कविताएँ: अनुभव राज

अनुभव राज
1. उम्र का परिंदा एक और उड़ चला

उम्र का परिंदा एक और उड़ चला

रात काली गहरी थी
यादें न सुनहरी थी
साल बीस सबका उल्लास हर चला

सबक सिखाया बीस ने
रिश्तों को तू संभाल
साँसों की एहमियत समझ
सेहत का रख ख्याल

जीवन मोबाइल में बसा यूट्यूब में ढला
उम्र का परिंदा एक और उड़ चला

यादों की डायरी खुली
एल्बम से निकले चित्र
साज़ों की छेड़ सरगम
मिल बैठे कितने मित्र
 
बच्चा बुजुर्ग के दिये संस्कार में ढला
उम्र का परिंदा एक और उड़ चला

आओ इक्कीस साल का
स्वागत करें खुल के
हर पग धरें विश्वास से
संकल्प ले दिल में

संकट से न घबराए मन फौलाद में पला
उम्र का परिंदा एक और उड़ चला
***


2. हरियाता हुआ मैं

नदी किनारे खड़ा पेड़
बुझाता है अपनी प्यास 
नदी की ममतामयी लहरों से
बतियाता है उसकी कल कल ध्वनि से
लेता है नमी उसकी गीली मिट्टी से 
और फैला लेता है अपनी जड़ें 
धीरे धीरे उनमें

आकाश
उस पेड़ को हरा रखने
करता है कभी अपने प्यार की वर्षा
तो कभी 
निकाल देता है सूरज
ताकि पेड़ कर सके सहन
संघर्ष की धूप को भी

हवा भी उसकी डालियों पे झूम
फुसफुसाती है पत्तों से कानों में
डालती है झूले और
गाती है चिड़ियों संग संगीत

उस वृक्ष सा मैं
धरती सी मेरी माँ
आकाश से मेरे पिता और 
हवा सी मेरी बहन
यही तो है मेरी दुनिया
जिनसे हरियाता रहता हूँ मैं हमेशा..
***



3. मेरे साथी 

सुबह सवेरे किरणें आयी, 
मुझसे कह गयीं जागो
देर तलक न सोओ तुम
संग समय के भागो

घर से निकला बाहर तो 
बादल लगा बुलाने
सूरज भी कर आँख मिचौली
मुझको लगा रिझाने

कलियों ने फिर पास बुलाया
गंध लगी बिखराने
हँस कर बोलीं तुम भी गाओ
भौरों के संग गाने

हवा मचलकर लिपट गयी
पैरों से मेरे देखो
बोली चलते चलो हमेशा
बढ़ते रहना सीखो

बूंदे छमछम करती आई
बोली तुम भी आओ
छोड़ो मायूसी ये सारी
उठ्ठो जश्न मनाओ

सोचूँ कितने सुंदर प्यारे
संगी साथी मेरे
इनके संग ही खुशियों के अब
होते सुखद सवेरे।
***

मुज़फ़्फ़रपुर निवासी अनुभव राज ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। कई  कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं, सेतु में यह प्रथम प्रकाशन है।
ईमेल: anubhvraj808@gmail.com
चलभाष: +91 808 450 5505
 

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