वर्तमान युगीन सरोकारों की कहानियों का संग्रह - 'प्यार के रिश्ते'

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

28, सारंग विहार, मथुरा-6 
चलभाष: +91 987 063 1805 
ईमेल: drdinesh57@gmail.com

पुस्तक: प्यार के रिश्ते  (कहानी संग्रह)
लेखक: आचार्य नीरज शास्त्री
ISBN: 979-88-862919-6-4
पृष्ठ: 152 
मूल्य: ₹ 200.00 रुपये
प्रकाशन वर्ष: 2022
प्रकाशक: एक्सप्रेस पब्लिशिंग, चेन्नई - 600004


साहित्य को समाज का दर्पण कहा गया है। हिन्दी साहित्य के व्यापक फलक पर लेखन की भाव-भूमि और शैली-शिल्प में कुछ दशकों से तीव्रता से परिवर्तन हुआ है। आज का साहित्यकार युगीन सामाजिक सरोकारों को प्रतिबिम्बित करने के साथ-साथ विसंगतियों एवं परिप्रेक्ष्य सामने लाने तथा उनके समाधान की खोज की प्रगतिशीलता को प्रमुखता देता दिखाई देता है। आज हिन्दी साहित्य जगत की कहानी विधा अपनी लोकप्रियता के चरम पर दिखाई देती है। अनेक कहानीकार अपनी कहानियों में नये-नये प्रयोग करते दिखाई दे रहे हैं। पत्र- पत्रिकाएँ ही नहीं आज फेसबुक, ब्लॉग, वाट्सअप आदि सोशल मीडिया के मंचों पर भी कहानी विधा का वर्चस्व स्थापित हो चुका है। इस भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने को आतुर दिखने वाले कहानीकारों में आचार्य नीरज शास्त्री का नाम भी उल्लेखनीय है। 

आचार्य नीरज शास्त्री  दीर्घावधि से हिन्दी साहित्य की काव्य विधा में रचना प्रक्रिया से जुड़े रहकर कवि साथियों के बीच अपना प्रमुख स्थान बनाने में सफल रहे हैं। कुछ वर्षों से, काव्य के साथ-साथ गद्य हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं- कहानी, लघुकथा, समालोचना, व्यंग्य आदि और उनमें भी विशेषतः कहानी विधा की ओर उनका झुकाव और उत्कृष्ट कहानियों का सृजन उनकी बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित करता है। 'प्यार के रिश्ते' उनका दूसरा कहानी संग्रह है। इससे पूर्व उनका 'रिश्तों का मान' कहानी संग्रह हिन्दी साहित्य जगत में बहुचर्चित रहा है।

इस कहानी संग्रह में आचार्य नीरज शास्त्री की बारह कहानियाँ संग्रहीत हैं। अधिकांश कहानियाँ जीवन के यथार्थ की भूमि से जुड़ी हुई हैं। इनकी, इन कहानियों में वर्तमान युगीन पारिवारिक समस्याओं व स्त्री-पुरुष सम्बन्धों का आधुनिक बोध और सामाजिक परिदृश्यों को प्रमुखता से उभारा गया है। आनर किलिंग के नाम पर किए जाने वाले अमानवीय

जुल्म तथा माता-पिता द्वारा पुत्री को कूड़े की तरह घर से बाहर करना या  दहेज के भय से छोड़ देना जैसे जघन्य विषयों पर भी लेखक ने अपनी बेबाक लेखनी चलाई है। 

बेटियों के प्रति जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश को रेखांकित करती है कहानी 'तपस्या'। इस कहानी में कहानीकार ने अपनी ही पुत्री की पीड़ा न समझने वालों के साथ- साथ रिश्तों को निभाने के लिए अग्निपरीक्षा के दौर से गुजर कर सफलता के शीर्ष पर पहुँचने वाली लड़कियों के उत्साह को भी शब्दांकित किया है।

'ग़लत निर्णय' कहानी लेखक की वह कहानी है जो पति-पत्नी दोनों को एक रूप होकर एक दूसरे के स्वाभिमान की रक्षा की प्रेरणा देती है, साथ ही कोई भी निर्णय लेने से पहले चिंतन-मनन की भी प्रेरणा देती है।

समय परिवर्तनशील है और समय के बदलाव के साथ-साथ बहुत कुछ बदल जाता है। वर्तमान युगीन जैनरेशन गैप और उससे उत्पन्न विसंगतियों की ओर इंगित करती कहानी है-

