समीक्षा: भारतीय रेल के साहित्यकारों का दस्तावेज: भारतीय रेल के हिंदी सेवी

समीक्षक: आचार्य नीरज शास्त्री

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पुस्तक: भारतीय रेल के हिन्दी सेवी 
ISBN: 978-81-951887-0-3
रचनाकार: दिनेश पाठक "शशि"
प्रकाशक: जवाहर पुस्तकालय, मथुरा 281001
मूल्य: ₹ 650.00 रुपये, प्रकाशन वर्ष: 2021
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भारतीय रेल का संपूर्ण विश्व और एशिया महाद्वीप में विशिष्ट स्थान है। इसका कारण मात्र इसकी लंबाई, इसके स्टेशनों की संख्या अथवा प्रतिदिन इसके द्वारा ढोए जाने वाले सामान अथवा यात्री ही नहीं हैं अपितु भारतीय रेल के कर्मचारी भी हैं।

       भारतीय रेल मात्र भारत की अर्थव्यवस्था को ही नहीं संभालती अपितु इसके द्वारा भारत के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी है। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में भारतीय रेल ने ऐसे साहित्यिक नक्षत्रों को प्रकाशित किया है, जिनकी चमक आज विश्व पटल पर दिखाई दे रही है।

           हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार साहित्य गौरव डॉ दिनेश पाठक 'शशि' जी ने इन्हीं साहित्यिक नक्षत्रों की चमक से जन सामान्य को परिचित कराने के उद्देश्य से रची है- 'भारतीय रेल के हिंदी सेवी'।

आचार्य नीरज शास्त्री
         इस ग्रंथ में विद्वान लेखक द्वारा भारतीय रेल से जुड़े कुल एक सौ इक्यावन साहित्यकारों के जीवन पर प्रकाश डाला है। इन साहित्यिक नक्षत्रों में सूर्य के समान आभा से समन्वित साहित्यकार का नाम है आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी। आचार्य द्विवेदी जी हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान और लेखक होने के साथ-साथ हिंदी साहित्य जगत की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका 'सरस्वती' के संपादक थे। आचार्य द्विवेदी जी के नाम पर ही हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल के दूसरे युग द्विवेदी युग को पहचान प्राप्त हुई। आधुनिक हिंदी लेखकों में भारतेंदु हरिश्चंद्र के बाद सबसे उद्भट विद्वान और प्रभावशाली लेखक आचार्य द्विवेदी जी ही थे। आचार्य द्विवेदी जी ने भारतीय रेल में भी नौकरी की थी। प्रसिद्ध फिल्म सर्जक विमल मित्र जी का भी उल्लेख इस ग्रंथ में हुआ है।

          हिंदी फिल्मों के सुविख्यात गीतकार शैलेंद्र ने लगभग एक हजार गीतों की रचना कर कीर्तिमान स्थापित किया था। वे शैलेन्द्र जो फिल्मकार राज कपूर के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण और अनन्य हुआ करते थे, वे भी भारतीय रेल के प्रकाशमान नक्षत्रों में थे।

दिनेश पाठक ‘शशि’
इनके अलावा गीतकार गुलशन बावरा, पद्म श्री के. पी. सक्सेना , सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार  गोपाल चतुर्वेदी तथा लब्धप्रतिष्ठित कवि किशन सरोज भी भारतीय रेल के चमकते नक्षत्र हैं।

       पं. विश्वंभर नाथ तिवारी ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में ' 'आर्यावर्त से इंडिया बरास्ते भारत'
नामक ग्रंथ की रचना की, जो उनके एक सौ दो वर्ष के जीवनकाल में ही प्रकाशित हुआ। इस ग्रंथ को लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने विश्व कीर्तिमान  स्वीकार किया है।

श्री विमलेश चंद्र के भारतीय रेल से संबंधित 70,000 फोटो गूगल पर तथा 275 वीडियो यूट्यूब पर अपलोड हैं। इसके लिए इनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

    श्री सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा' बचपन से ही विकलांग होते हुए भारतीय रेल के उच्च पदों तक पहुंचे। यह भी एक कीर्तिमान है।

      श्री संजीव जायसवाल 'संजय' की चित्र पुस्तक ' वह हँस दिया' का विश्व की 115 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
 
           ऐसे ही एक सौ इक्यावन साहित्यकारों की खोज कर और उनके परिचय प्राप्त करने में विद्वान लेखक ने वर्षों तक कठोर परिश्रम किया है। इस प्रकार यह ग्रंथ भारतीय रेल रूपी सागर के मंथन से प्राप्त वह अमृत है जिसने हिन्दी साहित्य और भारतीय संस्कृति को सींचा है। यह ग्रंथ भारतीय रेल के इतिहास में निश्चित ही एक दस्तावेज है जो भविष्य में शोधार्थियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

        इस अद्भुत ग्रंथ के प्रकाशन पर मैं साहित्य गौरव डॉ दिनेश पाठक'शशि' जी को हार्दिक बधाई देता हूँ और कामना करता हूँ कि यह ग्रंथ उनके सुयश में संवर्धन करेगा।

7 comments :

  1. समीक्षा प्रकाशन हेतु हार्दिक आभार 🙏🙏🙏
    आचार्य नीरज शास्त्री

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  2. बहुत सुंदर समीक्षा की है शास्त्री जी। धन्यवाद।

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  3. बहुत खूबसूरत समीक्षा के लिए आदरणीय आचार्य नीरज शास्त्री जी का हार्दिक आभार।

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  4. बहुत खूबसूरत समीक्षा के लिए आदरणीय आचार्य नीरज शास्त्री जी का हार्दिक आभार।

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  5. बहुत खूबसूरत समीक्षा के लिए आदरणीय आचार्य नीरज शास्त्री जी का हार्दिक आभार

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  6. बहुत खूबसूरत समीक्षा आदरणीय।आभार एवं धन्यवाद

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