कविताएँ: अनुभव राज

मुज़फ़्फ़रपुर निवासी अनुभव राज ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। कई कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
ईमेल: anubhvraj808@gmail.com
चलभाष: +91 808 450 5505
अनुभव राज


स्मार्ट वॉच

डिजिटल वाच दिला दो नानी
जिसपे असर करे न पानी
जिसका बैंड हो रंग बिरंगा
जिसका हो न दूजा सानी

मीठे गीत सुनाकर हमको
रोज़ अलार्म बजाए
सुंदर सुंदर सपनों से ये
प्यार से हमें जगाए

दिनभर कितने कदम चले हैं
हमको जो बतलाए
मौसम के हालात बताए
दिशा ज्ञान दे जाए

रोज़ सुबह हम झटपट उठकर
विद्यालय को जाएँ
समय की नब्ज पकड़ कर नानी
ख़ूब बड़े बन जाएँ

दीवार घड़ी न हमको भाए
टिक टिक शोर मचाती
डिजिटल वाच दिला दो नानी
मुन्ना लिखता पाती
***


क्या बनोगे?

छोटा सा हूँ फिर भी मुझसे
पूछें सब तुम क्या बनोगे?

मैं तो चाहूँ चिड़िया बनकर आसमान की सैर करूँ
या फिर पायलट बनकर ऐरोप्लेन में अपने पैर धरूँ
स्टेशन मास्टर बनकर या फिर ट्रेन को मैं चलवाऊँ
या एनाउंसर बनकर सबको ट्रेन का समय बताऊँ

कभी सोचता डॉक्टर बनकर सेवा ख़ूब करूँ
दुखियों की मैं मदद करूँ और पैसे भी न लूँ
या फिर कवि बन पेड़ के नीचे सुंदर गीत लिखूँ
गुनगुन गुनगुन गाये हवा पक्षी को मीत लिखूँ

मम्मी कहती टीचर बन जा पापा कहते अफसर
दीदी कम्प्यूटर का कहती भइया इंजीनियर
मैं तो चाहूँ ब्लॉगर बनना दिनभर घूमते रहना
या फिर माउंटेनियर बनना ऊँचे पर्वत चढ़ना

पर इन सबसे पहले चाहूँ मैं हो जाऊँ खड़ा
रहूँ न आश्रित कभी किसी पे मैं हो जाऊँ बड़ा।
***

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