जिजीविषा की कहानी: डियर कैंसर (एक संघर्ष)

विवेक मिश्र

समीक्षक: विवेक मिश्र

लेखिका लतिका बत्रा की नयी पुस्तक पुकारा है जिंदगी को कई बार ... डियर कैंसर (एक संघर्ष) पर विवेक मिश्र की लघु-समीक्षा। लतिका बत्रा की अन्य प्रकाशित पुस्तकें: तिलांजलि (उपन्यास), दर्द के इंद्रधनुष (साँझा संग्रह) हैं। वे पत्र-पत्रिकाओं में भी नियमित लिखती हैं।



पुकारा है जिंदगी को कई बार ... डियर कैंसर (एक संघर्ष)
लेखिका: लतिका बत्रा
आईएसबीएन: 978-81-948407-2-5
पृष्ठ 103,  हार्डकवर
शब्दाहुति प्रकाशन (shabdahuti.in)
मूल्य: ₹ 350.00 रुपये

लतिका बत्रा का यह उपन्यास शुरू में एक कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ते मनुष्य के दुख-दर्द, उसके डर, उसके संशय , संघर्ष, इस यात्रा में उसके आसपास के वातावरण के बदलने, उससे उसके जीवन में अच्छे-बुरे अनुभवों के स्मृतियों में जुड़ने और पहले से संचित अच्छी स्मृतियों के धीरे-धीरे हाथ से फिसलते जाने और उनकी जगह यथार्थ के भयावह चित्रों के, भविष्य के डरावने सपनों के जगह बनाते जाने की व्यथा कथा मालूम होती है।



लतिका बत्रा
पर अंत तक आते-आते यह एक मनुष्य की जीने की अदम्य इच्छा, उसकी जिजीविषा की कहानी, उसके मौत को, उसके डर को, अपने संशयों को धता बताकर विजयी भाव से जीवन में लौट आने वाले एक योद्धा की कथा बनकर सामने आती है।

लेखिका की विषय से करीबी वृतांत को बहुत विश्वसनीय और मार्मिक बना देती है और इसे आप एक सच्ची डायरी के रूप में पढ़ते हुए आगे बढ़ते हैं, जहाँ आप बीमारी का डर, उसकी भयवहता, उसके उपचार की गहनता, ऐसे में बीमारी से जूझते व्यक्ति के बदलते  मनोभावों से एक साथ रूबरू होते हैं।

हिंदी में इस तरह बीमारियों को केंद्र में रखकर जीवन की जद्दोजहद के बहुत कम ही उपन्यास हैं। लेखिका ने इसे बहुत श्रम और साहस से लिखा है और ऐसे विषय का निर्वाह करते हुए भी पठनीयता बनाए रखी है, इसके लिए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ। 
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