इस अंक की विशिष्ट लेखिका: दीपक शर्मा

दीपक शर्मा

'अतिथि सम्पादक', 'इस मास के लेखक', 'मैं और मेरा रचना संसार', 'अमुक देश के कवि', 'अमुक भाषा की रचनाएँ' आदि जैसे कई प्रयोग हमने  सेतु के अंग्रेज़ी संस्करण में सफलतापूर्वक किये हैं जो दुर्भाग्य से हिंदी में नहीं हो सके, सच कहूँ तो, किये ही न जा सके। कारण की चर्चा व्यर्थ है, क्योंकि हिंदी की दुर्दशा के कारण निर्मल जल की तरह स्पष्ट हैं। तो भी 2020 के इस अंतिम अंक के साथ हम हिंदी संस्करण में 'इस अंक के विशिष्ट लेखक' स्तम्भ जोड़ने का साहस कर रहे हैं, इस आशा के साथ कि हम इसे आगामी अंकों में जारी रख सकेंगे। इस स्तम्भ के प्रथम लेखक के रूप में हमने 'दीपक शर्मा' को चुना है। भविष्य के लिये 'इस मास के लेखक' के लिये आपके सुझावों और सामग्री का स्वागत है। (साथ ही, सेतु के आगामी अंक के विषयाधारित अतिथि सम्पादन के समुचित प्रस्तावों का भी स्वागत है।)

जीवन का शायद ही कोई क्षेत्र हो जो दीपक शर्मा की कहानियों से छूटा हो। लेकिन समाज के दलित, वंचित और उपेक्षित वर्ग का पक्ष, किसी शब्दाडम्बर के बिना शायद ही किसी समकालीन हिंदी लेखक ने उन जैसे प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया हो। उनकी रचनाओं का परिवेश जितना व्यापक है, उतना ही प्रामाणिक भी। उनके जैसी प्रामाणिकता हिंदी में कहीं और नहीं दिखती है, और न ही वैसा विस्तार। बीसियों पत्रिकाओं व अनेक संकलनों में अब तक सैकड़ों कहानियाँ आ चुकी हैं। कहानी की कथावस्तु, पात्र, पृष्ठभूमि, और वर्णित विषय  कुछ भी हो, मज़ाल है किसी रचना में कोई तथ्यगत त्रुटि मिले। यह श्रम मुख्यधारा के हिंदी साहित्य में दुर्लभ ही नहीं, लगभग अनुपस्थित है। और यह सब रहते हुए भी दीपक जी की कहानियाँ रोचक, संक्षिप्त, और सरल होती हैं। भाषा, शैली, व्याकरण, वर्तनी, सौंदर्य आदि में किसी भी रूप में कमतर न होते हुये उनकी छोटी से छोटी कहानी भी आपको अक्सर एक नया शब्द दे जाती है।

उनके पात्र, विशेषकर नारीपात्र आत्मविश्वासी और दृढ़ हैं। ऐसा नहीं कि वे विजेता ही हों, लेकिन वीर योद्धा अवश्य हैं। मर्मस्पर्शी तो उनकी सभी कहानियाँ हैं, मार्मिक भी। लेकिन एक और बात जो उनकी अनेक कथाओं की विशेषता है, वह है, असहज करने का भाव। ये कहानियाँ केवल मनोरंजन करके चली जाने वाली कहानियाँ नहीं हैं। ये कथाएँ आपको हिला देती हैं। ये आपको ऐसे संसार में ले जाती हैं जिससे आप अपने रोज़मर्रा के जीवन में नितांत अपरिचित रहे थे। जब कहीं पढ़ा कि निर्मल वर्मा ने कहा कि 'उनकी कहानियाँ विस्मित करती है' तो मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। आश्चर्य इतना ही है कि अन्य समकालीन लेखकों से नितांत भिन्न धरातल पर बैठी इस प्रभावी लेखिका की कहानियों की हिंदी साहित्य में वैसी चर्चा होती नहीं दिखती जैसी किसी भी अन्य भाषा में होने पर हुई होती। 

हिंदी कथा-जगत में गुणवत्ता और प्रामाणिकता के स्तर पर विश्व की किसी भी भाषा के साहित्य के सामने टिकने वाला यदि केवल एक नाम मुझे लेना हो तो मैं नि:संदेह कहूंगा - दीपक शर्मा। यदि आपकी रुचि हो तो मेरी उनसे एक अति-संक्षिप्त वार्ता सेतु अंग्रेज़ी के 'फ़रवरी 2020' अंक में निम्न लिंक पर उपलब्ध है: 
A Quick Chat with Deepak Sharma


इस अंक में हम उनकी तीन रचनाएँ लेकर उपस्थित हैं:

उनकी निम्न कहानियाँ सेतु में पहले प्रकाशित हो चुकी हैं:

  


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