कहानी: मिसेज लोबो स्पेशल

शैलजा कौशल

-शैलजा कौशल


चमचमाते सेट पर कैमरे के सामने बैठी’ सना लोबो’ टीवी एंकर को इंटरव्यू दे रही थी। यह एक बड़ा टीवी चैनल था, जिन्होंने सना को इंटरव्यू के लिए अपने स्टूडियो में आमंत्रित किया था। सना लोबो का फूड कॉलम ‘मिसेज लोबो स्पेशल’ सारे देश में मशहूर हो रहा था। कॉलम में सना हर बार एक नई डिश का जिक्र करती और उसे एक कहानी से जोड़ देती।

’सना, आपके कॉलम का नाम ‘मिसेज लोबो स्पेशल’ है। आप अभी 21 साल की हैं। इतनी सारी डिशिज के बारे लिखती हैं। आप हमें कॉलम के इस अनूठे नाम के पीछे का राज बताइये।’ टीवी एंकर ने सना लोबो से पूछा।

साल 2016 में शनिवार शाम की बात है। घर में चारों ओर चहल पहल थी। घर के कोने ताजा फूलों से महक रहे थे। ड्राइंगरूम में पीली रोशनी वाला शेन्डिलियर जल रहा था जिससे घर और अधिक खूबसूरत लग रहा था। हर हफ्ते की तरह इस शनिवार भी लोबो परिवार के घर मेहमान खाने पर आ रहे थे। लोबो परिवार असल में गोआ से नाता रखता है लेकिन दशकों पहले मिसेज लोबो अपने बिजनेसमैन पति एन्थनी के साथ दिल्ली में आ बसी थीं। साथ में दो जुड़वाँ बेटे भी थे। अब सालों बीत चले हैं। दिल्ली में ही दोनों बेटे जैमी और रोबो की शादी हुई। और जैसा कि होता है, शादी भी जुड़वाँ लड़कियों के साथ हुई थी। दोनों बहनें लोबो परिवार की तरह ही कैथेलिक क्रिश्चियन परिवार से हैं। जैमी और शैरी का एक दो बेटे हैं। रोबो और इलिसा की एक बेटी है। इनमें से रोबो और इलिसा की बेटी सना का अपनी दादी ‘मिसेज मैरी लोबो’ से बेहद प्यार है। वह अपनी दादी के बहुत करीब है। सना इसी साल 18 की हुई है। मिसेज लोबो 85 साल की हैं। दोनों में गहरी दोस्ती है।

मिसेज मैरी लोबो कमाल का खाना बनाती हैं। अपने समय में वह मशहूर कुक रही हैं। जब जैमी और रोबो छोटे थे तब अपने रिश्तेदारों और दोस्त परिवारों में मिसेज लोबो की डिशेज़ बहुत लोकप्रिय रही। घर में क्रिसमिस पार्टी हो या जन्मदिन मिसेज लोबो अकेले ही 50 लोगों का खाना पकाने लेती। डिशेज़ में शायद ही कोई ऐसी नॉनवेज डिश हो जो मिसेज लोबो को बनानी न आती हो। वैजिटेरियन खाना भी वह पका लेती लेकिन नॉनवेज पकाने का वह खास शौक रखती थीं। अब किचन शैरी और इलिसा के हवाले थी। मिसेज लोबो को कोई बीमारी तो नहीं थी लेकिन उम्र अधिक हो जाने के कारण वह किचन में कम ही जातीं। हाँ, हर वीकेंड मेहमानों के लिए मिसेज लोबो एक खास डिश जरूर पकातीं। सभी की खास फरमाइश पर। अब वे लम्बे स्टूल पर बैठकर गैस पर काम करतीं।

मिसेज लोबो की एक और खास बात जो मशहूर थी। उन्होंने अपनी डिशेज़ की रेसिपी कभी किसी को नहीं बताई। वे स्वार्थी नहीं थीं, बहुत नेकदिल थीं, लेकिन अपनी खासियत को वह अपनी वसीयत कहतीं। अक्सर समय आने पर किसी को देने की बात कहतीं।

मिसेज लोबो जब डिश पकातीं तो किचन में किसी का भी जाना मना था। काँच का दरवाजा बंद हो जाता। वे धीरे धीरे डिश को प्यार से पकातीं। मसाले और कच्चा सामान वह किचन से ही इस्तेमाल करतीं। पर खाने में क्या, कितना, कैसे और कब डालना है, सब इसी का खेल था। सना को भी कभी कभी अपनी दादी की तरह किचन में काम करना अच्छा लगता। उसे लिखने का शौक भी था। वह अक्सर कहती कि अगर दादी ने उसे डिशेज़ की रेसिपी बताई तो वह किसी मैग्जीन या अखबार में खाने पर एक कॉलम लिखना शुरु करेगी। लेकिन मिसेज लोबो ने डिशेज़ का असली नुस्खा किसी को बताया ही नहीं था। सना को भी नहीं। अक्सर बातों बातों में सना घुमा फिराकर मिसेज लोबो से स्वादिष्ट खाने के राज की बातें पूछती पर दादी बात को दूसरी और कहानियों में उलझा देतीं और सना मन मसोस कर रह जाती।

