मैत्री दिवस की बधाई!

पानी को दूध के नाम से बेचने वाला ग्वाला, कल्पित रोजनामचे भरने वाले अधिकारी वर्ग, रेल में बिना टिकट सफर करने वाले बाबू लोग, जाली दस्तावेज बनाने वाले सेठ और साहूकार, ये सब के सब देवताओं की भाँति गर्दनें चला रहे थे। (प्रेमचंद कृत 'नमक का दरोगा' से एक अंश)
अनुराग शर्मा
नमस्कार,

आज 31 जुलाई को हिंदी और उर्दू के ख्यातनाम साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन है। हिंदी साहित्य जगत में उनकी स्मृति में विभिन्न आयोजन हो रहे हैं। उनके लेखन का आरम्भ उर्दू से हुआ, बल्कि मान्यता यह है कि उर्दू में आधुनिक कथा-साहित्य का विधिवत बिस्मिल्लाह मुंशी नवाबराय (उर्फ़ प्रेमचंद) से ही हुआ है। उर्दू साहित्य जगत में उनके नाम का चर्चा वैसा नहीं हो रहा जिसके वे अधिकारी हैं, लेकिन हिंदी परिवार ने उन्हें याद रखा यही क्या कम है! निर्वासन की मर्यादा हो, शूद्रा के गौरा और मंगरू, या नमक का दरोगा में अंग्रेज़ों के दमनकारी नमक-क़ानून की बात हो, प्रेमचंद की कृतियों का विषय-क्षेत्र अत्यंत विस्तृत रहा है। आजकल जाने-अनजाने ही उनके क्षेत्र को मुहावरेदार भाषा, ग्रामीण अंचल, या दलित विमर्श जैसी सीमाओं में बांधने करने की प्रवृत्ति देखने में आ रही है, जो सही नहीं है। कई आलेखों में उन्हें विपन्न और वंचित दर्शाने के प्रयास भी दिखते हैं जो तथ्यों के विपरीत हैं।

तीन दिन बाद यानी 3 अगस्त को कवि दिवस मनाया जायेगा जो स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्मदिन होता है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गुप्त जी और उनके समकालीन अनेक साहित्यकारों का अमिट योगदान रहा है। लोकमान्य बाल गंगाधर टिळक भी ऐसे ही प्रातःस्मरणीय व्यक्ति हैं जिनका जन्म 23 जुलाई को और प्रयाण दिवस कल यानी एक अगस्त को है। संयोग है कि टिळक जी अपना जन्मदिन एक अनन्य हुतात्मा चंद्रशेखर आज़ाद के साथ साझा करते हैं।

15 अगस्त 1927 को जन्मे मूर्धन्य लेखक और पराग पत्रिका के यशस्वी सम्पादक स्वर्गीय आनंद प्रकाश जैन की पुण्यतिथि 8 जुलाई को थी। उनकी सुपुत्री मंजुरानी जैन के मार्मिक संस्मरण 'मेरे पापा आनंदप्रकाश जैन' के और प्रख्यात लेखक प्रकाश मनु का आलेख 'आनंदप्रकाश जैन, जिन्होंने हिंदी बाल साहित्य को आधुनिक बनाया' भी इस अंक में सम्मिलित हैं।

इसी माह महाश्वेता देवी और नीलाभ अश्क की पुण्यतिथियाँ थीं और इसी माह 28 जुलाई को नामवर सिंह का जन्मदिन था। आज मुहम्मद रफ़ी (24 दिसंबर 1924 - 31 जुलाई 1980) की पुण्यतिथि भी है। बचपन में मुझे उनकी आवाज़ 2बी की पेंसिल जैसी हमवार लगती थी। निःसंदेह, वे अपने समय के सर्वश्रेष्ठ गायकों में से एक हैं, विनम्र श्रद्धांजलि!

कल अंतरराष्ट्रीय मैत्री दिवस था। आप तथा आपके सभी मित्रों को सेतु परिवार की ओर से हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएँ!

हमेशा की तरह इस अंक पर भी आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है।

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 जुलाई 2022 ✍️

1 comment :

  1. धन्यवाद।
    सुंदर सम्पादकीय

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