व्यंग्य: गला तर करके आएँ

धर्मपाल महेंद्र जैन

बिंदास: धर्मपाल महेंद्र जैन

अमेरिका या कैनेडा की किसी बड़ी कंपनी को कभी आपने फ़ोन किया होगा। यह दूसरी-तीसरी घंटी में जुड़ जाता है तो लगता है कितनी शानदार ‘सर्विस’ है। भारत में घंटी जाती भी रहे तो कोई फ़ोन नहीं उठाता। यहाँ फ़ोन जुड़ते ही यंत्रवत संदेश बजने लगते हैं। इन घिसे-पिटे संदेशों को इतनी बार सुन चुका हूँ कि वे याद हो गए हैं। मसलन पहला संदेश है– ‘आपका फोन हमारे लिए खास है, कुछ देर इंतजार करें।’ मैं कुछ देर इंतज़ार करता हूँ पर मशीन मौन रहती है। मुझे लगता है शायद कंपनी ‘चैप्टर इलेवन’ अपनाकर दिवालिया होना चाहती है। तभी नया संदेश बजता है- ‘विलंब के लिए क्षमा करें। हमारे अधिकारी दूसरे ग्राहक से बात कर रहे हैं।’ मैं जानता हूँ उनके अधिकारी बात नहीं कर रहे, वे किसी ग्राहक की डाँट खा रहे हैं। शायद इनकी कंपनी अपनी सेवाएँ ऑउटसोर्स करके सो गई है। कंपनियों का लाभ बढ़ रहा है, कस्टमर मरें तो मरें, उनकी जान विदेशी कॉल सेंटर वालों के हाथ में है।

अनलिमिटेड डैटा मिल रहा है तो मैं भी फोन का स्पीकर ऑन करके बैठा हूँ। बहुत देर तक कोई संदेश नहीं बजा तो मुझे संदेह हुआ कि मेरे फोन की बैटरी डॉउन न हो गयी हो। बैटरी है, जरूरत के वक्त जरूर डॉउन हो जाती है। अन्यथा, इंस्टाग्राम या स्नैपचैट पर फालतू की हीरोगीरी करना हो तो पूरी चार्ज रहती है। सौभाग्य से बैटरी जिंदा थी। अब नया संदेश बजा– ‘आज हमारी फोन लाइनें रोज की अपेक्षा अधिक व्यस्त हैं। आप बाद में फोन करें या कुछ देर लाइन पर रहें, जल्दी ही किसी अधिकारी को आपकी सेवा करके खुशी होगी।’

जब मैंने फोन लगाया था, मुझे आशा थी दस-पंद्रह मिनट में बात हो जाएगी। पहले दो मिनट तक वे मुझसे बटन दबवाते रहे कि अंग्रेजी में बात करना हो तो एक दबाएँ, फ्रेंच के लिए दो, स्पेनिश के लिए तीन। मैंने शून्य दबा दिया। अक्सर शून्य दबाने पर अधिकारी फटाफट हाजिर हो जाते हैं पर इस बार मशीन अड़ियल निकली। बोलने लगी –‘हमारे मेनू विकल्प बदल गए हैं।’ उसने सारे विकल्प बता दिए पर उसमें अधिकारी से बात करने का विकल्प था ही नहीं। मुझे नहीं मालूम, बड़ी कंपनियों या सरकारी दफ्तरों में क्या दबाओ कि किसी आदमी से बात हो जाए। पन्द्रह मिनट हो गए फ़ोन पर टंगे-टंगे। हर संदेश के बाद मशीन क्षमा मांगने लग गई। क्षमा मांगने में कैसी शर्म, अधिकारी जब आएगा तब ही आएगा। कंपनियाँ इतना कमाती हैं पर स्टाफ नहीं बढाती। ‘सॉरी-सॉरी’ कहकर कमाने का यह नुस्खा अमेरिका और कैनेडा में बहुत बढ़ गया है।

