई स्वाभिमान को अभिव्यक्त किया है-
‘तो अर्पित पहले से हूँ
हिन्दी-हिन्दुस्तान सभी को
अरबी-इंगलिश या कि फारसी
सबको राह दिखाती हिन्दी।
पहचानो अपने गौरव को
त्याग विधर्मी की जागीरें
तुम वंदन अभिनंदन कर लो
हिन्दी है भारत की बिन्दी। (पृष्ठ-104)

गीत संग्रह ‘भारत भाग्य विधाता’ में शिल्प की कसावट और प्रयुक्त भाषा-शैली ऐसी है कि पढ़ते-पढ़ते पाठक के हृदय में देश-भक्ति की भावना हिलोरें लेने लगती है। पुस्तक का मुद्रण त्रुटिहीन और प्रयुक्त कागज स्तरीय है। हिन्दी साहित्य जगत में ‘भारत भाग्य विधाता’ का भरपूर स्वागत होगा, ऐसा पूर्ण विश्वास है।


10 comments :

  1. श्रद्धेय डॉ दिनेश पाठक 'शशि' जी द्वारा उत्कृष्ट समीक्षा हेतु मैं हृदय की गहराई से उनका आभार व्यक्त करता हूं। साथ ही मैं सेतु मग डाट कॉम काम भी समीक्षा प्रकाशन हेतु हार्दिक आभारी हूं।
    अनंत आभार सहित-
    आचार्य नीरज शास्त्री
    रचयिता- भारत भाग्य विधाता
    34/2, लाजपत नगर एन.एच-2, मथुरा 281004
    मोबाइल नंबर 9758593044
    मेल- shivdutta121@gmail.com

    ReplyDelete
  2. 👍👍बहुत ही अच्छी है.....बहुत -बहुत बधाई आपको।।।

    ReplyDelete
  3. सेतु मग साहित्य की अंतरराष्ट्रीय बेव ब्लाग है। इसके द्वारा साहित्य की अप्रतिम सेवा के लिए मैं संपादक मंडल का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

    ReplyDelete
  4. सुंदर समीक्षा हेतु आदरणीय समीक्षक महोदय का सादर आभार।

    ReplyDelete
  5. राम सिंह ' साद' मथुरा ( उ,प्र,)
    डा, दिनेश पाठक'शशि'जी के द्वारा पुस्तक 'भारत भाग्य विधाता' काव्य संग्रह जिसके रचयिता आचार्य नीरज शास्त्री जी हैं , की गई समीक्षा बहुत ही स्पष्ट , स्वतंत्र एवं निष्पक्ष  है डॉ, दिनेश पाठक'शशि'जी एक साहित्य सम्राट है उनकी लेखनी रचना की सभी बारीकियों  को प्रस्तुत करने की बहुत बड़ी क्षमता के लिए सदैव आदरणीय हैं और आचार्य नीरज शास्त्री जी भी एक राष्ट्रवादी कवि होने के नाते राष्ट्रप्रेम की भावना तन मन से उजागर होती है इस काव्य संग्रह की समीक्षा से रूबरू होती हैं। धन्यवाद।
                                       राम सिंह ' साद'
                                         9760035037
                                   

    ReplyDelete
  6. बहुत बहुत बहुत सुन्दर पुस्तक एवं समीक्षा सराहनीय बहुत बहुत बधाई ।

    ReplyDelete
  7. भाई साहब को बहुत बहुत बधाई व सादर शुभकामनाएं। आपकी कविताओं में राष्ट्रचिन्तन व हित की भावना सर्वोपरि रहती हैं, आपकी कविताएं पढ़कर मुझे बहुत आनन्द आता है, निःसन्देह आपकी कविताएं जन मन को आन्दोलित करती हैं ।

    ReplyDelete

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।