कहानी: उचक्के

नीना सिन्हा


"मिसेज सिन्हा! घर में ताला बंद करके आप दूसरे शहर में बैठी हैं, आजकल आपके सुनसान पड़े घर के निकट उचक्कों का जमावड़ा लगा रहता है। वे शाम से आधी रात तक आपके गेट के पास बैठकर नशा करते हैं। उन्होंने हम कॉलोनी वालों का जीना दूभर कर रखा है। कॉलोनी का माहौल अराजक हो गया है। रात को सोता पड़ते ही चोरियाँ होने लगी हैं। लड़कियों को आते-जाते उनकी छींटाकशी झेलनी पड़ती है। शाम के झुटपुटे में चेन स्नैचिंग की घटनाएँ भी हुई हैं।

नीना सिन्हा
आज तो उन उचक्कों ने हद ही कर दी, तभी मुझे फोन करना पड़ा आपको। आपके घर के पास के दोनों बिजली के खंभों के स्ट्रीट लाइट के जंक्शन बॉक्स से तार निकाल आपके घर और आसपास अंधेरा कर दिया गया है। निठल्ला केयरटेकर आपका, बस अपनी धुन में रहता है, कॉलोनी में आँधी आये या तूफान, उसकी बला से", मिसेज सिंह का फोन था।

नीता ने तुरंत फोन करके केयरटेकर रामा की पत्नी शांति से पूछा, "मुझे कॉलोनी की जो ख़बरें मिल रही हैं, क्या सच्ची हैं?"

"हाँ दीदी! उन लफंगों से हमें भी डर लगता है। उनकी तादाद कभी भी सात-आठ से कम नहीं होती है। हम उनके मुँह लगने से बचते हैं। आप भैया के साथ कुछ दिनों के लिए आ जाएँ, अपनी आँखों से खुद ही देख लें।"

अगले ही दिन मिसेज मेहता की कॉल आयी, "आपका सुनसान घर तथा आपके गेट पर बंद होता रास्ता पूरी कॉलोनी के लिए सर दर्द बनता जा रहा है, आप को ध्यान देना चाहिए! आपके रास्ते पर की स्ट्रीट लाइट भी खराब हो गई है। कुछ नजर नहीं आता पर किसी ने उन उचक्कों के साथ अंधेरे में एक पेशेवर लड़की देखी है।"

नीता बुरी तरह घबरा गयी, "मैं बाहर हूँ, पर आप लोग तो वहीं मौजूद हैं। एरिया के थाने में लिखित शिकायत कीजिए। हमारी कॉलोनी में पुलिस अधिकारी और राजनीतिज्ञ भी रहते हैं, शिकायत के बाद पुलिस अवश्य संज्ञान लेगी। कॉलोनी मीटिंग करके भी इस समस्या का हल ढूँढा जा सकता है।" नीता ने संयमित स्वर में समझाने का प्रयास किया।

कुछ दिनों के बाद नीता गृहनगर जाने के लिए ट्रेन की टिकटें देख रही थी, तभी मिसेज त्यागी का फ़ोन आया, "आपको घर इस तरह निर्जन नहीं छोड़ना चाहिए था। हमारी शांत कॉलोनी चोर-उचक्कों का गढ़ बनती जा रही है। उसे बेच क्यों नहीं देतीं? बहुत अच्छे दाम मिल जाएँगे। आपका महासुस्त केयरटेकर, क्या खाकर सुरक्षा करेगा प्रॉपर्टी की।"

अलग-अलग लोगों के बारंबार फोन आने से नीता की चिंता बढ़ती जा रही थी, कहीं उचक्के ताला तोड़कर उसके घर में ही झाड़ू न फेर दें। आखिर पति के साथ होमटाउन वाले घर जा पहुँची।

अगले दिन कुछ युवाओं को अपने गेट के इर्द-गिर्द बैठा देखा तो उन्हें समझाने के स्वर में कहा, "बच्चों! तुम लोग यहाँ मत बैठा करो! तुम्हारे कारण हमें कॉलोनी वालों से कितनी बातें सुननी पड़ती है, इतने फोन आए कि थक-हार कर हमें यहाँ आना पड़ा।”

बच्चे अचानक से हुई बात से घबरा गए। कुछ क्षणों के बाद एक ने कहा, "आंटी! आपके घर के पास पेड़ों की सघन छाया है, जिससे यहाँ हवादार-ठंडक बनी रहती है। आप आसपास नज़रें दौड़ाएँ, ऐसे बड़े-बड़े पेड़ कहीं भी नहीं हैं। अंकल, आंटी! हम लोग यहाँ बैठकर मोबाइल पर गेम खेलते हैं, कुछ गप्पें मार लेते हैं। आप मना करेंगी तो हम यहाँ नहीं बैठेंगे। हम सब बगल की कॉलोनी के ही हैं।"

नीता को तुरंत कोई जवाब न सूझा, पर वस्तुस्थिति को देखते हुए कुछ बच्चों के मोबाइल नंबर ले लिए और बोली, “यहाँ कोई परेशानी हुई तो तुम लोगों को जवाब देना पड़ेगा।”

शांति परेशान नजर आई, कहा, "दीदी! आपने बेकार में ही इन्हें टोका, आप तो वापस चली जाएँगी, बाद में ये हमें परेशान करेंगे। इन्हें लगेगा मैंने ही आपसे शिकायत की होगी।" नीता ने शांति की बातों का कोई उत्तर न दिया।

एक-एक करके उन सभी पड़ोसियों से मुलाकात हुई, जिनके कारण उसे आना पड़ा था। बात करने की कोशिश की पर उनके रवैये में पल्ला झाड़ने की नीति साफ नजर आई। सार निकला, "हमने आपके घर की सुरक्षा के लिए पड़ोसी धर्म के निर्वहन हेतु कॉल किया था। सब अगल-बगल कॉलोनी के ही बेरोज़गार लड़के हैं। रात के वक्त नशा, मौज़-मस्ती के लिए बैठा करते हैं। कभी-कभार उन्हीं में से कोई अपनी गर्लफ्रेंड को ले आता है। अंधेरा कोना उन्हें सुरक्षित प्रतीत होता होगा। अपने घर की समस्याओं से अपने तरीके से निपटिए, सारी कॉलोनी का इसमें क्या काम?" 

नीता ने नोटिस किया कि बड़ी उम्र के बच्चों ने आना छोड़ दिया। कुछ अन्य बच्चे आते रहे, पर कोई शरारत नहीं की। कुछ समय बाद नीता वापस पति की पोस्टिंग की जगह लौट गई।

कुछ दिनों के बाद उस कॉलोनी में उड़ती-उड़ती खबर आई कि नीता का घर बिकने वाला है, क्योंकि दोनों पति-पत्नी तो अन्यत्र बसे ही थे, अब उनके बच्चे भी अन्य शहरों में जा बसे हैं। यह प्रॉपर्टी उनके परिवार से संभाली नहीं जा रही। नीता हतप्रभ थी कि करोड़ों की प्रॉपर्टी को औने-पौने दामों में खरीदने के इच्छुक लोगों में वे पड़ोसी भी थे, जिनके फोन कॉल से परेशान होकर उसने नीता ने गृह नगर जाने का निर्णय लिया था!
***



निवास: पटना (बिहार)
ईपता: maurya.swadeshi@gmail.com 
पटना साइंस कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से जंतु विज्ञान में स्नातकोत्तर। पिछले दो वर्षों से देश के समाचार पत्रों एवं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लघुकथाएँ अनवरत प्रकाशित।

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