रमेश जोशी: कौन सुने इकतारा

रमेश जोशी

प्रधान सम्पादक, 'विश्वा', अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, संयुक्त राज्य अमेरिका

 1.

अपना पंथ उदासी भगतो
क्या काबा क्या कासी भगतो

किस स्वारथ में राज बन गया
कुछ गुंडों की दासी भगतो

दो रोटी की खातिर किसके
बेटे हुए प्रवासी भगतो

भारत माता सी लगती है
महिला कौन रुआंसी भगतो

लगता है  बाबा जिंदा हैं
जब-तब सुनकर खांसी भगतो

जाने किसके चक्कर में हम
 भटकें लख चौरासी भगतो

2.

उजाला कपड़ा लत्ता भगतो
कुछ दिन संग अलबत्ता भगतो

कोई शै' ना होती तो भी
होती उसकी सत्ता भगतो

दुनिया दूर दूर से देखो
मधुमक्खी का छत्ता भगतो

नौ प्रतिशत महंगाई बढ़ती
बस दो प्रतिशत भत्ता भगतो

पतझड़ और बहार बराबर
साधू उड़ता पत्ता भगतो

केवल चमकीली पेकिंग है
नहीं कोई गुणवत्ता भगतो
***

कौन सुने इकतारा से साभार
लेखक: रमेश जोशी
ISBN : 978-81-910761-3-4 | 112 Pages
अनुज्ञा बुक्स | पत्रबंध | 2013 |  ₹ 125.00

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