आनंदप्रकाश जैन

आनंदप्रकाश जैन
‘पराग’ पत्रिका के यशस्वी संपादक और शीर्ष कथाकार आनंदप्रकाश जैन का जन्म 15 अगस्त, 1927 को शाहपुर (जि. मुजफ्फर नगर, उ.प्र.) के एक संपन्न जमींदार परिवार में हुआ था। उनकी सृजन-यात्रा केवल तेरह साल की उम्र से ही प्रारंभ हो गई थी। पहली कहानी ‘जीवन नैया’ सरसावा से निकलने वाली ‘अनेकांत’ पत्रिका में सन् 1941 में प्रकाशित हुई थी। फिर तो निरंतर कहानियाँ लिखने का सिलसिला चल पड़ा। 200 से अधिक कहानियाँ ‘धर्मयुग’, ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान’, ‘सरिता’ व ‘ज्ञानोदय’ सरीखी उस दौर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। 
सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में दो वर्ष का सश्रम कारावास, जिसने उनके लेखक होने के संकल्प को और मजबूत किया। 
आनंद जी ने कई पत्र-पत्रिकाओं का कुशल संपादन किया। 1959 से 1973 तक प्रसिद्ध बाल-पत्रिका ‘पराग’ के संपादक रहे। उनकी संपादन-कला के जादू ने ‘पराग’ की कीर्ति और लोकप्रियता को शिखर तक पहुँचा दिया। 
उपन्यास: ‘कठपुतली के धागे’, ‘तीसरा नेत्र’, ‘कुणाल की आँखें’, ‘पलकों की ढाल’, ‘तांबे के पैसे’, ‘तन से लिपटी बेल’, ‘नागपाश’, ‘एक बिरहन चित्तौड़ी’, ‘आग और फूस’, ‘अंतर्मुखी’, तथा ‘आठवीं भाँवर’। इसके अलावा ‘चंदर’ उपनाम से अस्सी से अधिक लोकप्रिय रोमांचकारी उपन्यासों की भी रचना।  
कहानी-संग्रह: ‘आनंदप्रकाश जैन की लोकप्रिय कहानियाँ’, ‘आटे के सिपाही’, ‘लाल पन्ने’, ‘काल के पंख’, ‘इति और हास’, ‘संशय का युग’ तथा ‘मुरगे’। इनमें ‘मुरगे’ संग्रह में 11 हास्य कहानियाँ संकलित है।
बाल-साहित्य: आनंद जी की बाल कहानियों का संग्रह ‘आनंदप्रकाश जैन की संपूर्ण बाल कहानियाँ’ (संपादक – प्रकाश मनु) खासा चर्चित हुआ। उनकी सौ से अधिक बाल कहानियाँ, नाटक और उपन्यास उस दौर की प्रसिद्ध बाल पत्र-पत्रिकिाओं में प्रकाशित हुए। सचित्र लोक-कथा माला में ‘तेलंगाना की लोक कथाएँ’ (तीन भाग), ‘डेनमार्क की कथाएँ’ (तीन भाग) तथा ‘भारतीय गौरव की लोक कथाएँ’ (तीन भाग) प्रकाशित। रहस्य और रोमांच से पूर्ण फंतासी-कथा ‘चंद्रलोक की राजकुमारी’ की रचना। अनेक बाल रचनाएँ पाठ्य पुस्तकों में सम्मिलित।
बाल उपन्यास: ‘भूलना मत काका’, ‘महाबली का भ्रम’, ‘ताऊ-तिलकू की कहानी’, ‘सोनबाला और सात बौने’ तथा ‘साँवरी सलोनी’। इसके अलावा ‘अदृश्य मानव’ (पाँच खंड), ‘अदृश्य एटम’ (पाँच खंड) और ‘चाँद की मल्का’ (दस खंड) सरीखी लोकप्रिय औपन्यासिक कृतियाँ भी। ये उपन्यास किशोरों में बेहद लाकप्रिय हुए थे। रोमांचकारी जासूसी बाल उपन्यास-सीरीज ‘डबल सीक्रेट एजेंट 001/2 के अंतर्गत लिखे गए उपन्यास ‘आफत के परकाले’, ‘ढीली ईट का रहस्य’, ‘तू चल मैं आया’ आदि भी बहुत चर्चित हुए। इनमें से कई उपन्यास पराग’, ‘सारिका’ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। 
नाटक: ‘मास्टर जी’ (1960) संग्रह में तीन रंगमंचीय नाटक है। इसके अलावा 50-55 नाटक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कई नाटक आकाशवाणी पर प्रसारित। ‘परियों के देश में’,  ‘भूख हड़ताल’, ‘बचत आंदोलन’, ‘झल्लीवाला’ आदि नाटक बाल पाठकों में बहुत लोकप्रिय हुए। रोचक कॉमिक्स भी लिखे, जिनमें राम-श्याम सीरीज़ का ‘डबल-सीक्रेट एजेंट’ ‘धर्मयुग’ में धारावाहिक रूप से प्रकाशित। कुछ कॉमिक्स ‘टिंकल’ और ‘कंचन-कॉमिक्स’ में धरावाहिक रूप से छपे।
निधन: 8 जुलाई, 1996 को मुंबई में निधन।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।