शहीदों के बच्चे: शशि पाधा

शशि पाधा

- शशि पाधा


जीवन से युद्ध
(विश्व के सभी शहीदों के बच्चों को समर्पित)

बड़े हो जाते हैं
शहीदों के बच्चे
बड़ा होने से पहले ही।

पढ़ लेते हैं माँ की
आँखों की भाषा
जान जाते हैं मौन
रुदन की परिभाषा
रोक लेते हैं आँसू
ढुलकने से पहले ही।

पहनते हैं पिता की वर्दी
लम्बी हो या बड़ी
गर्व से  दिखाते उनकी
टोपी और छड़ी
पूरे ही आते हैं फौजी बूट
पाँव बढ़ने से पहले ही।

माँ को पकड़ते
कभी चलते चलते
देखते चहुँ ओर
कुछ डरते-डरते
चढ़ा देते हैं साँकल
साँझ ढलने से पहले ही।

करते हँसी ठिठोली
मुस्कान की आस में
ढूँढते इक मूरत
तारक आकाश में
मान लेते हैं हर बात
मनाने से पहले ही।

करते हैं रोज़
जीवन से युद्ध
भीड़ में ढूँढते
कोई गाँधी या बुद्ध
समझ लेते हैं गीता
समझाने से पहले ही।

न कभी लौटेगा
वो मासूम बचपन
चुप चुप मनाएँ
दीवाली-जन्मदिन
भुला देते हैं सारे सपने
नींद आने से पहले ही।

बस यूँ ही बड़े हो जाते हैं वे
उम्र से पहले ही।।
***


हम लौटें कल या न लौटें
(युद्धरत सैनिकों का देश वासियों को आश्वासन संदेश)

ऐ हिमालय की सर्द् हवाओ!
इक संदेश मेरा पहुँचा देना
है देश सुरक्षित इन हाथों में
यह बात उन्हें बतला देना।

वीरत्व सुना था लोरी में
अमरत्व मिला था झोली में
जोरावर* ने जो रणघोष किए
वो गूँज रहे  हर टोली में
  अब लोहा लेना दुश्मन से
     यह बात उन्हें बतला देना।

रग-रग में माँ का दूध मेरे
हर साँस में खेत की गन्ध मेरे
जन जन का स्नेह है संग मेरे
 बाँधी जो हाथ में बहनों ने
राखी का वह धर्म है याद मुझे
     यह बात उन्हें बतला देना।

वीर अर्जुन हैं आदर्श मेरे
उपदेश कृष्ण** के संग मेरे
शत्रु कितने भी वार करे
माँ की ममता कवच बने
संग देश का आशीर्वाद मुझे
   यह बात उन्हें बतला देना।

योद्धाओं के प्रतिमान हैं हम
 इस देश का गौरव मान हैं हम
  है रक्षा सेवा धर्म-कर्म
   जग जननी का अभिमान हैं हम
   शत्रु के लिये महाकाल बने
       यह बात उन्हें बतला देना।

हम अपना धर्म निभायेंगे
शत्रु का भरम मिटायेंगे
कोई पर्वत नदिया रोके न
दुनिया को सीख सिखायेंगे
    जन जन की रक्षा ढाल हैं हम
    यह बात उन्हें बतला देना।

 हम लौटें कल या न लौटें
न आँच धवज पर आयेगी
इस मातृ भूमि के चरणों में
चाहे जान हमारी जायेगी
  है अमरत्व का वरदान हमें
   यह बात उन्हें बतला देना।
       यह बात उन्हें बतला देना।
***

*जनरल जोरावर सिंह 1786-1841) भारत के महान सेनानायक थे। उन्होने लद्दाख, तिब्बत, बल्टिस्तान, इस्कार्दु आदि क्षेत्रों को जीता था जिस कारण उन्हें 'भारत का नैपोलियन' कहा जाता है। महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने भी उनका उल्लेख किया है।
 ** “हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्,जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्
         तस्मात् उतिष्ठ कौन्तेय  युद्धाय कृतनिश्चय:”

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