कोई फोन पर पच्चीस-तीस मिनट इंतजार करते रहे तो कई बार फोन स्वतः कट जाता है। तब अवयस्क उम्र में जितनी वयस्क गालियाँ सीखी थीं, सब होठों पर आ जाती हैं। बस मैं उन्हें दोहरा नहीं पाता। सभ्य और सुसंस्कृतज्ञ होने में यही खतरा है, अपनी भड़ास दिल में ही गुर्राती रहती है। कंपनियों के फ़ोन में लगी ‘आंसरिंग मशीन’ आधुनिका हो गई है। मुझसे पूछती है आप कौन-सा संगीत सुनेंगे? संगीत चुनने के लिए पहले सात दबाएँ, फिर जाझ सुनना हो तो एक, पॉप के लिए दो, कंट्री के लिए तीन, रेप के लिए चार दबाएँ। मैं सोचता हूँ कोई लोरी सुन लूँ, कम से कम नींद निकाल लूँ पर लोरी सुनने का विकल्प नहीं है। मशीन क्षण भर रुकी तो मैंने भी साँस ले ली। वह फिर कहने लगी, ‘कृपया स्टाफ से बातचीत में शालीनता बनाए रखें। स्टाफ को धमकाना, उससे अभद्रता या गाली-गलौच करना, अपशब्द कहना या उसका अपमान करना हमें स्वीकार्य नहीं है।’ अब मुझे आशा बंध गई कि अधिकारी शीघ्र जुड़ने वाला है। अधिकारी के फोन पर घंटी जा रही थी पर वह फोन नहीं उठा रहा था। शायद वह अपने दफ्तर या घर के बॉस से झगड़ रहा होगा। बाद में अपना गुस्सा ग्राहक पर निकालेगा, फोन पर हाथापाई करने से तो रहा। मशीन ने अब नया संदेश दिया, ‘धैर्य से प्रतीक्षा करने के लिए धन्यवाद। कृपया ध्यान रखें कि स्टाफ के प्रशिक्षण हेतु आपकी बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है।’ मैं अब समझने लगा हूँ कि कंपनियों ने अपने ग्राहकों को डराने और काबू में रखने का यह नया हथियार ईजाद किया है। आप कभी रिकॉर्डिंग मांगेंगे तो वे साफ इंकार कर देंगे हैं, झाँसा देते हैं बस।

खैर, यह बत्तीसवाँ मिनट है। मेरे ग्रह-नक्षत्र ठीक हुए तो कोई अधिकारी आएगा और यदि मेरी किस्मत ठेके पर लिखी गई होगी तो यह फोन कट जाएगा। धर्मनिरपेक्ष आस्तिक हूँ इसलिए भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा था कि उधर से सुरीली आवाज आई। ‘मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हूँ? मैं आपकी पहचान सुनिश्चित कर सकूँ इसके लिए कुछ प्रश्नों के उत्तर बताएँ जैसे आपकी माँ का नाम, आपकी जन्म तारीख।’ फिर उसने कुछ कठिन प्रश्न पूछे। मेरा सोशल सिक्योरिटी (कैनेडा में सोशल इंश्योरेंस) नंबर और ऐसे सुरक्षा प्रश्न जो मैंने पाँच साल पहले चुने थे, जिनके उत्तर मुझे याद नहीं आए। याददाश्त ऐनवक्त पर धोखा दे जाए तो ‘सॉरी’ कहकर ही चुप रह जाता हूँ। अपना दिमागी इलाज कराने के लिए हज़ारों डॉलर चाहिए। अधिकारी हताश हो जाती है, कहती है, ‘सर, आपकी आवाज का जो नमूना हमारे पास दर्ज है उससे आपकी आवाज नहीं मिल रही।’ मैं उसे बताता हूँ कि पाँच साल पहले मैं बहुत खुश था, तब मल्टीनेशनल कंपनी का ग्राहक बन रहा था। आज मैं पैंतीस मिनट से फोन पकड़े बैठा आपका इंतजार कर रहा हूँ। मेरा गला सूख गया है। आपके प्रश्नों के उत्तर देते-देते थक गया हूँ पर आप मेरी समस्या ही नहीं सुन रहीं, उसे सुलझाना तो दूर की बात है।’ वह बोली ‘सर, मुझे क्षमा करें। हमारा सिस्टम आपकी पहचान नहीं कर लेता तो फाइल नहीं खुलेगी। आप सही जानकारी जुटाएँ। गला तर करके फिर से फोन करें और यह साबित करें कि आप वही धर्मपाल जैन हैं।’ मैं जीवित हूँ पर साबित नहीं कर पा रहा हूँ।


ईमेल: dharmtoronto@gmail.com फ़ोन: + 416 225 2415
सम्पर्क: 1512-17 Anndale Drive, Toronto M2N2W7, Canada

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