अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार विकसित होता पर्यटन स्थल: शिवराजपुर बीच (द्वारका, गुजरात)

राजेंद्र कुमार शर्मा

राजेंद्र कुमार शर्मा


अगर हम अपने देश के सुंदर और मनमोहक समुद्र तटों की बात करें तो उसमे गोवा और केरल के कोवलम का नाम इस श्रेणी में सबसे ऊपर लिया जा सकता है। हाल ही में देश कुछ और समुद्र तटों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है, उन्हीं में से एक है - शिवराजपुर बीच या समुद्र तट, जो की अरब सागर के किनारे बसे, गुजरात की श्री कृष्ण नगरी द्वारका जिले में स्थित है। यह समुद्र तट, द्वारका से मात्र 12-13 किलोमीटर की दूरी पर, द्वारका-ओखा मार्ग पर स्थित है। कहा जाता है की शिवराजपुर गाँव का निर्माण 19वीं शताब्दी की शुरुआत में बड़ौदा राज्य द्वारा किया गया था। इसे फाउंडेशन फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन के नाम से जानी जाने वाली डेनमार्क स्थित अंतरराष्ट्रीय स्वैच्छिक एजेंसी द्वारा अक्टूबर 2020 में प्रतिष्ठित 'ब्लू फ्लैग बीच' प्रमाणन से सम्मानित किया गया था; इस समुद्र तट का स्वच्छ नीला पानी के साथ इसका किनारा सफेद रेत का समुद्र तट है।

'ब्लू फ्लैग' प्रमाणन प्राप्त करने के लिए कड़े मानदंडों की एक लंबी सूची होती हैं, जिसमें समुद्री जल की गुणवत्ता और संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ अन्य मानदंड शामिल हैं जिन्हें लगातार पूरा करने की आवश्यकता होती है। जिसे इस समुद्र समुद्र तट सौर ऊर्जा से चलता है। समुद्र तट का सबसे बड़ा आकर्षण है यहाँ दिखाई  देने वाले दुर्लभ समुद्रीजीव।

समुद्र यहाँ  उथला है और तैरने के लिए उपयुक्त समुद्र तट है। समुद्र तट तक हवाई, ट्रेन और सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। दिल्ली  से वाया राजकोट होकर फ्लाइट से या ट्रेन से पहुँचा जा सकता है। मुंबई से वाया जामनगर हवाई यात्रा द्वारा पहुँचा जा सकता है। देव भूमि द्वारका, देश के सभी मुख्य स्टेशनों से रेल मार्ग एवम सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। द्वारका से शिवराजपुर समुद्र तट तक पहुँचने के लिए पर्यटक स्थानीय यातायात का साधन जैसे ऑटो  रिक्शा , कार आदि ले सकते है।

समुद्र तट का समय सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक है।  एक मामूली प्रवेश शुल्क 30 रु प्रति व्यक्ति है।तथा पार्किंग शुल्क 50 रुपए प्रति वाहन रखा गया है।  तथा यहाँ भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च रहता है।  समुद्र तट पर सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध रहते है ताकि पर्यटक उथले समुद्र से गहरे समुद्र की ओर न जा सके।

तट के पास कच्छीगढ़ लाइटहाउस नाम का एक लाइटहाउस है। ऐसा माना जाता है कि कच्छ के शासक महाराव देशलजी ने 11 मीटर ऊँचे काले रंग की चिनाई वाले एक छोटे से किले का निर्माण किया था। किले का उद्देश्य कच्छी जहाजों को सुरक्षा और आश्रय प्रदान करना था। यहाँ नावों की आपातकालीन मरम्मत, राशन और पीने के पानी जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई गईं। बैटरी से चलने वाली फ्लैशिंग लाइट को 1977 में केबिन के शीर्ष पर रखा गया था जो इस क्षेत्र की पहली लाइट थी। 26 जनवरी 2001 को आए भूकंप ने लाइटहाउस को क्षतिग्रस्त कर दिया था लेकिन इसे तुरंत बहाल कर दिया गया था।

समुद्र तट पर पर्यटन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। 'ब्लू फ्लैग' समुद्र तट की घोषणा के बाद, गुजरात सरकार ने इसके सौंदर्यीकरण के पीछे पैसा खर्च करने का फैसला किया है। सरकार शिवराजपुर समुद्र तट को दो चरणों में विकसित करने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने जनवरी 2021 में पर्यटन-केंद्रित परियोजनाओं की आधारशिला रखी और शिलान्यास किया। पहले चरण में  साइकिल ट्रैक, मार्ग, पार्किंग क्षेत्र, पेयजल सुविधा, शौचालय ब्लॉक, आगमन प्लाजा और पर्यटक सुविधा केंद्र विकसित किया जाएगा। फेज-2 के तहत इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का समुद्र तट बनाने के लिए और सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। भविष्य में 'शिवराजपुर समुद्र तट पर गोवा की तुलना में बेहतर सुविधाएँ होंगी'। समुद्र तट पर की जाने वाली गतिविधियों में स्कूबा डाइविंग, नौका विहार और द्वीप भ्रमण शामिल हैं।

शिवराजपुर समुद्र तट के पास कुछ उल्लेखनीय आकर्षणों में शामिल हैं: द्वारकाधीश मंदिर, बेट द्वारका, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, रुक्मिणी देवी मंदिर और सन सेट प्वाइंट द्वारका, गोपी तालाब, डांडी हनुमान बेट द्वारका, सूर्य मंदिर वरवाला। जो पर्यटक एक बार शिवराजपुर समुद्र तट (बीच) पर आते है वो हर बार यहाँ आना चाहते है, ऐसी है शिवराजपुर बीच की सुंदरता।









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परिचय: राजेंद्र कुमार शर्मा
मैं वर्ष 1995 से साहित्यिक गतिविधियों एवम साहित्य सेवा में क्रियाशील हूँ। मेरी मातृ भाषा हिंदी  है अतः मैंने अपनी साहित्यिक रचनाओं में मेरी मातृभाषा को ही एक सशक्त माध्यम रूप में प्रयोग किया है। मेरा साहित्यिक यात्रा, राष्ट्रीय समाचार पत्रों के पाठकीय स्तंभ से आरंभ हुई।  कई वर्षों तक मैने सामाजिक कुरीतियों और अन्य आर्थिक, राजनैतिक, साहित्यिक  मुद्दों देश में प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों में लिखा।  पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ वर्षों तक अपने लेखन  कार्य में कुछ वर्षों के विराम के बाद, वर्ष 2021 में  पुनः लेखन आरंभ किया।

निवास: देहरादून, उत्तराखंड।
ईमेल: rksmyvoice@gmail.com
चलभाष: 8954034771

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