नॉनवेज में कोई ऐसी डिश नहीं थी जो मिसेज लोबो ने न पकाई हो। साथ ही वे इस उम्र में भी नई डिश सीखने के लिए हमेशा तैयार रहतीं।

आज उन्होंने मटन कोरमा पकाया है। किचन में करीब दो घंटे में उन्होंने बारह लोगों के लिए इसे बनाया है। 
‘दादी, क्या मटन कोरमा तैयार है। मुझे दो कटोरी में।’ सना दौड़ती हुई किचन में आई। दादी ने अपनी जान सना को कटोरी में दो चम्मच दिये टेस्ट के लिए।

‘वाओ दादी। सुपर से भी उपर। बहुत टेस्टी बना है।’ सना ने घर में घूम घूमकर दादी के मटन कोरमा की तारीफ की जो वह हमेशा करती है। वह अपनी दादी की प्रमोटर भी है। खास तारीफों की वजह से ही सभी मिसेज लोबो की डिशेज़ के और दीवाने हो जाते। मेहमान आए। सभी कुछ खाया लेकिन मटर कोरमा चट कर गए। यहाँ तक कि मटन कोरमा का बर्तन बिलकुल साफ हो गया जैसे कि उसमें कुछ रखा ही न हो।

इसी तरह हर पार्टी और गेट-टूगेदर की जान होती मिसेज लोबो की डिशेज़। एक रोज कडक सर्दी के दिनों में मिसेज लोबो बीमार हो गईं। डॉक्टर ने रिपोर्ट्स देखकर बताया कि उन्हें निमोनिया हुआ है। परिवार ने उनकी खूब सेवा की और एक हफ्ते बाद उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया। कुछ ही दिनों में किसी फूल की तरह कुम्हला गईं थीं। कमजोर पड़ गईं और खाना पीना भी बहुत कम कर दिया। डॉक्टर का मानना था कि मिसेज लोबो पर उम्र अपना असर दिखा रही है और अब उन्हें आराम की जरूरत है। तरह तरह के टॉनिक डॉक्टर ने लिखकर दिए लेकिन जब भी दवाई लेने की बारी आती तो वह आना-कानी करने लगतीं। वे अपने कमरे में पलंग पर लेटी सामने की खिड़की की ओर ताकतीं रहतीं। किसी से कोई बात न करतीं। सना उनसे मजाक करती कि जब वे स्वस्थ हो जाएंगी तो वह उनके हाथ की बनी फिश करी खाएगी। पर मिसेज लोबो ने तो जैसे हँसना ही छोड़ दिया था। सना अपनी दादी की इस कमजोर तबीयत को देखकर दुखी रहती। दोनों बेटे भी उनके पास घंटों बैठे रहते। 

उस दिन सना अपनी दादी के सिरहाने बैठी किताब पढ़ रही थी। मिसेज लोबो लेटी थीं। उन्होंने सामने की अलमारी की ओर अंगुली की। सना ने अलमारी खोलकर ढूंढ़ना चाहा पर कुछ न मिला। इसके बाद वे कोमा में चली गईं और दो दिन बाद वे दुनिया से चलीं गईं। 

उनके जाने के बाद घर में दावतों का सिलसिला थम सा गया। किचन में वह रौनक अब देखने को न मिलती। मिसेज लोबो के हाथ के बनाए पकवानों को रिश्तेदार और दोस्त परिवार बहुत याद करते और फोन पर पकवानों से जुड़ी तरह-तरह की बातें लोबो परिवार को सुनाते। सना ने एक दिन दोपहर को अपनी दादी की अलमारी खोली। कुछ देर ढूंढ़ते रहने के बाद एक कपड़े में बंधी कोई चीज सना को मिली। खोला तो यह चाबी थी। शायद यह अलमारी के बंद लॉकर की चाबी हो। पर उनके पास तो कोई गहना नहीं था। सोचते हुए सना ने लॉकर खोला। भीतर तक हाथ लगाकर देखा तो एक डायरी उसके हाथ लगी। 

‘सना के लिए-मिसेज लोबो स्पेशल’, उस डायरी के बाहर पेन से लिखा था। देखकर उसकी आँखों से मोतियों की तरह बूंदें बरस पड़ीं। खोला तो यह मिसेज लोबो की रेसिपी डायरी थी। न जाने कितनी विधियाँ उन्होंने यहाँ-वहाँ लिखी थीं। उन्होंने खाने को और डिशेज़ को स्वादिष्ट बनाने के हजारों नुस्खे डायरी नोट किए थे। यह उनके अपने नुस्खे थे।

यह साल 2020 है। सना अब खाने पर लिखती है और एक मशहूर फूड राइटर है। बहुत लोकप्रिय हो चुके सना के कॉलम को नाम है ‘मिसेज लोबो स्पेशल’।  


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