रिश्तों पर कोरोना का नकारात्मक प्रभाव


- उर्मिला कुमारी


विश्व में जब भी किसी देश पर आपदा आती है तब बहुत कुछ टूटता है। विपदा की नकारात्मकता सभी चीजों को डस लेती है। मानवता सिसक उठती है। इसका बहुआयामी प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में विश्व जैविक आपदा कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसके कारण हुए संगरोध के दौरान विभिन्न देशों में उनकी भगौलिक पृष्ठभूमि के अनुरूप अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं।

सबसे पहली तो यही कि इस आधुनिक युग में भी अनेक वर्षों के बाद लोगों को इतनी लंबी अवधि के लिए घरों में कैद होकर रहना पड़ रहा है। वैसे तो यह नये व्यवहार ने सभी का जीवन प्रभावित किया है, तो भी इस बात का प्रभाव महिलाओं से अधिक पुरुषों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सामान्यतः अनेक महिलाएँ गृहिणी हैं। घरों में रहने की उनकी आदत सी होती है। वर्तमान में कार्यरत लोगों के भी घर से काम करने के कारण घर में रहने के कारण ज्यादातर आपस में सम्पर्क रहना पड़ रहा है। आधुनिक युगीन एक अहम तत्व 'स्पेस' जो लोगो के मध्य स्थापित हो चुका था, वह भंग होता नजर आ रहा है। जिसके कारण उनमें तनाव, कुण्ठा आदि जैसे मानसिक असन्तुलन उभरने लगे हैं। इस महामारी के बाद उपजे हालात और भविष्य की चिंताओं ने भी मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित किया है। पर हालात जो हो संकट के दौर में मनुष्य होने के नाते हमें मनुष्यता नही छोड़नी है।

हालिया कुछ घटनाओं को हम इस रूप में देख सकते हैं। विदेशों में पिछले दिनों विवाह-विच्छेद की घटनाओं में वृद्धि होने लगी है। देश के विभिन्न भागों से मानवता को लगाते, विभिन्न प्रकार के समाचार सुनने को मिल रहे हैं। इस संगरोध के बीच एक बेटी ने मीलों की यात्रा तय करके उससे मिलने पहुँचे अपने पिता को घर से बाहर निकाल दिया। दूसरी तरफ झारखंड के रांची में एक बड़ी बहन ने बढ़ते संगरोध के पश्चात अपनी बहन को, उसके पति व साल भर के छोटे बच्चे के साथ घर से चले जाने को विवश किया। एक वयस्थ पर कोरोना का संदेह होने के कारण उनके परिजनों ने अमानवीय तरीके से दूरी बना ली। यहाँ तक कि उनकी पत्नी ने खाना भी पड़ोसी के कहने पर दिया। जाँच पश्चात नेगेटिव पाए जाने के बाद बुजुर्ग वापस अपने घर जाने से इनकार कर बिना बताये कहीं चले गये। समाचार हैं कि कुछ जगह किराया न भर पाने की स्थिति में, या किराये में छूट के लिये यौन शोषण के प्रयास किये गये हैं। मजबूरों की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाया जा रहा है। इसी तरह की ऐसी अनेक घटनाएँ हो रही होंगी जो लोगों के संज्ञान में ही न होंक। इस संगरोध के बाद गिरती अर्थव्यवस्था के कारण उभरने वाली सम्भावित समस्याओं के परिणाम आने अभी शेष हैं। वर्गभेद तेजी से उभरकर आएगा। मजबूरी में अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु आसामाजिक तत्व भी उभरेंगे, जो निश्चित रूप से इंसानियत के लिये हितकर न होगा।

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