श्राप: यह एक भावात्मक कहानी है। इस कहानी में पढ़े-लिखे बच्चों द्वारा माता-पिता की अवहेलना और उनको अपमानित करना तथा इस कुकृत्य के परिणामस्वरूप दुरावस्था को झेलना दिखाया गया है। शिल्पगत कसावट में भी शास्त्री जी ने इस कहानी में विशेष सतर्कता बरती है।

आचार्य नीरज शास्त्री
'भाग्य विधाता' शास्त्री जी की सर्वश्रेष्ठ और मन को छू लेने वाली कहानियों में से एक है। इस कहानी में कथाकार ने कहानी कला के सभी तत्वों का विशिष्ट प्रयोग कर अन्य कहानियों की ही तरह सुखान्त करते हुए मानवीय रिश्तों के प्रति आस्था एवं विश्वासपूर्ण सम्बन्धं के प्रति निष्ठा रखने का संदेश दिया है।

वर्तमान युग में दाम्पत्य जीवन के समीकरण बदलते जा रहे हैं। जहां नारी सशक्तीकरण और बराबरी के नाम पर नारी के विचारों में क्रान्तिकारी बदलाव दिखाई देते हैं वहीं माता-पिता द्वारा एक खूंटे पर बाँध दिए जाने वाली गाय की तरह वह शोषण झेलने को मजबूर है।एक स्त्री के द्वारा ही दूसरी स्त्री के शोषण व उच्छृंखलता की सीमाऐं पार करना भी देखा जा रहा है।ऐसी स्थिति में मानवीय रिश्ते का निर्वाह कितना कठिन होता है।यह द्रश्य 'मुस्कान' कहानी को अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है।

केवल अपने पति के ही साथ रहने की ललक में स्त्रियाँ कई बार अपने परिवार के श्रेष्ठतम और पवित्रतम चरित्र वाले व्यक्तियों पर भी आरोप लगाने से नहीं चूकतीं क्योंकि उन्हें केवल अपना स्वार्थ दिखाई देता है परन्तु समय के थपेड़े उन्हें यह समझा ही देते हैं कि अपने बड़े ही सदा सुरक्षा की छाँव दे सकते हैं। ऐसी ही परिस्थितियों का चित्रण है कहानी 'गलती का अहसास'। 
 
त्याग की पराकाष्ठा की कहानियाँ 'पन्ना धाय' के समय से ही प्रच लित रही हैं। कहानी 'यशोदा' की नायिका भी अपनी मौसी की पुत्री के मरणोपरान्त उसके बच्चों के लालन-पालन हेतु अपने बहनोई से विवाह का प्रस्ताव करती है व जीवन भर स्वयं की संतान न उत्पन्न करने का फैसला लेकर दोनों बच्चों का पालन-पोषण करती है।

दिनेश पाठक ‘शशि’
'दीपावली का महापर्व' कहानी इस भ्रष्टाचार के युग में ईमानदार रहते हुए कर्त्तव्यशील बने रहने की प्रेरणा देती है तथा भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के विनाश का चित्र प्रस्तुत करती है।

कोरोनाकाल में उत्पन्न हुए बेरोजगारी के संकट और उसके समाधान की प्रेरणा देती हैं कहानियां 'लच्छू' और 'आत्मनिर्भर'।

 'तपस्या' कहानी कई समस्याओं पर एक साथ चोट करती है जैसे माता-पिता द्वारा पुत्रियों का त्याग, शहर जाने वाले का गाँव से मोहभंग होना, लड़कियों की परवरिश में समाज का असहयोग तथा साधू-सन्तों के द्वारा आश्रमों के नाम पर नारी देह की तस्करी एवं नारी देह के प्रति साधू-सन्तों की लिप्सा आदि को चित्रित करने वाली यह कहानी अपने गठन एवं शिल्प के आधार पर भी विशेष है।

इस प्रकार स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की विकलता, गृहस्थ जीवन की विसंग तियाँ, नारी स्वातंत्र्य के दुष्परिणाम, जैनरेशन गैप और उससे जनित समस्याएँ तथा वैमनस्य जैसी समस्याओं जैसे वर्तमान युगीन सरोकारों को आचार्य नीरज शास्त्री ने अपनी कहानियों में पिरोया है। कहानियों की भाषा सहज-सरल एवं पात्रानुकूल है। शैली चित्रात्मक एवं भाव प्रधान है।

हिंदी साहित्य जगत में इस संग्रह का स्वागत होगा, ऐसी आशा है।

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