कविताएँ: अविनाश कुमार राव

अविनाश कुमार राव
आज भी भोजन को तरस रही

वह जब सब्जियों के संग
लकठा या खुरमा लेकर
बाज़ार से आते थे
उस मिठाई का
जायका सब लेते थे।

उन बच्चों का दौड़कर आना
हँसना, बातें करना
बुढ़ापे की राह की गाड़ी थे।

परीक्षा की बारी थी
अब बुढ़ापा गिर गया
सहसा! कूल्हा सरक गया। 

बोल दी एक बहू ने
नहीं खिला पाऊँगी अब मैं
बाद, कुछ महीने
दूसरी बहू ने भी
भोजन से पल्ला झाड़ लिया।

तीसरी बीमार होने का
बहाना परोस दिया
लड़कों ने अपनी
गरीबी और नौकरी का हवाला दे दिया।

अब बुढापा समझ गया
घिसटते लाठियों के सहारे
वह धीरे-धीरे नदी के तीरे
एकांत हो लिए।

निर्झर अश्रुओं ने
कालकवलित पत्नी से कहे दुःख सब
तुम अकेली नहीं रहोगी अब
मैं भी आ रहा हूँ
पत्नी आँसू भाँप गई
बोला दुःख क्षण
वर्तमान से हार गया हूँ
बच्चों को खुश रहने दो।

कुछ दिन बाद
भूखे-भूखे नदी में बुढापा लुढ़क गया
आई लाश ऊपर जब
लडके, बहुएँ रोए सब।

हाथ पीट-पीटकर
चिल्लाते चीत्कार
यह हो गया कैसे?

छोड़ कर आप मुझे
नहीं जा सकते
बाद अन्तिम संस्कार के
अस्थियाँ नहाईं
काशी, हरिद्वार, प्रयाग में
दान खूब किया गया ब्रह्मभोज में
दीवार पर रंगीन चित्र
भी माला के साथ लटक गया
पर, यह देख
परंपरा आगे चलती रही वही
मिलती रही सबको यातना यही
पिता की आत्मा दीवार में लटकी
आज भी भोजन को तरस रही।
***


तबाही के मंजर में

तबाही के मंजर में
दीपक गरीबों के बुझते हैं
औरों के तो चकाचौंध रोशनी से
लेंस वाले चश्मे लगते हैं।

स्वेटर गरीबों के बुने जाते हैं
राजतंत्र के अगुआ उसे पहनते हैं
आँधी में दुर्बल तरु ही उखड़ते हैं
पेड़ राजा सुरक्षा में ढके रहते हैं।

जग जिनसे गतिशील है
हाथ में उनके छाले हैं
अलगाव में बिन छत वाले ही मरते हैं
नवाब महलों में ही छिपे रहते हैं।

संकट में धनहीनों की ही
श्मशान पर लाशें बिछती हैं
शासक सियासत की बिसात से
पंच-पाठ किया करते हैं।

कलमधारी नौकरी-चाकरी
निरक्षर देश चलाने को फुफकारते हैं
वही बेढंगी थाली में छेद
और देश को पंक्चर कर छोड़ते हैं।  

फफोला, गाँठ हाथों में रखकर
पेट जिनका भरते हैं
सियासत की कुर्सी जिनसे होकर आती है
बारंबार आँखों में धूल मुफ़लिस ही झेलते हैं।
***

कवि परिचय
संस्कृत व हिंदी शिक्षक, दिल्ली पब्लिक स्कूल फुलबाड़ी, जलपाईगुड़ी – 734015 (पश्चिम बंगाल)                                                                                                                      
कविताएँ व लेख रेडियो से प्रसारित, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में भागीदारी, साहित्य अकादमी की संस्कृत-प्रतिभा में प्रकाशित, अनुदित लघु कथा व रचित काव्य, अन्य पत्र-पत्रिकाओं में कथा-काव्य प्रकाशित 
चलभाष: +91 775 405 4211
ईमेल: avinash.rao1234@gmail.com

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।